भारतीय सेना ने गुरुवार को जयपुर में 78वें सेना दिवस परेड के दौरान अपनी सैन्य ताकत की बेमिसाल झलक पेश की। इस परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद गठित नई पीढ़ी की फुर्तीली आक्रामक लड़ाकू इकाई भैरव बटालियन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से भाग लिया।
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड का औपचारिक निरीक्षण किया। गुलाबी शहर के नाम से मशहूर जयपुर में सैनिकों ने हथियारों और आधुनिक मिसाइलों के साथ सड़कों पर भारत की सैन्य ताकत का मुजाहिरा किया। यह पहला मौका था जब परेड छावनी क्षेत्र के बाहर आयोजित की गई थी। परेड के दौरान मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं जिससे पूरा माहौल एक अदम्य ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।
सेना प्रमुख ने कहा, ‘जयपुर में सेना दिवस मनाना भारतीय सेना को नागरिकों के करीब ले जाने के हमारे प्रयास को दर्शाता है।’उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने ‘एक नया मानदंड स्थापित किया’और दृढ़ और जिम्मेदार कार्रवाई के माध्यम से गति, समन्वय और सटीकता के साथ जवाब देने की भारतीय सेना की क्षमता का प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि ‘अश्वनी दस्ता’, ‘शक्तिबाण रेजिमेंट’ और ‘दिव्यास्त्र बैट्रीज’ जैसे नए दस्तों के साथ सेना भविष्य के युद्ध के लिए स्वयं को तैयार कर रही है। द्विवेदी ने कहा कि स्वदेशीकरण अब एक रणनीतिक जरूरत बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि अगले दो वर्षों में भविष्य के लिए तैयार सेना बनाने के लिए ‘नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रित परिचालन’ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
सेना प्रमुख ने मरणोपरांत सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, लांस नायक सुभाष कुमार और लांस नायक प्रदीप कुमार के परिवारों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी वीरता को सलाम करते हुए सेना पदक से सम्मानित किया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे।
परेड का एक मुख्य आकर्षण नवगठित भैरव बटालियन थी जिसे युद्ध में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए विशेष रूप से आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पैरा स्पेशल फोर्स और नियमित इन्फैंट्री इकाइयों के बीच तैनात किया गया है। इन बटालियनों को ड्रोन-सक्षम और बहु-क्षेत्रीय संचालन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि दुश्मन के खतरों के खिलाफ सटीक आक्रामक अभियान चलाया जा सके।
उभरती प्रौद्योगिकियों पर भी खास जोर दिया गया है। इनमें रोबोट डॉग, सभी क्षेत्रों के लिए अनुकूल वाहन और एकीकृत ड्रोन पहचान एवं रोकथाम प्रणाली का प्रदर्शन किया गया। यह प्रणाली सभी हवाई खतरों का पता लगाकर और उन्हें गतिज या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से बेअसर करता है। ‘ड्रोन शक्ति’ पहल की भी खूब नुमाइश हुई जो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और स्वदेशी ड्रोन निर्माण को एकीकृत करने के प्रयासों को रेखांकित करती है।
वायु रक्षा प्रणालियों में स्वदेशी आकाशतीर प्रणाली और इगला मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम की भी नुमाइश की गई। सेना ने मिनी हार्पी, हारोप, पीसकीपर, स्काई स्ट्राइकर और त्रिनेत्र प्रणाली जैसे कामिकेज ड्रोन की एक श्रृंखला का प्रदर्शन किया जो युद्ध में मानव रहित प्लेटफार्मों की बढ़ती भूमिका का प्रतीक हैं।
सेना ने आर्टिलरी, मिसाइल और रॉकेट प्रणालियों की एक श्रृंखला का भी प्रदर्शन किया जिनमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, उन्नत बीएम-21 रॉकेट प्रणाली और यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम शामिल हैं जिसे सूर्यास्त्र के नाम से भी जाना जाता है।
प्रदर्शन में एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम और एम777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर जैसी आर्टिलरी सिस्टम, अर्जुन टैंक, के-9 वज्र, धनुष गन और बीएमपी इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल भी शामिल थे। परेड में एक हवाई खंड शामिल था जिसमें चेतक हेलीकॉप्टरों ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं।
हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है क्योंकि 1949 में इसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार संभाला था जो बाद में फील्ड मार्शल बने। करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश चीफ जनरल फ्रांसिस आर आर बुचर की जगह ली थी।