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Tata Steel पर नीदरलैंड्स में $1.4 अरब का मुकदमा दायर, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का आरोप

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आरोप है कि कंपनी की फैक्टरी से निकलने वाली जहरीली गैसों ने आसपास के इलाके में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया और लोगों की सेहत को खतरे में डाला

Last Updated- December 26, 2025 | 3:20 PM IST
TATA Steel
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नीदरलैंड्स में एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) ने टाटा स्टील की स्थानीय इकाइयों से करीब 1.4 अरब यूरो यानी लगभग 1.6 अरब डॉलर की मुआवजे की मांग की है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि कंपनी की फैक्टरी से निकलने वाली जहरीली गैसों ने आसपास के इलाके में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया और लोगों की सेहत को खतरे में डाला।

स्टिच्टिंग फ्रिसे विंड.एनयू नाम के संगठन ने वेलसेन-नूर्ड गांव के पास चल रही टाटा स्टील की फैक्टरी के खिलाफ यह दावा किया है। उनका कहना है कि इन उत्सर्जनों की वजह से रहने वाले लोगों को बीमारियों का ज्यादा खतरा हो गया है और उनके घरों की कीमत भी गिर गई है। संगठन ने हार्लेम की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट नॉर्थ हॉलैंड में मुकदमे की कागजी कार्रवाई जमा कर दी है। टाटा स्टील ने शुक्रवार को अपने बयान में इसकी पुष्टि की है।

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कंपनी पर बढ़ता जा रहा दबाव

यह मुकदमा टाटा स्टील की यूरोपीय इकाइयों पर पर्यावरण के मामले में बढ़ते दबाव का हिस्सा है। 2024 में नीदरलैंड्स के नियामकों ने कंपनी पर सख्ती की और करीब 27 मिलियन यूरो के जुर्माने की धमकी दी। साथ ही चेतावनी दी कि अगर आईजमुइडेन बंदरगाह शहर में कोक प्लांट से जहरीली गैसें कम नहीं हुईं तो उसे बंद कर दिया जाएगा।

इससे पहले 2022 में डच अभियोजकों ने जांच शुरू की थी कि क्या कंपनी और उसके एक पार्टनर ने जानबूझकर मिट्टी, हवा और पानी को खतरनाक पदार्थों से दूषित किया।

टाटा स्टील का कहना है कि वह दस्तावेजों की जांच कर रही है और उनके पास अपने बचाव के लिए मजबूत तर्क है। यह केस सामूहिक मुकदमे के नियमों के तहत चलेगा, जिसमें दो चरण होंगे और हर चरण में दो से तीन साल लग सकते हैं।

इससे पहले सितंबर में कंपनी ने नीदरलैंड्स में उत्सर्जन कम करने के लिए 6.5 अरब यूरो तक की लागत वाली योजना का ऐलान किया था, जिसमें डच सरकार 2 अरब यूरो तक का योगदान देगी।

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First Published - December 26, 2025 | 2:51 PM IST

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