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दुर्लभ मैग्नेट, बैटरी और सोलर सेल के स्वदेशीकरण की जरूरत: सीईए

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सीईए वी अनंत नागेश्वरन ने 7 क्षेत्रों को बताया अत्यधिक जरूरी और व्यवहारिक, जबकि 3 में चुनौतियां बनीं

Last Updated- January 08, 2026 | 8:55 AM IST
CEA Ananth Nageswaran

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम), बैटरी सेलों और कैथोड मैटेरियल्स व सोलर वेफर्स और सेल्स सहित 3 क्षेत्रों का स्वदेशीकरण बहुत जरूरी है, लेकिन इसकी व्याहारिकता ‘कम से मध्यम’की श्रेणी में है। अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी है।

उन्होंने 7 क्षेत्रों की भी पहचान की है जहां स्वदेशीकरण अत्यधिक जरूरी और अत्यधिक व्यवहारिक दोनों है। इनमें दालें, खाद्य तेल और तिलहन, एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्स (एपीआई)और प्रमुख मध्यवर्ती व उर्वरक इनपुट जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम के विकल्प शामिल हैं। सात क्षेत्रों में से शेष 3 में महत्त्वपूर्ण औद्योगिक रसायन, गैर-फ्रंटियर सेमीकंडक्टर चिप्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सहित दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरण और इंसुलेटेड गेट बाइपोलर ट्रांजिस्टर (आईजीबीटी) और मेटल-ऑक्साइड-सेमीकंडक्टर फील्ड-इफेक्ट ट्रांजिस्टर (एमओएसएफईटी) जैसे पावर इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।

सीईए ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राज्य के मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान यह जानकारी साझा की थी। इस समय आरईपीएम के कुल वैश्विक उत्पादन में चीन का करीब 90 प्रतिशत नियंत्रण है। इन मैगनेट्स का इस्तेमाल वाहनों के कुछ कलपुर्जे बनाने, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के ट्रैक्शन मोटर बनाने में होता है। चीन ने अप्रैल 2025 से भारत में आरईपीएम निर्यात प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे घरेलू ऑटोमोबाइल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

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First Published - January 8, 2026 | 8:55 AM IST

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