भारत के कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक रूप से 3.1 प्रतिशत की मामूली दर से बढ़ने की उम्मीद है जबकि यह पिछले वित्तीय वर्ष में 4.6 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025-26 में अच्छे मॉनसून और मजबूत फसल उत्पादन के बावजूद जीवीए कम रहा। दरअसल, जीवीए कम रहने का कारण आधार प्रभाव और अप्रत्यक्ष कारक हैं।
कृषि और संबद्ध गतिविधियों की जीवीए की नाममात्र वृद्धि दर वित्त वर्ष 26 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर सिर्फ 0.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि यह पिछले वित्तीय वर्ष में 10.4 प्रतिशत थी। इस गिरावट का मुख्य कारण महंगाई में भारी गिरावट है।
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार इसका किसानों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि फसल की कीमतों से कम रिटर्न मिल रहा है। कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए नॉमिनल जीवीए वित्त वर्ष 26 की जुलाई से सितंबर तिमाही में सिर्फ 1.8 प्रतिशत बढ़ा।
यह बीते वित्तीय वर्ष की इस तिमाही में 7.6 प्रतिशत था। नॉमिनल जीवीए में गिरावट का मुख्य कारण खाद्य महंगाई में भारी गिरावट है। वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए जीवीए नॉमिनल रूप से 3.2 प्रतिशत था और यह वित्त वर्ष 25 की इसी अवधि के 7.5 प्रतिशत से कम था।
आशंका है कि कृषि क्षेत्र अपनी संबद्ध गतिविधियों के जीवीए में गिरावट से बेहद प्रभावित हो सकता है। कृषि क्षेत्र की संबद्ध गतिविधियां काफी हद तक पशुधन, वानिकी और मछली पकड़ने से संबंधित हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘वास्तविक रूप से कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए जीवीए में गिरावट का मुख्य कारण आधार प्रभाव और नॉमिनल के मामले में अप्रत्यक्ष प्रभाव है। इसका कारण यह है कि जब जीवीए की गणना की जाती है तो यह पहले नॉमिनल के मामले में की जाती है।’
उन्होंने कहा कि यह गिरावट संबद्ध क्षेत्रों के प्रभाव के कारण भी हो सकती है। कुल जीवीए में संबद्ध क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है, लेकिन कृषि क्षेत्र के इस हिस्से की वास्तविक समय के आधार पर उत्पादन और कीमतों के बारे में बहुत कम जानकारी है।