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चीन के कदम से देसी प्लास्टिक पाइप कंपनियों को दम, पिछले एक साल में शेयर 23% टूटे

चीन के वित्त मंत्रालय ने हाल में सस्पेंशन पीवीसी पर मूल्य वर्द्धित कर या वैट निर्यात छूट को हटाने का ऐलान किया है। यह इस साल अप्रैल से प्रभावी होगी

Last Updated- January 15, 2026 | 10:11 PM IST
Pipe Stocks

प्लास्टिक पाइप बनाने वाली कंपनियों के शेयर लगातार दबाव में रहे हैं। कमजोर मांग, बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा, क्षमता में इजाफा करने की होड़ और पॉलीविनाइल क्लोराइड या पीवीसी की कीमतों में कमी जैसे कई झटके इन शेयरों को लगे हैं। सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर पिछले एक साल में औसतन 23 प्रतिशत नीचे रहे हैं।

इस दौरान प्रिंस पाइप्स ऐंड फिटिंग्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है और यह 39 प्रतिशत तक फिसला है। हालांकि, यह क्षेत्र निर्यात पर चीन की सख्ती के कारण कुछ राहत महसूस कर सकता है। चीन की सरकार पीवीसी की क्षमता से अधिक आपूर्ति रोकने और उच्च मात्रा एवं कम मार्जिन वाले निर्यात रोकने की कोशिश कर रही है।

चीन के वित्त मंत्रालय ने हाल में सस्पेंशन पीवीसी पर मूल्य वर्द्धित कर या वैट निर्यात छूट को हटाने का ऐलान किया है। यह इस साल अप्रैल से प्रभावी होगी। जेएम फाइनैंशियल रिसर्च के धर्मेश शाह और अन्य विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से सस्ते चीनी निर्यात का प्रतिस्पर्धी फायदा कम होने की उम्मीद है।

चालू वित्त वर्ष के पहले 7 महीनों में भारत ने 15 लाख टन एसपीवीसी का आयात किया। यह घरेलू जरूरत का 60-65 प्रतिशत था। इसमें से 50 प्रतिशत चीन से आया। चीन से निकट अवधि में निर्यात में तेजी आने से अगले कुछ महीनों में अस्थायी रूप से कीमतों में नरमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि निर्यात की उच्च लागत और चीन से खेप में किसी तरह की नरमी से वैश्विक आपूर्ति तंग हो सकती है जिससे मध्य अवधि में पीवीसी की कीमतों को मदद मिलेगी। सुप्रीम इंडस्ट्रीज इस क्षेत्र में उनकी पहली पसंद बनी हुई है।

प्रभुदास लीलाधर रिसर्च का भी मानना है कि निर्यातक चीनी रोक लागू होने से पहले खेप को जल्द रवाना कर सकते हैं जिससे कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही में मूल्य निर्धारण का अस्थायी दबाव हो सकता है। ब्रोकरेज कंपनी के प्रवीण सहाय का कहना है कि मध्य अवधि में चीन से पीवीसी निर्यात में लगभग 10-20 प्रतिशत की कमी से वैश्विक आपूर्ति में तंगी हो सकती है और समय के साथ पीवीसी की कीमतों को बल मिल सकता है। तेल उत्पादों और पीवीसी छूट में कटौती के पुराने रुझान बताते हैं कि निर्यातक मार्जिन में काफी कमी आने की उम्मीद है जिससे विदेशी बाजारों में कीमतें कम आक्रामक रहेंगी।

प्रभुदास लीलाधर रिसर्च को उम्मीद है कि मजबूत ब्रांड और वितरण वाली बड़ी कंपनियां ऐसे माहौल में बाजार में हिस्सेदारी पर कब्जा करेंगी। ऐस्ट्रल को लेकर इस ब्रोकरेज कंपनी का रुख सकारात्मक है। अगले दो वर्षों के लिए मात्रा में 15 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। अगर भविष्य में एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाती है तो पीवीसी रेजिन की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। ऐसा तब हो सकता है जब रिलायंस या अदाणी जैसे बड़े समूह पीवीसी रेजिन क्षमता में इजाफा करें।

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग को भी उम्मीद है कि नवंबर 2025 के दौरान बीआईएस गुणवत्ता नियंत्रण आदेश वापस लेने और पीवीसी पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू नहीं होने के कारण निकट भविष्य में इस क्षेत्र के लिए हालात थोड़े कठिन रह सकते हैं। घरेलू उद्योग पहले से ही सस्पेंशन ग्रेड पीवीसी और सीपीवीसी के आयात में लगातार वृद्धि से दबाव में है जिससे राजस्व पर दबाव बढ़ रहा है। नतीजा यह है कि दिसंबर तिमाही में औसत घरेलू पीवीसी की कीमतों में 9-10 प्रतिशत की गिरावट आई है।

ब्रोकरेज कंपनी के मनीष महावर और रोशन नायर का मानना है कि मूल्य संवर्द्धन और रुपये में कमजोरी के बावजूद कंपनियों की वसूली कोविड-19 से पहले के स्तर के करीब पहुंच रही है। इसे देखते हुए उन्हें आने वाली तिमाहियों में भंडार नुकसान से जुड़े जोखिम कम रहने का अनुमान है। इससे खासकर वित्त वर्ष 2027 से आगे की कमाई को स्थिरता मिलेगी। सुप्रीम इंडस्ट्रीज इस क्षेत्र में उनकी पहली पसंद है।

First Published - January 15, 2026 | 10:07 PM IST

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