पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस वजह से भारत की कई ऊर्जा कंपनियों ने अपने कॉन्ट्रैक्ट में मौजूद फोर्स मेज्योर नियम लागू कर दिया है। इस नियम के तहत अगर किसी बड़ी और अचानक हुई घटना की वजह से कंपनी अपना काम नहीं कर पाती, तो वह कुछ समय के लिए अपनी जिम्मेदारी टाल सकती है।
फोर्स मेज्योर किसी कॉन्ट्रैक्ट की वह शर्त होती है जिसमें अगर कोई बड़ी घटना हो जाए और उसके कारण कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें पूरी करना संभव न हो, तो दोनों पक्षों को कुछ समय के लिए राहत मिल जाती है। इसमें आम तौर पर युद्ध, प्राकृतिक आपदा या सरकार की कार्रवाई जैसी घटनाएं शामिल होती हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के बड़े एलएनजी निर्यातक देशों में शामिल कतर ने ईरान के ड्रोन हमले के बाद अपने रस लाफान गैस प्लांट में काम रोक दिया है। यह प्लांट दुनिया की कुल एलएनजी सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा देता है। नॉर्वे की ऊर्जा सलाहकार कंपनी रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, सप्लाई कम होने से प्राकृतिक गैस की कीमतें 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई हैं। भारतीय कंपनियों का कहना है कि ईरान और इजराइल से जुड़ा संघर्ष भी इसका कारण है। पश्चिम एशिया में हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच है और दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से जाता है।
भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने कतरएनर्जी को तीन एलएनजी जहाजों दिशा, राही और असीम के लिए फोर्स मेज्योर का नोटिस भेजा है। कंपनी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति के कारण जहाज फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित तरीके से नहीं गुजर पा रहे हैं और इसलिए कतर के रस लाफान बंदरगाह तक पहुंचना मुश्किल है। कंपनी का कहना है कि इस स्थिति का कितना असर होगा, इसका अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। पेट्रोनेट एलएनजी ने यह भी कहा कि युद्ध जैसी घटनाएं उसके बीमा में शामिल नहीं होती हैं।
सरकारी कंपनी मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स ने भी मार्च और अप्रैल के लिए गैसोलीन निर्यात पर फोर्स मेज्योर लागू किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने खाड़ी देशों से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट का हवाला दिया है। वहीं गुजरात गैस ने कहा है कि रीगैसिफाइड एलएनजी की उपलब्धता बहुत कम हो गई है। कंपनी 6 मार्च से उद्योगों को गैस की सप्लाई कम करेगी और अपने समझौतों में फोर्स मेज्योर लागू करेगी। कंपनी का कहना है कि युद्ध जैसी घटनाएं बीमा में शामिल नहीं होतीं और अभी यह साफ नहीं है कि इसका पूरा असर कितना होगा।
फोर्स मेज्योर का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है। इसे कोविड महामारी, रूस और यूक्रेन के युद्ध या किसी सप्लायर की बड़ी समस्या के समय भी लागू किया गया था।