facebookmetapixel
Budget 2026: MSME सेक्टर और छोटे कारोबारी इस साल के बजट से क्या उम्मीदें लगाए बैठे हैं?PhonePe IPO को मिली SEBI की मंजूरी, कंपनी जल्द दाखिल करेगी अपडेटेड DRHPBudget 2026: क्या इस साल के बजट में निर्मला सीतारमण ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म कर देगी?Toyota ने लॉन्च की Urban Cruiser EV, चेक करें कीमत, फीचर्स, डिजाइन, बैटरी, बुकिंग डेट और अन्य डिटेलसोना-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, गोल्ड पहली बार ₹1.5 लाख के पार, चांदी ₹3.30 लाख के करीबPSU Bank Stock: लंबी रेस का घोड़ा है ये सरकारी शेयर, ब्रोकरेज ने ₹150 तक के दिये टारगेटबैंकिंग सेक्टर में बदल रही हवा, मोतीलाल ओसवाल की लिस्ट में ICICI, HDFC और SBI क्यों आगे?Suzlon Energy: Wind 2.0 से ग्रोथ को लगेंगे पंख! मोतीलाल ओसवाल ने कहा- रिस्क रिवार्ड रेश्यो बेहतर; 55% रिटर्न का मौका₹12.80 से 21% फिसला वोडाफोन आइडिया का शेयर, खरीदें, होल्ड करें या बेचें?Q3 नतीजों के बाद Tata Capital पर मेहरबान ब्रोकरेज, टारगेट बढ़ाया, शेयर नई ऊंचाई पर

जीवन बीमा क्षेत्र में कमीशन की सीमा तय करने की हो सकती है सिफारिश

ऊंचे कमीशन से बढ़ी अधिग्रहण लागत पर काबू के लिए IRDAI को सुझाव देने की तैयारी

Last Updated- January 08, 2026 | 8:58 AM IST
Kotak Life Insurance

जीवन बीमा क्षेत्र में कमीशन के ढांचे पर विचार करने के लिए बनी जीवन बीमा परिषद की समिति वितरकों को कमीशन की सीमा तय करने या क्षेत्र में अधिग्रहण लागत को कम करने के लिए कमीशन टालने की सिफारिश कर सकती है। हाल ही में डिस्ट्रीब्यूटर को ज्यादा भुगतान के कारण अधिग्रहण की लागत ज्यादा हो जाने की जांच हो रही है।

जीवन बीमा कंपनियों को इस समय प्रबंधन व्यय (ईओएम) निशानिर्देशों के मुताबिक कुल मिलाकर ईओएम की सीमा में काम करना होता है और उन्हें पॉलिसी के हिसाब से कमीशन की सीमा तय नहीं करनी होती है। प्रीमियम के प्रतिशत में सीमा तय की गई है, जो पहले साल के प्रीमियम और नवीकरण प्रीमियम के मुताबिक होती है।

इसकी वजह से जीवन बीमा कंपनियां पॉलिसी के मुताबिक कमीशन तय करने को स्वतंत्र हैं और उन्हें कुल मिलाकर ईओएम की सीमा में काम करना होता है।

हाल के महीनों में बढ़े कमीशन ढांचे के कारण अधिग्रहण की लागत बढ़ी है और इस क्षेत्र को जांच का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ता है और उन्हें ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है।

उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा गठित समिति ने आईआरडीएआई को किस्तों में कमीशन शुरू करने का सुझाव दिया है, जहां कमीशन का भुगतान, प्रीमियम के भुगतान के मुताबिक होगा या कमीशन पर एक सीमा लगाई जाएगी, ताकि बीमाकर्ताओं के लिए अधिग्रहण की लागत कम हो जाए। हमें उम्मीद है कि अप्रैल तक इस पर कुछ नियम आ जाएंगे।’

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा गया था कि अधिक अधिग्रहण लागत बने रहने की वजह से खर्त का दबाव होता है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘वितरण की उच्च लागत वाली रणनीतियों के कारण प्रीमियम में वृद्धि हो रही है।’ रिजर्व बैंक ने कहा कि जीवन बीमा क्षेत्र में ग्राहक बनाने की उच्च लागत की वजह से पॉलिसीधारकों के लाभ सीमित किए हैं।

First Published - January 8, 2026 | 8:58 AM IST

संबंधित पोस्ट