Budget 2026: भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने बुधवार को व्यापक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए चार सूत्री राजकोषीय रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें वित्त वर्ष 27 के केंद्रीय बजट से पहले सरकार के ऋण के तरीके का कड़ाई से पालन, मजबूत राजकोषीय पारदर्शिता, उच्च राजस्व जुटाना और तेज व्यय दक्षता का आह्वान किया गया।
सीआईआई ने कहा कि मूल्य स्थिरता के साथ मजबूत वृद्धि सक्रिय राजकोषीय प्रबंधन और व्यापक आर्थिक अनुशासन को दर्शाता है। हालांकिय यह चेतावनी भी दी गई है कि इस वृद्धि को बनाए रखने के लिए कहीं अधिक संस्थागत सुधारों की आवश्यकता होगी।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजित बनर्जी ने कहा, ‘भारत ने उच्च वृद्धि, कम महंगाई और बेहतर राजकोषीय संकेतकों के दुर्लभ लक्ष्य को हासिल किया है। अगले केंद्रीय बजट को अनुशासित राजकोषीय प्रबंधन और अधिक संस्थागत सुधारों के माध्यम से इस वृद्धि को जारी रखना चाहिए।’
उद्योग निकाय ने वित्त वर्ष 27 तक केंद्रीय ऋण को सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 54.5 प्रतिशत और राजकोषीय घाटे को 4.2 प्रतिशत के करीब रखने का सुझाव दिया है। यह सुझाव सरकार के ऋण के दायरे के अनुकूल है। सरकार ने वित्त वर्ष 31 तक कुल जीडीपी के 50 प्रतिशत के करीब ऋण का कुल स्तर रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उद्योग निकाय ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘सार्वजनिक वित्त को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों से परे शहरी स्थानीय निकायों (ULB) तक अनिवार्य रूप से विस्तार हो। दरअसल यूएलबी की राजकोषीय स्थिति से कुल ऋण पर असर बढ़ रहा है और यह व्यापक आर्थिक स्थिरता के स्थायित्व को आकार देती है।’
सीआईआई ने राजकोषीय विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए राजकोषीय ढांचे को पुनर्जीवित करने के लिए मध्यम अवधि का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में राजस्व और व्यय को लेकर तीन से पांच वर्ष तक का रोडमैप है। इस प्रस्ताव के साथ राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक और उभरते जोखिम का आकलन करने वाली सालाना राजकोषीय स्थितरता रिपोर्ट भी है।