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नवंबर में क्यों सूख गया विदेश भेजा जाने वाला पैसा? RBI डेटा ने खोली परत

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विदेश यात्रा और शिक्षा पर खर्च घटने से नवंबर में धनप्रेषण 1.94 अरब डॉलर रहा, अप्रैल-नवंबर में सालाना आधार पर 4.3% की गिरावट

Last Updated- January 22, 2026 | 9:07 AM IST
Reserve Bank of India (RBI)

भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत विदेश भेजा गया धन नवंबर में गिरकर वित्त वर्ष 2025-26 के निचले स्तर पर पहुंच गया। सालाना आधार पर इसमें 0.47 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 1.94 अरब डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले 1.95 अरब डॉलर था। विदेश यात्रा और शिक्षा से जुड़े धनप्रेषण पर खर्च में कमी आई है।

रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-नवंबर अवधि के दौरान धनप्रेषण में सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की कमी आई है और यह 19.10 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 19.97 अरब डॉलर था।

बुलेटिन के मुताबिक नवंबर में अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर खर्च सालाना आधार पर 1.11 प्रतिशत घटकर 1.10 अरब डॉलर रह गया, जो नवंबर 2024 में 1.11 अरब डॉलर था। एलआरएस के तहत कुल धनप्रेषण में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेश यात्रा की होती है।

वहीं इस माह के दौरान विदेश में शिक्षा के लिए भेजा गया धन सालाना आधार पर 29.85 प्रतिशत घटकर 12.093 करोड़ डॉलर रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा से जुड़े धन प्रेषण के कारण सामान्यतया सितंबर और अक्टूबर महीने में अधिक होता है और नवंबर में इसमें विराम लगता है। उसके बाद दिसंबर में छुट्टियों के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर खर्च गति पकड़ लेता है।

पृथ्वी एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक पवन कावड ने कहा कि इस साल की शुरुआत में भूराजनीतिक तनाव सहित वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे प्रमुख बाजारों में शिक्षा में मंदी के कारण धनप्रेषण प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में निवेश बढ़कर करीब दोगुना हो गया है, क्योंकि निवेश अपनी पोजिशन हेज करना चाहते हैं और वैश्विक बाजारों में बेहतर संभावनाएं तलाश रहे हैं।

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First Published - January 22, 2026 | 9:07 AM IST

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