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टाटा स्टील की डच इकाइयों पर 1.4 अरब यूरो का पर्यावरणीय मुकदमा

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नीदरलैंड में टाटा स्टील की सहायक कंपनियों पर 1.4 अरब यूरो का पर्यावरणीय मुकदमा दायर हुआ है, जिसे कंपनी ने खारिज किया है।

Last Updated- December 27, 2025 | 9:06 AM IST
Tata Steel
Representative Image

टाटा लिमिटेड ने बताया है कि नीदरलैंड में उसकी डच सहायक कंपनियों को 1.4 अरब यूरो के मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। यह मुकदमा एक पर्यावरण समूह ने दायर किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी के स्टील बनाने के काम से होने वाले उत्सर्जन से स्वास्थ्य और संपत्ति को नुकसान हुआ है।

शेयर बाजार की दी गई सूचना में टाटा स्टील ने कहा कि स्टिचिंग फ्रिसे विंड.एनयू (एसएफडब्ल्यू) ने 19 दिसंबर को टाटा स्टील नीदरलैंड बीवी और टाटा स्टील आईजमुइडेन बीवी को समन भेजा है। यह कार्यवाही हार्लेम में नॉर्थ हॉलैंड की जिला अदालत में डच एक्ट ऑन कलेक्टिव सेटलमेंट ऑफ मास क्लेम्स (डबल्यूएएमसीए) के तहत शुरू की गई है।

एसएफडब्ल्यू ने कहा है कि वह टाटा स्टील के आईजमुइडेन संयंत्र के पास रहने वाले निवासियों की ओर से काम कर रहा है। यह मुकदमा इस आरोप से जुड़ा है कि वेल्सन-नूर्ड में टाटा स्टील के परिचालन से निकलने वाले खतरनाक या नुकसानदायक पदार्थों के उत्सर्जन से निवासियों के स्वास्थ्य और रहने के हालात पर बुरा असर पड़ा है।जानकारी के अनुसार एसएफडब्ल्यू लगभग 1.4 अरब यूरो का मुआवजा मांग रहा है, जिसमें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता और घरों में रहने का सुख छिनना शामिल है। इस दावे को सही ठहराते हुए एसएफडब्ल्यू ने कहा कि टाटा स्टील के परिचालन के असर के कारण इस क्षेत्र में घरों की औसत कीमतें आस-पास के इलाकों की तुलना में कम हैं।

टाटा स्टील ने कहा कि ये दावे ‘बेबुनियाद और अटकलबाजी’ हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि एसएफडब्ल्यू ने मांगे गए मुआवजे के लिए कोई सबूत नहीं दिया है। कंपनी ने कहा कि उसकी डच सहायक कंपनियां, जिन्हें सामूहिक रूप से टीएसएन कहा जाता है, इन आरोपों को खारिज करती हैं और इन दावों को बिना किसी आधार के मानती हैं।

टाटा स्टील ने कहा, ‘टीएसएन का मानना है कि उसके पास इन दावों के खिलाफ बचाव के लिए दमदार तर्क हैं और वह अपना जोरदार बचाव करेगी।’
कंपनी ने यह भी कहा कि उसके आकलन के अनुसार एसएफ डब्ल्यू को मामले की स्वीकार्यता और अपने दावों के आधार दोनों को ही साबित करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

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First Published - December 27, 2025 | 9:06 AM IST

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