जीवन बीमा क्षेत्र में कमीशन के ढांचे पर विचार करने के लिए बनी जीवन बीमा परिषद की समिति वितरकों को कमीशन की सीमा तय करने या क्षेत्र में अधिग्रहण लागत को कम करने के लिए कमीशन टालने की सिफारिश कर सकती है। हाल ही में डिस्ट्रीब्यूटर को ज्यादा भुगतान के कारण अधिग्रहण की लागत ज्यादा हो जाने की जांच हो रही है।
जीवन बीमा कंपनियों को इस समय प्रबंधन व्यय (ईओएम) निशानिर्देशों के मुताबिक कुल मिलाकर ईओएम की सीमा में काम करना होता है और उन्हें पॉलिसी के हिसाब से कमीशन की सीमा तय नहीं करनी होती है। प्रीमियम के प्रतिशत में सीमा तय की गई है, जो पहले साल के प्रीमियम और नवीकरण प्रीमियम के मुताबिक होती है।
इसकी वजह से जीवन बीमा कंपनियां पॉलिसी के मुताबिक कमीशन तय करने को स्वतंत्र हैं और उन्हें कुल मिलाकर ईओएम की सीमा में काम करना होता है।
हाल के महीनों में बढ़े कमीशन ढांचे के कारण अधिग्रहण की लागत बढ़ी है और इस क्षेत्र को जांच का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ता है और उन्हें ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है।
उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा गठित समिति ने आईआरडीएआई को किस्तों में कमीशन शुरू करने का सुझाव दिया है, जहां कमीशन का भुगतान, प्रीमियम के भुगतान के मुताबिक होगा या कमीशन पर एक सीमा लगाई जाएगी, ताकि बीमाकर्ताओं के लिए अधिग्रहण की लागत कम हो जाए। हमें उम्मीद है कि अप्रैल तक इस पर कुछ नियम आ जाएंगे।’
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा गया था कि अधिक अधिग्रहण लागत बने रहने की वजह से खर्त का दबाव होता है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘वितरण की उच्च लागत वाली रणनीतियों के कारण प्रीमियम में वृद्धि हो रही है।’ रिजर्व बैंक ने कहा कि जीवन बीमा क्षेत्र में ग्राहक बनाने की उच्च लागत की वजह से पॉलिसीधारकों के लाभ सीमित किए हैं।