facebookmetapixel
Advertisement
अब पैकेट बंद खाने पर रहेगी चीनी, नमक और वसा के मात्रा की चेतावनी, SC ने FSSAI को लगाई कड़ी फटकारबारामती हादसे के बाद DGCA का बड़ा एक्शन: 14 चार्टर विमान कंपनियों का शुरू हुआ ‘स्पेशल सेफ्टी ऑडिट’लोक सभा में थमा एक हफ्ते का गतिरोध, अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष ने दिया नोटिसमहत्वपूर्ण खनिजों को लेकर नीति आयोग की केंद्र को बड़ी चेतावनी, कहा: पर्यावरण की कीमत पर न हो माइनिंगअमेरिकी बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मचेगी धूम! 46 अरब डॉलर के मार्केट में मिलेगी ‘ड्यूटी-फ्री एंट्री’CBSE का बड़ा फैसला: अब कंप्यूटर पर जांची जाएंगी 12वीं की कॉपियां, OSM सिस्टम होगा लागूसियासी जंग का बमगोला बना तिरुपति का लड्डू, TDP और YSRCP में सियासी जंगब्रांड की दुनिया में स्मृति मंधाना का जलवा: पुरुषों के दबदबे वाले विज्ञापन बाजार में लिख रहीं नई इबादतभारत-अमेरिका ट्रेड डील में डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत का वादा, शुल्क मुक्त ई-ट्रांसमिशन पर होगी बात!IPO, QIP और राइट्स इश्यू से जुटाई रकम पर सेबी की नजर, नियम होंगे सख्त

लेखक : आकाश प्रकाश

आज का अखबार, लेख

धीमी होगी चाल और ऊपर जाएंगे बाजार

अधिकांश निवेशक फिलहाल इस पहेली में उलझ कर रह गए हैं कि भारतीय और अमेरिकी बाजारों को लेकर क्या रणनीति अपनाई जाए। पिछले 30 वर्षों के दौरान ये दोनों ही दुनिया के बेहतरीन बाजार रहे हैं, परंतु वर्तमान परिदृश्य में दांव लगाने के लिहाज से सबसे महंगे दिख रहे हैं। तो क्या यह सोचते हुए […]

आज का अखबार, लेख

बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मुद्रीकरण और हम

मैं कई दशकों से भारतीय बाजारों में निवेश कर रहा हूं। इस दौरान, हमने वैश्विक कंपनियों को भारतीय परिचालन में निरंतर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते देखा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने लगातार ऐसे अवसरों की तलाश की है जिनकी बदौलत वे अपना आर्थिक स्वामित्व बढ़ा सकें या अपनी भारतीय अनुषंगी कंपनियों को पूरी तरह निजी बना सकें। […]

आज का अखबार, लेख

विदेशी निवेशकों के लिए भारत में चुनाव नतीजे के मायने

भारत दीर्घ अवधि के लिहाज से उम्दा दांव बना हुआ है, मगर मूल्यांकन को लेकर निवेशकों के मन में चिंता लगातार बनी हुई है। बता रहे हैं आकाश प्रकाश मुझे अमेरिका में वैश्विक निवेशकों एवं दीर्घ अवधि के लिए पूंजी लगाने वाले दिग्गजों के साथ कुछ समय व्यतीत करने का अवसर मिला था। इनमें कई […]

आज का अखबार, लेख

पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए कठिनाई भरा समय

बाजारों के नेतृत्व और उनकी शैली में बड़ा बदलाव आ रहा है। यह काफी हद तक वैसा ही है जैसा कि 2003 से 2008 के बीच की तेजी के दौर में देखने को मिला था। बता रहे हैं आकाश प्रकाश अब जबकि बाजार नई ऊंचाइयों की ओर हैं, तो यह इक्विटी पोर्टफोलियो के संचालन के […]

आज का अखबार, लेख

मौजूदा वैश्विक हालात में बेहतर स्थिति में है भारत

मौजूदा वैश्विक हालात में अगर तुलना की जाए तो भारत विभिन्न मोर्चों पर चीन और अफ्रीका से बहुत बेहतर स्थिति में है। इस विषय में जानकारी प्रदान कर रहे हैं आकाश प्रकाश दुनिया भर में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच मैं कई ऐसी प्रस्तुतियों से दो-चार हुआ जो भूराजनीति पर केंद्रित थीं। भूराजनीति को […]

आज का अखबार, लेख

शेयरों की पुनर्खरीद और उसका महत्त्व

विश्व भर में और खासकर अमेरिका में कंपनियों द्वारा निवेशकों को पूंजी लौटाने का एक तरीका शेयरों की बायबैक (पुनर्खरीद) भी है। आंशिक तौर पर ऐसा शेयर आधारित कर्मचारी मुआवजे के कारण आई कमी की भरपाई के लिए किया जाता है और आंशिक तौर पर ऐसा बेहतर कर कुशलता के कारण यह निवेशकों को पूंजी […]

आज का अखबार, लेख

ऋण आधारित पूंजी के बिना नहीं बनेगी बात

सभी लोग भारत की आर्थिक विकास की यात्रा की खुशी मना रहे हैं। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर अब 8 प्रतिशत पार कर गई है, जो कम नहीं मानी जा सकती। अधिकांश निवेशक इस धारणा के साथ निवेश कर रहे हैं कि आने वाले दशक में भारत पूरे दस वर्षों की […]

आज का अखबार, लेख

मैग्निफिसेंट 7 पर बाजार की निर्भरता दे रही जोखिम के संकेत

वैश्विक इक्विटी बाजारों में सभी जिस नए नाम की चर्चा कर रहे हैं वह नाम ‘द मैग्निफिसेंट सेवन’ (मैग सेवन) है। ये दरअसल अमेरिका की सात सबसे बड़ी कंपनियां हैं, जिनका बाजार पूंजीकरण सबसे अधिक है (माइक्रोसॉफ्ट, ऐपल, एनवीडिया, एमेजॉन, अल्फाबेट, मेटा और टेस्ला) और पिछले कुछ वर्षों में इन कंपनियों का प्रदर्शन शानदार रहा […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: सूचीबद्धता की दुविधा का कैसे हो हल?

बीते कुछ सप्ताह में कई निजी कंपनियों ने मुझसे पूछा है कि उन्हें कहां सूचीबद्ध होना चाहिए? भारत में या अमेरिका में? इन चर्चाओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि हमें वेंचर कैपिटल/निजी इक्विटी क्षेत्र से कई नई सूचीबद्धताएं देखने को मिलेंगी। सूचीबद्धता की दिशा में यह कदम भारत और अमेरिकी बाजारों की मजबूती […]

आज का अखबार, लेख

Budget 2024: लोकलुभावन नहीं राजकोषीय जवाबदेही

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की इस बात के लिए सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने राजकोषीय अनुशासन की दृष्टि से मजबूत और लोकलुभावन घोषणाओं से मुक्त बजट प्रस्तुत किया। इससे जाहिर होता है कि सरकार 2024 के आम चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त है इसलिए उसे लोकलुभावन कदमों की कोई आवश्यकता नहीं महसूस हुई। […]

1 2 3 4 5
Advertisement
Advertisement