राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा बुधवार को जारी पहले अग्रिम अनुमानों के मुताबिक नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर बजट अनुमान की तुलना में घटकर 8 प्रतिशत रहने के बावजूद सरकार 4.4 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर सकती है।
बजट में इस साल नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 10.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। बहरहाल वित्त वर्ष 2024-25 के लिए संशोधित नॉमिनल जीडीपी बढ़कर 330.7 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो बजट में 324.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। इससे वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि घटकर 8 प्रतिशत रह गई है। पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के लिए नॉमिनल जीडीपी 357.14 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि बजट में 356.98 लाख करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था। बजट में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत यानी 15.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था।
इक्रा लिमिटेड में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा, ‘इसकी वजह से जीडीपी और राजकोषीय घाटे का अनुपात चूकने की संभावना नहीं है। इक्रा को राजकोषीय चूक जीडीपी के 4.4 प्रतिशत से अधिक होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि गैर कर राजस्व बजट अनुमान से ज्यादा आया है और व्यय में बचत से भी कर चूक की भरपाई होने की संभावना है।’
महानियंत्रक के मुताबिक इस वित्त वर्ष के शुरुआती 8 महीनों में राजकोषीय घाटा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि कुल राजकोषीय घाटे का लक्ष्य इस साल 2.75 प्रतिशत कम यानी 15.7 लाख करोड़ रुपये है।
बजट अनुमानों के हिसाब से वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-नवंबर में सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़कर 9.77 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 62.3 प्रतिशत हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025 की इसी अवधि में यह बजट अनुमान का 52.5 प्रतिशत था।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, ‘हालांकि, कम नॉमिनल जीडीपी वृद्धि का असर भारत सरकार के कुल कर राजस्व पर पड़ेगा।’