उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही के दौरान उद्योग जगत का कारोबारी भरोसा बढ़कर 5 तिमाही के उच्च स्तर पर पहुंच गया। स्थिर घरेलू मांग व आगे चलकर सुधार की उम्मीदों के कारण उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है।
सीआईआई का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (बीसीआई) दिसंबर तिमाही में बढ़कर 66.5 पर पहुंच गया, जो इसके पहले की सितंबर तिमाही में 66 पर था। सर्वे में कहा गया है, ‘यह पिछली 5 तिमाहियों में उच्चतम वृद्धि है। इससे कारोबारी धारणा में टिकाऊ सुधार का पता चलता है। क्रमिक आधार पर विश्वास में वृद्धि से मांग की स्थिति में सुधार, नीतिगत स्पष्टता और निवेश और क्षमता विस्तार योजनाओं को लेकर उम्मीदों के संकेत मिलते हैं।’
वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में दो तिहाई फर्मों ने मांग बढ़ने की बात कही है, जबकि 72 प्रतिशत को वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में और वृद्धि होने की उम्मीद है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कमी और त्योहारी खपत के कारण सर्वे में भाग लेने वालों ने वृद्धि का भरोसा जताया है। प्रतिक्रिया देने वाले 43 प्रतिशत लोगों ने उम्मीद जताई कि जीएसटी दर में कटौती से 6 से 12 महीनों के दौरान खपत बढ़ेगी, जबकि 30 प्रतिशत का मानना है कि यह बढ़ावा 12 महीनों तक चलेगा।
सीआईआई के डारेक्टर जनरल चंद्रजित बनर्जी ने कहा, ‘कारोबारी विश्वास में तेज बढ़ोतरी से पता चलता है कि उद्योग बाहरी व्यवधानों की नकारात्मकता से निपटने में सक्षम हैं, जिसे बेहतरीन घरेलू मांग और सुधार के एजेंडे से समर्थन मिला है।’
सर्वे के अधिकांश उत्तरदाताओं (69 प्रतिशत) को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक फरवरी में अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में दरों में कटौती करेगा। उनमें से आधे से अधिक को उम्मीद है कि महंगाई दर में लगातार गिरावट की वजह से दर में कटौती 25 आधार अंकों से अधिक होगी। इस बीच 21.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक दर को वर्तमान स्तर पर बनाए रखेगा।
आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में सीआईआई ने 150 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ राष्ट्रीय इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) 2.0 लॉन्च करने का आह्वान किया है, जिसमें राजस्व उत्पादक परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे को गति देने और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सुचारु विवाद-समाधान तंत्र पर ध्यान केंद्रित किया गया है।