संपादकीय: उच्च शिक्षा के लिए फंडिंग
उच्च शिक्षा की फंडिंग में सरकारी धन के उपयोग को लेकर बहस नई नहीं है। उच्च शिक्षा के अधिकांश लाभ जहां इसे हासिल करने वाले व्यक्ति को होते हैं, वहीं इसके कुछ बाहरी लाभ भी हैं, मसलन प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ, उच्च शोध एवं नवाचार और अर्थव्यवस्था में अधिक कुशल श्रम शक्ति की उपलब्धता। उच्च शिक्षा […]
संपादकीय: क्या हो नीतिगत रुख
बीते वर्षों में अनेक केंद्रीय बैंकों ने अपना संचार बेहतर बनाने का प्रयास किया है ताकि वित्तीय बाजार नीतियों को गलत न समझे या उनकी गलत व्याख्या न करे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इसका अपवाद नहीं है। मौद्रिक नीति के संदर्भ में गवर्नर के नीतिगत वक्तव्य तथा मौद्रिक नीति समिति (MPC) के संकल्प के […]
ट्रंप का दूसरा कार्यकाल: विश्व अर्थव्यवस्था और भूराजनीति के लिए नई अनिश्चितताएं
डॉनल्ड ट्रंप चार साल के अंतराल के बाद दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत गए हैं। इस जीत ने सर्वेक्षणों को धता बता दिया है और डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनाव के पहले की आशंकाओं को रेखांकित किया है। यह मुकाबला किसी भी लिहाज से करीबी नहीं था। ट्रंप न केवल रिपब्लिकन प्रभुत्व […]
संपादकीय: चुनौतीपूर्ण है निजी पूंजी जुटाना
अजरबैजान की राजधानी बाकू में आगामी 11 से 22 नवंबर के बीच आयोजित होने जा रहे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन (कॉप29) में जलवायु वित्त तथा इसके लिए राशि जुटाना वार्ताकारों के बीच प्रमुख विषय होगा। विभिन्न देश, खासकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देश जलवायु वित्त के मामले में करीब 800 अरब डॉलर की […]
संपादकीय: शेयर बाजार पर बिकवाली का दबाव
वर्ष 2024-25 के दौरान देश के वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का असर रहा है। खासतौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के रुख ने बाजार को प्रभावित किया है। अप्रैल 2024 से 4 नवंबर, 2024 तक एफपीआई ने कुल मिलाकर भारतीय शेयरों में तकरीबन 8,644 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है। परंतु बिकवाली तीन खास […]
संपादकीय: आयुष्मान भारत में हो क्षमता विस्तार
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 70 से अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को (चाहे वे किसी भी आय वर्ग के हों) स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना, भारत की जनसांख्यिकी में बदलाव की समझ को दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के मुताबिक साल 2050 तक भारत में उम्रदराज लोगों की हिस्सेदारी बढ़कर […]
Editorial: भारतीय बैंकिंग में AI का बढ़ता प्रभाव; निजी बैंक अग्रणी, नई तकनीकों से होगा विकास
अपनी हालिया भारत यात्रा के दौरान एनवीडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी जेन्सेन हुआंग ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में यह क्षमता है कि वह नवाचार के इस युग में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाकर लंबी छलांग लगा सकता है। एआई में यह काबिलियत है कि वह तकनीक का लोकतंत्रीकरण करे और लोगों […]
संपादकीय: मनरेगा पर घटे निर्भरता
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MANREGA) लागू हुए करीब 18 वर्ष हो चुके हैं और विभिन्न अध्ययनों ने दिखाया है कि ग्रामीण आजीविका पर इसका प्रभाव कितना सकारात्मक रहा है। यह योजना महामारी के दौरान और समाज के सर्वाधिक संवेदनशील वर्गों को जरूरी सहायता प्रदान करने में विशेष तौर पर उपयोगी साबित हुई। […]
संपादकीय: साइबर अपराधियों से सरकार ही निपटे
Digital Arrest: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने नवीनतम रेडियो संबोधन में साइबर ठगी (cyber fraud) के बढ़ते खतरे के बारे में बात की। हाल के दिनों में साइबर अपराधियों ने कई लोगों को निशाना बनाया है और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर धमकी दी है। वे साइबर ठगी करते समय पुलिस अधिकारी, प्रतिभूति बाजार […]
संपादकीय: एफएमसीजी कंपनियों का अलग-अलग अनुभव
हाल के महीनों में दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) की कई कंपनियों के वरिष्ठ प्रबंधन ने एक जटिल समस्या को सामने ला दिया है। वह यह कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था विचलन की ओर है? दूसरे शब्दों में क्या दो अलग-अलग भारत दो अलग आर्थिक मार्गों पर बढ़ रहे हैं? एफएमसीजी कंपनियां आय वाले समय […]









