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स्मॉलकैप फंडों ने माइक्रोकैप शेयरों से बनाई दूरी, निवेश 2 फीसदी पर सिमटा; वेंचुरा की स्टडी में खुलासा

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वेंचुरा के विश्लेषण से पता चलता है कि स्मॉलकैप फंड पोर्टफोलियो का करीब 83 फीसदी हिस्सा 750 अग्रणी सूचीबद्ध शेयरों में लगा हुआ है

Last Updated- January 18, 2026 | 10:37 PM IST
top mutual funds
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देसी ब्रोकरेज फर्म वेंचुरा के एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत में स्मॉलकैप म्युचुअल फंड (एमएफ) का माइक्रोकैप शेयरों में निवेश सीमित बना हुआ है। बाजार पूंजीकरण (एमकैप) के आधार पर शीर्ष 1,000 कंपनियों से नीचे वाले शेयरों में निवेश करीब 2 फीसदी तक सीमित है।

स्मॉलकैप फंड श्रेणी में आने वाली 32 योजनाओं की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) करीब 3.7 ट्रिलियन रुपये है। वेंचुरा के विश्लेषण से पता चलता है कि स्मॉलकैप फंड पोर्टफोलियो का करीब 83 फीसदी हिस्सा 750 अग्रणी सूचीबद्ध शेयरों में लगा हुआ है।

मुख्य स्मॉलकैप सेगमेंट (251 से 750 रैंक के बीच के शेयर) में कुल पोर्टफोलियो आवंटन का करीब 63 फीसदी हिस्सा है जबकि 751 से 1000 रैंक के शेयरों में इनका आवंटन करीब 7 फीसदी है। इसके अलावा पोर्टफोलियो का करीब 20 फीसदी हिस्सा लार्ज और मिडकैप शेयरों में आवंटित है।

करीब 6 फीसदी राशि नकदी और ऋण साधनों में तरलता प्रबंधन के लिए रखी गई है। दकियानूस पोर्टफोलियो के बावजूद पिछले पांच वर्षों में स्मॉलकैप कंपनियों का दायरा काफी बढ़ गया है। निचले मार्केट कैप वर्ग की कंपनियों ने औसत मार्केट कैप में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की है।

जून 2020 और जून 2025 के बीच मार्केट कैप के आधार पर 251वें स्थान पर रहे शेयरों के मूल्यांकन में करीब 4.4 गुना वृद्धि देखी गई जबकि 500वें और 750वें स्थान पर रहे शेयर क्रमशः 6.1 गुना और 7.3 गुना बढ़े। 

पूर्ण रूप से देखा जाए तो 251वें स्थान पर मौजूद शेयर का बाजार पूंजीकरण जून 2020 के करीब 6,936 करोड़ रुपये से बढ़कर जून 2025 में करीब 30,627 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी अवधि में 500वें स्थान पर मौजूद शेयर का बाजार पूंजीकरण करीब 1,695 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 10,299 करोड़ रुपये हो गया, जबकि 750वें स्थान पर मौजूद शेयर का बाजार पूंजीकरण करीब 666 करोड़ रुपये से बढ़ते हुए लगभग 4,873 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। 

अध्ययन से पता चलता है कि स्मॉलकैप फंड कई विशिष्ट क्षेत्रों तक पहुंच प्रदान करते हैं, जो लार्ज और मिडकैप फंडों में काफी हद तक है ही नहीं। एब्रेसिव, बिजनेस सर्विसेज और मीडिया एवं मनोरंजन जैसे सेक्टरों का मुख्य रूप से स्मॉलकैप कंपनियां ही प्रतिनिधित्व करती हैं। 

वेंचुरा के निदेशक जुजेर गाबजीवाला ने कहा, एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के वर्गीकरण के अनुसार फंड मैनेजरों के लिए कई ऐसे शेयर, जिन्हें लार्ज या मिडकैप माना जाता है, वास्तव में स्मॉलकैप शेयर होते हैं। उदाहरणों में सीडीएसएल, जिलेट, एनबीसीसी, पीएनबी हाउसिंग, वॉकहार्ट, ईस्ट इंडिया होटल्स, ऐंजल वन और टाटा केमिकल्स शामिल हैं। 

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First Published - January 18, 2026 | 10:37 PM IST

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