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अब एक ही मासिक स्टेटमेंट में दिखेगा फाइनेंस का पूरा हिसाब-किताब, SEBI-RBI करने जा रही बड़ी पहल

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वित्तीय नियामकों के बीच समन्वय से निवेश, बचत और ऋण को एक मासिक समेकित वित्तीय विवरण में दिखाने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है

Last Updated- January 18, 2026 | 10:45 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा  यानी बीएफएसआई उपभोक्ता जल्द ही अपनी बचत और निवेश का एक ही मासिक विवरण (स्टेटमेंट) में अवलोकन कर सकेंगे। अभी ग्राहक महीने के अंत में जारी अलग-अलग विवरण से अपनी बचत और निवेश की समीक्षा करते हैं। लेकिन वित्तीय नियामकों के बीच इसे एक साथ जोड़ने के प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।

वर्तमान में म्युचुअल फंड और शेयर बाजार के निवेशकों को हर महीने एक समेकित खाता विवरण (अकाउंट स्टेटमेंट) मिलता है जिसमें म्युचुअल फंड योजनाओं और डीमैट प्रारूप में रखी गई प्रतिभूतियों में उनके लेनदेन का ब्योरा स्थायी खाता संख्या (पैन) के अंतर्गत एक ही जगह दिया जाता है। पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के नियमन में आने वाली राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में रखी गई सेवानिवृत्ति बचत को भी इस समेकित खाता विवरण में एकीकृत किया गया है।

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के साथ समेकित खाता विवरण का विस्तार करने  के लिए बातचीत शुरू की है। इससे अन्य निवेश और लघु बचत योजनाओं, बॉन्ड और भविष्य निधि बचत आदि की मौजूदा स्थिति को दर्शाया जा सकेगा। 

घटनाक्रम की जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘बाद में इसे ग्राहकों को उनकी परिसंप​त्तियों के साथ-साथ देनदारियों की मासिक व्य​क्तिगत वित्तीय बैलेंस शीट बनाने में मदद करने के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। यह ठीक उस तरह काम करेगी जैसा कि सूचीबद्ध कंपनियां हर तिमाही अपने वित्तीय विवरण जारी करती हैं।’ उन्होंने संकेत दिया कि अलग-अलग विनियमित इकाइयों के बकाया ऋण के आंकड़े भी विवरण में शामिल किए जा सकते हैं। 

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम इसे लागू करने के लिए अन्य नियामकों के साथ काम कर रहे हैं ताकि निवेशक केवल एक वित्तीय विवरण खोलकर अपना पूरा वित्तीय बहीखाता और अपनी आर्थिक को देख सके। भले ही हम इसे अनिवार्य रूप से न करें लेकिन कोई भी स्वेच्छा से अन्य नियमकीय तंत्र से ऐसे आंकड़े प्राप्त करने के लिए अ​धिकृत कर सकता है।’

वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि यदि नियामक अपनी विनियमित इकाइयों के डेटाबेस को एपीआई से साझा करने के लिए सहमत हों तो तकनीकी रूप से ऐसा विवरण तैयार करना संभव है। 

फी ओनली इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक हर्ष रूंगटा ने कहा, ‘निवेशक वर्तमान में एनएसडीएल और सीडीएसएल के माध्यम से अपनी प्रतिभूतियों की होल्डिंग देख सकते हैं, जिसमें एनपीएस का आंकड़ा भी एकीकृत होता है। बीमा, ईपीएफओ और बैंक खाते की जानकारी इस फ्रेमवर्क से बाहर है।’

रूंगटा ने कहा, ‘सेबी का समेकित ऐसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क को बढ़ावा देने का कदम समय पर उठाया गया स्वागत योग्य है। इससे पारदर्शिता तथा निवेशक अनुभव में काफी सुधार हो सकता है।’

समेकित वित्तीय विवरण डिपॉजिटरीज द्वारा निवेशकों के ईमेल एड्रेस पर भेजा जाता है, जिससे वे निवेश का वर्तमान मूल्य, ब्याज दरें और यहां तक कि म्युचुअल फंड निवेश पर भुगतान किए गए खर्चों और कमीशनों को भी जान सकते हैं। 

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First Published - January 18, 2026 | 10:45 PM IST

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