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क्विक कॉमर्स की रफ्तार पर सवाल: डिलिवरी कितनी तेज होनी चाहिए?

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अगर हम खाने की डिलिवरी, क्विक कॉमर्स और ऐप पर चलने वाली टैक्सी और बाइक चलाने वालों सहित पूरे अंशकालिक कामगारों की दुनिया की बात करें, तो यह संख्या 2 करोड़ के आसपास होगी

Last Updated- January 18, 2026 | 9:57 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नए साल के संकल्प अक्सर उतने ही कम समय तक टिकते हैं जितना किसी कंपनी के मुख्य कार्या​धिकारी द्वारा अपने कर्मचारियों को दिया गया नए साल का भाषण। इस तरह की प्रेरणादायक गतिविधियां चाहे कितनी भी लंबी चलें, उनमें से कुछ ही अपनी प्रासंगिकता के कारण ध्यान खींचती हैं।

ऐसा ही एक नए साल का संकल्प एक पत्रकार सहयोगी का था, जो क्विक कॉमर्स क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर नजर रखते रहे हैं। उन्होंने खासतौर पर इस बात पर गौर किया कि कैसे अंशकालिक कामगारों (गिग वर्कर ज्यादातर डिलिवरी पार्टनर) ने कम वेतन-पारिश्रमिक के विरोध में हड़ताल कर दी। वे 10 मिनट में डिलिवरी वाले मॉडल को खत्म करने के साथ ही सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे थे।

उक्त पत्रकार ने नए साल के पहले दिन कहा कि वह अब से तुरंत सामान पहुंचाने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियों से कुछ नहीं मंगवाएंगे। यह संकल्प सुनकर बाकी सहयोगी इस बात पर बहस करने लगे कि डिलिवरी करने वालों की हड़ताल सही है या गलत। 

क्विक कॉमर्स यानी तुरंत सामान पहुंचाने वाली कंपनियों और इस क्षेत्र में काम करने के तरीकों पर बहस तब और बढ़ गई जब गिग वर्कर के संगठन ने  हाल में मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए। उन्होंने कुछ बड़ी कंपनियों पर ‘गलत तरीके’अपनाने के आरोप लगाए। लेकिन इस हड़ताल पर इतनी प्रतिक्रिया क्यों हुई जबकि नए साल की पूर्व संध्या जैसे व्यस्त दिनों में इन क्विक कॉमर्स ऑनलाइन मंच से ऑर्डर किए गए सामान की डिलिवरी उतनी बुरी तरह प्रभावित नहीं हुई जितनी आशंका थी? शायद आंकड़े बताते हैं कि अंशकालिक काम अब हमारे जीवन का जरूरी हिस्सा क्यों है।

इटर्नल (जोमैटो) के नए साल की पूर्व संध्या के आंकड़ों पर गौर करते हैं। जोमैटो और ब्लिंकइट (इसकी क्विक कॉमर्स इकाई) दोनों ने मिलकर 31 दिसंबर को 65 लाख से ज्यादा ग्राहकों को 75 लाख से ज्यादा ऑर्डर पहुंचाए, वह भी सिर्फ एक दिन में। ये ऑर्डर 4,50,000 से ज्यादा डिलिवरी पार्टनर ने पहुंचाए थे।

अगर हम खाने की डिलिवरी, क्विक कॉमर्स और ऐप पर चलने वाली टैक्सी और बाइक चलाने वालों सहित पूरे अंशकालिक कामगारों की दुनिया की बात करें, तो यह संख्या 2 करोड़ के आसपास होगी। यह संख्या देश के शीर्ष 10 कंपनियों के कर्मचारियों की कुल संख्या से कहीं ज्यादा है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, यह संख्या 2030 तक 9 करोड़ तक पहुंच सकती है। जहां तक वृद्धि की बात है, तो उस लिहाज से कंपनियां और उद्योग संगठन क्विक कॉमर्स को ‘तेजी से’ बढ़ने वाला बता रहे हैं। वर्ष 2024 तक इसकी वैल्यू 7 अरब डॉलर तक आंकी गई है और अगले तीन से चार साल में क्विक कॉमर्स की सालाना वृद्धि दर 40 से 70 फीसदी रहने का अनुमान है।

ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं, लेकिन इनसे आगे की बात समझने में मदद मिलती है। इस क्षेत्र में आगे रहने वाली कंपनियां और इसे बढ़ावा देने वाले समूह अंशकालिक काम और कामगारों की दुनिया में नौकरी के अवसरों की बात कर रहे हैं, लेकिन इस तंत्र में जो कमियां हैं उन्हें दूर करना जरूरी है ताकि ये कई सेवाओं को प्रभावी ढंग से चला सकें और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को बढ़ा सकें।

यूट्यूबर राज शमानी के साथ हाल ही में हुए एक पॉडकास्ट में इटर्नल के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने स्वीकार किया कि जोमैटो हर महीने लगभग 5,000 अंशकालिक कामगारों को धोखाधड़ी के मामलों में शामिल होने की वजह से निकाल देता है जबकि लगभग 1,50,000 से 2,00,000 कामगार अपनी मर्जी से प्लेटफॉर्म छोड़ देते हैं क्योंकि वे अपनी नौकरियों को ‘अस्थायी’ मानते हैं।

गिग कारोबार की अस्थायी प्रकृति में नियमित तौर पर इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों का बदलना शायद इस तंत्र की एक बड़ी कमजोरी की ओर इशारा करता है, जिसे गिग प्लेटफॉर्म के आलोचकों और राजनीतिक दलों ने भी उजागर किया है। इसका मतलब कम वेतन-पारिश्रमिक, काम करने की असंतोषजनक स्थिति या सामाजिक सुरक्षा की कमी कुछ भी हो सकता है। यह और बात है कि 4.5 घंटे के पॉडकास्ट, जिसमें गोयल ने अपने प्लेटफॉर्म जोमैटो और ब्लिंकइट के साथ-साथ प्रतिस्पर्द्धी मंच स्विगी पर भी खुलकर बात की थी, उसको कुछ हफ्ते पहले रिकॉर्ड किया गया था और गिग वर्कर की हड़ताल के तुरंत बाद प्रसारित किया गया। 

गिग अर्थव्यवस्था पर बहस जारी है और हड़ताल का दौर बीत जाने के बाद भी यह सोचने का सही समय हो सकता है कि ऑनलाइन गिग और ऐप-आधारित कारोबार को बेहतर तरीके से कैसे चलाया जाए। लाखों लोगों को रोजगार देने वाले इस तंत्र को खत्म करना किसी के हित में नहीं है। क्विक-कॉमर्स के मामले में, वैश्विक मॉडलों को देखना एक नया नजरिया दे सकता है। अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और जापान जैसे प्रमुख बाजारों में कुछ बातें स्पष्ट रूप से उभर कर आती हैं।

उदाहरण के तौर पर, कई बाजारों में ऑनलाइन कारोबारों का नियामकीय ढांचा, उत्पाद और सेवाओं की गुणवत्ता का एक निश्चित स्तर सुनिश्चित करता है। साथ ही, क्विक-कॉमर्स का मतलब केवल 10 मिनट की डिलिवरी नहीं है बल्कि आमतौर पर यह 10 से 30 मिनट का समय होता है, जो कभी-कभी कुछ घंटों तक भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, कई बाजारों में कम समय में डिलिवरी के लिए एक भारी कीमत चुकानी पड़ती है। चीन में, जहां क्विक-कॉमर्स को ‘इंस्टेंट रिटेल’कहा जाता है, वहां प्रोत्साहन और मुफ्त उपहारों का बोलबाला है, जिससे स्थिरता से जुड़ी समस्या पैदा होती है।

अंशकालिक कामगारों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना, रिहायशी इलाकों के पास ‘डार्क स्टोर’स्थापित करने की लागत उठाना और एक मुनाफे वाला कारोबार चलाना, वास्तव में इन सब बातों ने दुनिया भर की कई कंपनियों के लिए क्विक-कॉमर्स को एक मुश्किल संतुलन बनाने वाला काम बना दिया है। 

भारत में, हम क्विक-कॉमर्स की समय-सीमा में थोड़ी ढील दे सकते हैं। सामान की डिलिवरी के लिए 10 मिनट की सख्त पाबंदी जान जोखिम में डालती है, भले ही सामान के भंडार वाले स्टोर से किसी अपार्टमेंट की दूरी महज कुछ सौ मीटर ही क्यों न हो। ​कामगारों के लिए पर्याप्त मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा जिसका कंपनियां पहले से ही दावा करती हैं, यह सब बातें नियामकीय निगरानी के साथ ऐप तंत्र का एक अहम हिस्सा होना चाहिए। 

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First Published - January 18, 2026 | 9:57 PM IST

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