वित्त वर्ष 2025 के दौरान देश के कुल 183 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पर खर्च 31.1 प्रतिशत बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए सार्वजनिक उद्यमों के सर्वे के मुताबिक सीपीएसई ने सीएसआर पर रिकॉर्ड 6,437 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
सीएसआर पर खर्च करने वाली शीर्ष सीपीएसई में तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड ने 929.08 करोड़ रुपये, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 583.04 करोड़ रुपये, एनटीपीसी लिमिडेट ने 362.94 करोड़ रुपये, पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने 360.19 करोड़ रुपये और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 358.14 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
वित्त वर्ष 2025 में सीएसआर पर किए गए कुल खर्च में शीर्ष 10 सीपीएसई का योगदान 59.48 प्रतिशत रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में 56.72 प्रतिशत था।
सरकार ने 1 अप्रैल 2014 से कम से कम 500 करोड़ रुपये नेटवर्थ, न्यूनतम 1,000 करोड़ रुपये टर्नओवर या 5 करोड़ रुपये न्यूनतम शुद्ध मुनाफा कमाने वाली सीपीएसई सहित सभी कंपनियों के अपने 3 साल के औसत शुद्ध मुनाफे का 2 प्रतिशत सीएसआर पर खर्च करना अनिवार्य कर दिया था।
सीएसआर के तहत तमाम काम आते हैं। अगर काम के आधार पर देखें तो सीएसआर का सबसे अधिक पैसा भुखमरी और गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता पर खर्च किया गया है। इन मदों में किया गया खर्च कुल सीएसआर आवंटन का 47.8 प्रतिशत है। इसके बाद शिक्षा और कौशल विकास पर 25 प्रतिशत खर्च किया गया है। वहीं महिला सशक्तीकरण व आर्थिक रूप से पिछले वर्ग पर कुल खर्च का 2.48 प्रतिशत खर्च किया गया है। वहीं पर्यावरण सततता पर 4.25 प्रतिशत खर्च किया गया है। वित्त वर्ष 2025 के दौरान परिचालन वाली सीपीएसई का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की तुलना में 9.6 प्रतिशत कम हुआ है। यह गिरकर 2.91 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो वित्त वर्ष 2024 में 3.22 लाख करोड़ रुपये था।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ‘विनिर्माण, प्रसंस्करण और उत्पादन’सेक्टर में काम करने वाली सीपीएसई का कुल मिलाकर शुद्ध मुनाफा 33.9 प्रतिशत कम हुआ है, जबकि खनन व अन्वेषण क्षेत्र का शुद्ध मुनाफा 3.6 प्रतिशत कम हुआ है। बहरहाल वित्त वर्ष 2025 के दौरान कृषि व सेवा क्षेत्र के सार्वजनिक उद्यमों का शुद्ध मुनाफा क्रमशः 18 प्रतिशत और 26.1 प्रतिशत बढ़ा है।
सीपीएसई में कुल कर्मचारियों की संख्या वित्त वर्ष 2025 के दौरान 1.6 प्रतिशत बढ़कर 15.4 लाख हो गई, जबकि इस दौरान नियमित कर्मचारियों की संख्या 3.7 प्रतिशत कम हुई है और ठेके के कर्मचारियों की संख्या 7.7 प्रतिशत बढ़ी है।
सर्वे से यह भी पता चलता है कि सीपीएसई में महिला कर्मचारियों की संख्या वित्त वर्ष 2025 में 1.2 प्रतिशत कम होकर 76,685 रह गई है, जो कुल कर्मचारियों की संख्या का 9.8 प्रतिशत है।
इसमें यह भी कहा गया है कि कुल महिलाओं में 32.2 प्रतिशत इस समय प्रबंधन/एग्जिक्यूटिव के स्तर पर काम रही हैं, जबकि 8.7 प्रतिशत सुपरवाइजर के स्तर पर और 58.9 प्रतिशत कामगार की श्रेणी में हैं।