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Suzlon Energy: Wind 2.0 से ग्रोथ को लगेंगे पंख! मोतीलाल ओसवाल ने कहा- रिस्क रिवार्ड रेश्यो बेहतर; 55% रिटर्न का मौका

Suzlon Energy Price: ब्रोकरेज ने कहा है कि शेयर कीमत में ज्यादातर चिंताएं पहले ही शामिल हो चुकी हैं। इस स्तर पर रिस्क के मुकाबले संभावित रिवार्ड बेहतर नजर आता है।

Last Updated- January 20, 2026 | 2:56 PM IST
Suzlon Energy share price

Suzlon Energy Share Price: रिन्यूएबल सेक्टर की दिग्गज कंपनी सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड (Suzlon Energy) के शेयर मंगलवार (20 जनवरी) को बीएसई पर 2 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गए और अपने 52 वीक लो लेवल पर आ गए। ताजा गिरावट के साथ सुजलॉन के शेयर अपने हाई से 35 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुके हैं। शेयर में जारी गिरावट के बीच ब्रोकरेज हॉउस मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक पर बुलिश आउटलुक दिया है। ब्रोकरेज ने कहा है कि शेयर कीमत में ज्यादातर चिंताएं पहले ही शामिल हो चुकी हैं। इस स्तर पर रिस्क के मुकाबले संभावित रिवार्ड बेहतर नजर आता है।

Suzlon Energy Share पर मोतीलाल ओसवाल टारगेट प्राइस: ₹74

मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी ‘BUY‘ रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर 74 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इस तरह, शेयर 55 प्रतिशत का रिटर्न दे सकते हैं। सुजलॉन एनर्जी के शेयर सोमवार को 48 रुपये पर बंद हुए।

ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि हाल के दिनों में सुजलॉन एनर्जी के शेयर दबाव में रहे हैं। इसकी वजह यह चिंता रही है कि टेंडर में सोलर सेक्टर के कारण विंड एनर्जी को नुकसान हो सकता है, विंड एनर्जी प्लांट लगाने की रफ्तार धीमी है और इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, डाटा सेंटर, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कंजम्प्शन तथा सरकारी कंपनियां मिलकर वर्ष 2030 तक विंड एनर्जी की मांग में अतिरिक्त 20 से 24 गीगावाट की बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह भारत के वित्त वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट विंड एनर्जी कैपेसिटी के लक्ष्य से अलग होगी।

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सुजलॉन एनर्जी की स्ट्रेटेजी अपने ऑर्डर बुक में परियोजना निर्माण और एग्जीक्यूशन (ईपीसी) का हिस्सा 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की है। इससे कंपनी को प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले मजबूत बढ़त मिलती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि घरेलू कंपनियों की तुलना में सुजलॉन का काम पूरा करने का रिकॉर्ड बेहतर रहा है और परियोजना निर्माण के क्षेत्र में चीनी कंपनियों की भागीदारी सीमित है। इससे सुजलॉन को बड़े और जटिल प्रोजेक्ट हासिल करने में फायदा मिलेगा। जिन 40 गीगावाट परियोजनाओं के बिजली खरीद समझौते अभी लंबित हैं, उनमें से करीब 17 गीगावाट सिर्फ सोलर से जुड़े हैं। जबकि विंड एनर्जी की हिस्सेदारी बहुत कम है। कंपनी का प्रबंधन निर्यात को भी भविष्य का एक नया ग्रोथ इंजन मानता है। वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में निर्यात से जुड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है और वित्त वर्ष 2028 से सप्लाई शुरू हो सकती है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, मौजूदा शेयर कीमत में सुजलॉन एनर्जी से जुड़ी ज्यादातर चिंताएं पहले ही शामिल हो चुकी हैं और इस स्तर पर जोखिम के मुकाबले संभावित फायदा बेहतर नजर आता है।

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Suzlon 2.0 की नयी तैयारी

सुजलॉन अब अपने अगले विकास चरण के लिए तैयार है। कंपनी Wind 2.0 के जरिए अपने कोर विंड एनर्जी बिजनेस को नए सिरे से मजबूत कर रही है, जबकि Suzlon 2.0 के तहत पवन ऊर्जा से जुड़े और उससे आगे के क्षेत्रों में विस्तार की योजना बना रही है।

सुजलॉन एनर्जी के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती ने कहा ने कहा कि Wind 2.0 के तहत प्रोडक्ट डेवलपमेंट को अलग डिवीजन के रूप में विकसित किया जा रहा है, साथ ही EPC और सर्विस बिजनेस को भी मजबूत किया जा रहा है। इसमें डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ग्राहकों को बेहतर वैल्यू और कार्यस्थल पर सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सुजलॉन दुनिया की उन गिनी-चुनी पांच कंपनियों में शामिल है, जो अब भी वैश्विक विंड एनर्जी कारोबार में सक्रिय हैं। इनमें अमेरिका की GE और यूरोप की Siemens, Vestas और Nordex शामिल हैं। सुजलॉन इन कंपनियों में ग्लोबल साउथ से आने वाली इकलौती कंपनी है।

 

(डिस्क्लमेर: यहां शेयर में खरीदारी की सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जो​खिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

First Published - January 20, 2026 | 2:49 PM IST

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