RIL Q3FY26 results preview: भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के दिसंबर तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही) के नतीजे शुक्रवार (16 जनवरी) को घोषित किए जाएंगे। खुदरा क्षेत्र में आई कमजोरी की भरपाई कुछ हद तक ऊर्जा क्षेत्र के प्रदर्शन से हो सकती है। हालांकि आरआईएल ने पिछले एक साल में बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता और खुदरा क्षेत्र में धीमी वृद्धि के कारण वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत से ही इसके शेयर कमजोर चल रहे हैं। हालांकि, ब्रोकरेज फर्मों ने फिलहाल अपने अनुमानों को बरकरार रखा है।
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के निखिल भंडारी की अगुआई में विश्लेषकों का कहना है कि डिस्क्रिशनरी खर्च में कमजोरी, आधार प्रभाव और त्योहारी सीजन की अवधि के कारण खुदरा क्षेत्र में तीसरी तिमाही में आय वृद्धि में नरमी की संभावना है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में रिफाइनिंग के मजबूत प्रदर्शन से कुछ हद तक इसकी भरपाई हो जाएगी। हमने निकट भविष्य के खुदरा वृद्धि अनुमानों में कटौती की है और रिफाइनिंग अनुमानों को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप कुल आय में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।
अधिकांश ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि आरआईएल का एकीकृत परिचालन लाभ पिछले वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में 8 से 10 फीसदी बढ़ेगा। यह वृद्धि तेल से लेकर रसायन (ओ2सी) और दूरसंचार क्षेत्रों में 15 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी के कारण होगी। हालांकि, अपस्ट्रीम कारोबार और खुदरा क्षेत्र इस बढ़त को प्रभावित कर सकते हैं। एफएमसीजी कारोबार और क्विक कॉमर्स सेगमेंट के विभाजन के कारण खुदरा क्षेत्र के राजस्व में 8 से 11 फीसदी की सालाना वृद्धि और परिचालन लाभ में 6 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है।
जेएम फाइनैंशियल रिसर्च का अनुमान है कि इस तिमाही में खुदरा सकल राजस्व में सालाना आधार पर 9 फीसदी का इजाफा होगा। ब्रोकरेज फर्म के दयानंद मित्तल की अगुआई में विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के डीमर्जर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती के बाद उत्पादों की खुदरा बिक्री कीमतों में कमी का पूरे तिमाही पर प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ-साथ त्योहारी सीजन के वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही की तुलना में वित्त वर्ष 2026 की दूसरी और तीसरी तिमाही में विभाजित होने के कारण इस सेगमेंट पर 2 फीसदी तक का असर होगा।
जीएसटी कटौती के कारण खपत में हुई बढोतरी का लाभ केवल इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट तक ही सीमित रहा जबकि किराना और फैशन एवं लाइफस्टाइल सेगमेंट में इसका सीमित लाभ मिला।
अधिकांश ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि क्विक कॉमर्स कारोबार में निवेश बढ़ने के कारण खुदरा क्षेत्र में परिचालन लाभ मार्जिन में क्रमिक आधार पर गिरावट आएगी क्योंकि क्विक कॉमर्स कारोबार में अच्छी रफ्तार देखी जा रही है।
ओ2सी सेगमेंट में रिफाइनिंग को बढ़ावा मिला है जबकि पेट्रोकेमिकल सेगमेंट कमजोर बना हुआ है। जेपी मॉर्गन रिसर्च के संजय मुकीम और आतिशी राठी बताते हैं कि तिमाही के दौरान डीजल क्रैक में हुई तीव्र वृद्धि से तिमाही आधार पर औसत रिफाइनिंग मार्जिन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रुपये की कमजोरी भी इस सेगमेंट की आय बढ़ाने में सहायक होगी।
हालांकि, रिफाइनिंग में होने वाली इस तेजी पर पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की कमजोर कमाई का असर पड़ने की संभावना है क्योंकि एथेन क्रैकिंग मार्जिन और पीवीसी में गिरावट आई है, जिसके चलते रिलायंस के शुद्ध ओ2सी परिचालन लाभ में क्रमिक आधार पर केवल मामूली वृद्धि ही देखने को मिल सकती है।
तीसरी तिमाही के नतीजों में जियो (दूरसंचार क्षेत्र) एक और सकारात्मक पहलू है। ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि ग्राहकों की संख्या में वृद्धि और प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) में मामूली उछाल के कारण जियो के राजस्व में तिमाही आधार पर 3 फीसदी की वृद्धि होगी। परिचालन लाभ मार्जिन में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है।
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च को वित्त वर्ष 2026-30 के दौरान 18 फीसदी की सालाना वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें कनेक्टिविटी और गैर-कनेक्टिविटी दोनों कारोबारों में लगभग समान वृद्धि होगी। जियो के वायरलेस ग्राहकों की संख्या अब भारती की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा है, जबकि घरेलू ग्राहकों की संख्या भारती की तुलना में लगभग दोगुनी है।