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25% अमेरिकी शुल्क का असर भारत पर सीमित, ईरान पर पड़ेगा सबसे ज्यादा दबाव

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अमेरिका के नए टैरिफ फैसले से कई देश प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन ईरान के साथ घटते व्यापार के कारण भारत पर इसका असर सीमित रहने की संभावना

Last Updated- January 15, 2026 | 9:45 AM IST
india trade
Representational Image

अर्थव्यवस्था के लगातार खराब होने समेत कई मुद्दों को लेकर ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका ने उन देशों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने का ऐलान किया है जो उसके साथ व्यापार करते हैं। अमेरिकी फैसले से कई देश बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। भारत पहले के मुकाबले अब ईरान से बहुत कम व्यापार कर रहा है, इसलिए उस पर इस कदम का असर बहुत ज्यादा होने की संभावना नहीं है।

ईरान की अर्थव्यवस्था कभी बहुत मजबूत हुआ करती थी। 1960 और 1970 के दशक की शुरुआत में पहरं मुद्रास्फीति स्तर मध्यम स्तर पर ही थी और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दोहरे अंकों की वृद्धि हो रही थी। वर्ष 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद स्थितियां बदलती चली गई और मुद्रास्फीति लगातार 10 प्रतिशत से ऊपर रही है। वर्ष 2020 से शुरू हुई महामारी के कारण मुद्रास्फीति दर बढ़कर 40 प्रतिशत से अधिक हो गई। इसके अलावा इस देश में हाल के वर्षों में विकास दर धीमी हो गई है।

आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार प्रति व्यक्ति आय 2011 में 8025 डॉलर से लगभग आधी होकर 2025 में 4074 डॉलर रह गई है। इससे ईरान के एक उच्च मध्यम-आय से अब मध्य मध्यम-आय वाले देश में तब्दील हो सकता है। ईरान की खराब होती स्थिति का प्रमुख कारण 1979 में जिमी कार्टर शासन के बाद से लगातार अमेरिका द्वारा इस पर अलग-अलग कारणों से लगाए जाने वाले प्रतिबंध हैं।

यह भी पढ़ें | ईरान ने ट्रंप को चेताया, अमेरिकी हमले पर कड़े जवाब की धमकी

जहां तक भारत के साथ उसके व्यापारिक संबंधों की बात है तो वित्त वर्ष 25 और वित्त वर्ष 26 के अप्रैल-नवंबर तक भारत के वैश्विक निर्यात और आयात में ईरान की हिस्सेदारी बहुत कम रही है। ईरान जितना सामान भारत से मंगाता है, उसमें 60 प्रतिशत से अधिक बासमती चावल होता है। वित्त वर्ष 25 में भारत से विश्व भर में निर्यात होने वाले बासमती चावल का 13 प्रतिशत केवल ईरान में गया।

ईरान को निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में चीन और यूएई हैं। आंकड़ों के मुताबिक 2024 में ईरान के कुल आयात में इन दोनों देशों की हिस्सेदारी आधे से अधिक रही। उसी वर्ष ईरान के कुल आयात में भारत से जाने वाली वस्तुएं 4.33 प्रतिशत ही रहीं।

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First Published - January 15, 2026 | 9:45 AM IST

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