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दुबई में घर खरीदने का है सपना? जानें LRS और FEMA के ये कड़े नियम, वरना फंस सकता है पैसा

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दुबई में घर खरीदने से पहले RBI के LRS और FEMA नियमों को समझना जरूरी है, ताकि निवेश सुरक्षित रहे और आप कानूनी कार्रवाई से बच सकें।

Last Updated- March 14, 2026 | 5:52 PM IST
Dubai

दुबई की प्रॉपर्टी भारतीयों के लिए बड़ा आकर्षण बनी हुई है। वहां की शानदार बिल्डिंग्स, अच्छी लाइफस्टाइल और निवेश से मिलने वाले रिटर्न की वजह से कई लोग और एक्सपैट्स वहां प्रॉपर्टी खरीदने की सोचते हैं। लेकिन भारतीय निवेशकों को यह काम आसानी से नहीं हो पाता। RBI और FEMA के सख्त नियमों को ध्यान में रखना पड़ता है।

LRS से होती है मुख्य खरीदारी

भारतीय रेजिडेंट व्यक्ति दुबई में प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, लेकिन इसके लिए सबसे आम तरीका लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) है। इस स्कीम के तहत कोई भी व्यक्ति एक वित्त वर्ष (अप्रैल से मार्च) में 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर तक विदेश भेज सकता है। यह पैसा प्रॉपर्टी खरीदने जैसे अनुमत कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर हिमांशु चहर के मुताबिक भारतीय रेजिडेंट LRS के जरिए दुबई में प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं, लेकिन इसकी सालाना सीमा 2.5 लाख डॉलर ही है। पैसे को किसी अधिकृत बैंक के माध्यम से सही पर्पज कोड के साथ भेजना जरूरी होता है। साथ ही फंड्स का स्रोत पूरी तरह वैध और टैक्स चुकाया हुआ होना चाहिए।

फैमिली के साथ मिलकर बढ़ा सकते हैं लिमिट

अगर प्रॉपर्टी संयुक्त नाम से खरीदी जा रही है, तो परिवार के सदस्य अपनी-अपनी LRS लिमिट जोड़ सकते हैं। अकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलाय रजवी के मुताबिक, ऐसा तभी संभव है जब सभी लोग प्रॉपर्टी के टाइटल डीड में जॉइंट ओनर हों। इससे कुल रकम बढ़ जाती है और बड़ी प्रॉपर्टी खरीदना आसान हो सकता है।

Also Read: महंगे नए घरों के बीच रीसेल प्रॉपर्टी की बढ़ी मांग, खरीद से पहले बरतें ये जरूरी सावधानियां

कुछ एंटिटीज़ के लिए बंद है रास्ता

यह सुविधा सिर्फ रेजिडेंट व्यक्तियों के लिए है। कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म, ट्रस्ट या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) LRS का फायदा नहीं ले सकते। अल्फा पार्टनर्स के एसोसिएट पार्टनर शिवांक अरोड़ा के मुताबिक LRS की सुविधा केवल व्यक्तिगत रेजिडेंट्स के लिए है, किसी संस्था के लिए नहीं।

टैक्स में दिखाना जरूरी

प्रॉपर्टी खरीद लेने के बाद भी भारतीय नियमों का पालन करना पड़ता है। विदेश में खरीदी गई प्रॉपर्टी की जानकारी भारतीय इनकम टैक्स रिटर्न में देनी होती है। अगर उससे किराया मिलता है या बेचने पर मुनाफा होता है, तो उसकी भी जानकारी टैक्स फाइलिंग में दिखानी पड़ती है। हिमांशु चहर के मुताबिक LRS के जरिए भेजे गए पैसे, खरीदी गई प्रॉपर्टी और उससे होने वाली कमाई को टैक्स रिटर्न में जरूर बताना चाहिए।

लोन लेना मुश्किल

दुबई में बैंक या बिल्डर से लोन लेकर प्रॉपर्टी खरीदना भारतीयों के लिए आसान नहीं है। FEMA के नियमों के मुताबिक रेजिडेंट भारतीय आम तौर पर विदेशी लोन लेकर विदेश में प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते। अकॉर्ड ज्यूरिस के मैनेजिंग पार्टनर अलाय रजवी के मुताबिक UAE के बैंक या डेवलपर से फाइनेंसिंग लेना भी नियमों के तहत संभव नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट के वकील तुषार कुमार कहते हैं कि विदेश के किसी लेंडर से लोन लेकर प्रॉपर्टी खरीदना FEMA नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। वहीं एलारा लॉ ऑफिसेस की माधुरी सामंत का कहना है कि फाइनेंसिंग के तरीके को लेकर नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। यही वजह है कि भारतीय बैंक भी आम तौर पर विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए होम लोन नहीं देते।

कंप्लायंस की अहमियत

ये नियम थोड़े जटिल होते हैं। विदेश पैसे भेजने की लिमिट, लोन लेने की पाबंदी, टैक्स में जानकारी देना और पैसे वापस लाने जैसे कई नियम लागू होते हैं। अगर इनका पालन नहीं किया गया तो FEMA के तहत जुर्माना लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील तुषार कुमार के मुताबिक नियमों का उल्लंघन करने पर आर्थिक पेनल्टी लग सकती है।

इसी वजह से एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने से पहले पूरी प्लानिंग करें और पैसे भेजने से पहले किसी कानूनी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।

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First Published - March 14, 2026 | 5:52 PM IST

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