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रूसी तेल फिर खरीदेगी मुकेश अंबानी की रिलायंस, फरवरी-मार्च में फिर आएंगी खेपें: रिपोर्ट्स

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एक महीने के ब्रेक के बाद रूसी तेल पर लौटी रिलायंस, फरवरी और मार्च में फिर आएंगी खेपें, रणनीति में दिखा बड़ा बदलाव

Last Updated- January 22, 2026 | 3:25 PM IST
Reliance Industries

एक महीने के ठहराव के बाद अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक बार फिर रूसी कच्चे तेल की ओर कदम बढ़ाने जा रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी और मार्च में कंपनी प्रतिबंधों के दायरे में फिट बैठने वाला रूसी तेल मंगाने की तैयारी में है। दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स को चलाने वाली रिलायंस की यह वापसी तेल बाजार में नई हलचल पैदा कर रही है।

दिसंबर के बाद टूटा था सिलसिला

दिसंबर में रूसी कच्चे तेल की आखिरी खेप आने के बाद रिलायंस ने कुछ समय के लिए दूरी बना ली थी। अमेरिका से मिली एक महीने की खास छूट ने कंपनी को यह मौका दिया कि वह प्रतिबंधित रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के साथ अपने पुराने सौदों को 21 नवंबर की समयसीमा के बाद धीरे-धीरे समेट सके। अब वही रिलायंस फिर से रूसी तेल की ओर लौटती दिख रही है।

सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस इस बार गैर-प्रतिबंधित रूसी विक्रेताओं से तेल खरीदेगी। फरवरी और मार्च में कितनी खेपें आएंगी, यह अभी साफ नहीं है। यह भी तय नहीं है कि मार्च के बाद यह सिलसिला आगे बढ़ेगा या फिर एक बार फिर ब्रेक लगेगा।

हालांकि रिलायंस की वापसी चर्चा में है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि फरवरी और मार्च में भारत का कुल रूसी तेल आयात सीमित ही रहने वाला है। भारतीय रिफाइनर अब हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं।

Also Read: रूस से दूरी, पश्चिम एशिया से नजदीकी: भारतीय तेल आयात में बड़ा बदलाव

एक समय था जब रिलायंस रोसनेफ्ट के साथ लंबे करार के तहत रोजाना 5 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल मंगाती थी। यह तेल गुजरात के जामनगर में स्थित 14 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाले विशाल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स में प्रोसेस होता था। वही जामनगर प्लांट अब एक बार फिर सुर्खियों में है।

यूरोप के नियमों ने बदली चाल

यूरोपीय यूनियन ने 21 जनवरी से साफ कर दिया है कि वह ऐसे रिफाइनरियों से बने ईंधन को नहीं लेगा, जिन्होंने बिल ऑफ लोडिंग की तारीख से पहले 60 दिनों के भीतर रूसी तेल प्रोसेस किया हो। इसी नियम ने कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

रिलायंस ने कहा है कि 20 नवंबर के बाद आने वाली रूसी तेल की खेप को वह अपनी भारत-केंद्रित 6.6 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी में प्रोसेस करेगी। इससे कंपनी को यह सहूलियत मिलेगी कि वह अपनी 7.04 लाख बैरल रोज क्षमता वाली निर्यात रिफाइनरी से यूरोप को ईंधन की सप्लाई बिना रुकावट जारी रख सकेगी।

पश्चिम एशिया की ओर झुकता भारत

रॉयटर्स की एक और रिपोर्ट बताती है कि भारतीय रिफाइनर अब रूस से दूरी बनाकर पश्चिम एशिया की ओर रुख कर रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ तेल की जरूरत तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और टैरिफ कम करने की कोशिशों से भी जुड़ा माना जा रहा है।

2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रियायती रूसी समुद्री तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। लेकिन पश्चिमी देशों के दबाव और प्रतिबंधों ने इस व्यापार को लगातार विवादों में बनाए रखा। अब वही कहानी एक नए मोड़ पर खड़ी दिख रही है।

मजबूत नतीजों के बीच बड़ा फैसला

इसी बीच रिलायंस ने दिसंबर 2025 को खत्म तीसरी तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा बढ़कर 22,167 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऑपरेशंस से आमदनी 2.93 लाख करोड़ रुपये रही। करीब 20 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू के साथ रिलायंस का यह कदम सिर्फ तेल नहीं, बल्कि रणनीति की बड़ी चाल के तौर पर देखा जा रहा है।

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First Published - January 22, 2026 | 3:18 PM IST

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