ईरान के साथ अमेरिका की जंग के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) एक बार फिर जोखिम से बच रहे हैं। इस कारण उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली की है। इस महीने विदेशी निवेशकों ने अब तक करीब 58,064 करोड़ रुपये (6.3 अरब डॉलर) के शेयर बेचे हैं, जो जनवरी 2025 के बाद से एक महीने में सबसे बड़ी पूंजी निकासी है।
इससे पहले फरवरी में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में फिर से खरीदारी करने लगे थे। इसकी वजह भारत के यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते थे। लेकिन नए भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण बाजार धारणा फिर से नकारात्मक हो गई।
केवल सोमवार को ही विदेशी निवेशकों ने 9,366 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेशकों की बिकवाली केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों से भी उन्होंने इस महीने अब तक क्रमशः लगभग 9.5 अरब डॉलर और 15.8 अरब डॉलर निकाले हैं।
ईरान, अमेरिका और इजरायल की यह लड़ाई अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है और इसके जल्द खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। इससे हाल के वर्षों में वैश्विक तेल आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा पैदा हो गई है। बताया जाता है कि ईरान ने पश्चिम एशिया में कच्चा तेल ले जाने वाले जहाजों पर हमला किया है और होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही रोक दी है जो दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति का महत्त्वपूर्ण मार्ग है। संघर्ष की शुरुआत के बाद से सेंसेक्स लगभग 7.1 प्रतिशत और निफ्टी 7 प्रतिशत गिर चुका है।