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लेखक : अजित बालकृष्णन

आज का अखबार, लेख

मानविकी और विज्ञान की खाई पाटेगा डेटा विज्ञान

चंद रोज पहले एक प्रमुख सरकारी विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने मुझे इस बात पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया कि वे अपने पाठ्यक्रम को किस प्रकार आधुनिक बनाएंगे। जब बोलने की मेरी बारी आई तो मैंने कहा कि आधुनिकीकरण की दिशा में सबसे अहम पहला कदम होगा डिजिटल ह्यूमैनिटीज यानी मानविकी की पढ़ाई शुरू कराना।  […]

आज का अखबार, लेख

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के दौर में सत्य की खोज

आज भी मुझे अपने स्कूल के दिन याद हैं जब मेरे सहपाठियों और मेरे बीच इस बात को लेकर बहस हो गई थी कि ‘शून्य’ का आविष्कार किसने किया था? उनमें से कुछ ने कहा कि शून्य का आविष्कार ‘ईश्वर’ ने किया तो कुछ अन्य ने कहा कि शून्य तो हमेशा से मौजूद था और […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: भारतीय प्रबंधक और कामकाज में बदलाव

आप क्या इस बात से सहमत नहीं हैं कि भारतीय प्रबंधकों की आयु जब 40 के करीब होने लगती है तो वे वास्तविक काम करना बंद कर देते हैं और बैठक करने, समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करने जैसे अनुष्ठान रूपी काम करने लगते हैं? मुझसे यह सवाल एक मित्र ने पूछा था जब हम बीकेसी […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: भारतीयों के बदलते पहनावे की वजह

क्या भारतीयों के औपचारिक पहनावे में कुर्ता-पायजामा और धोती-साड़ी का बढ़ता प्रयोग औपनिवेशिक मानसिकता से दूरी और एक किस्म के सांस्कृतिक स्वराज की बानगी है? बता रहे हैं अजित बालकृष्णन जब मैंने उन सज्जन का अभिवादन किया तो उन्होंने मुझे सवालिया नजरों से देखा। हम दोनों एक दूसरे को अपने कामकाज के शुरुआती दिनों से […]

आज का अखबार, लेख

क्रिएटर इकॉनमी: म्युजिक उद्योग में क्रांति का नया दौर

मुंबई में अपने घर के निकट जिस पार्क में मैं रोज सुबह एक घंटे पैदल चलता हूं उसके प्रवेश द्वार पर वर्दी में खड़े एक सुरक्षा कर्मी ने मुझसे कहा, ‘सर, क्या मैं आपसे बात कर सकता हूं?’ मैं उसे देखकर चकित था। क्या मैं कोई ऐसी गैरकानूनी वस्तु ले जा रहा हूं जिसे लेकर […]

आज का अखबार, लेख

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की चुनौती और हमारी तैयारी

लगभग हर दो दशक की अवधि में मनुष्यों को ऐसी तकनीकी लहर का सामना करना पड़ता है जो हमारी मेधा और बचने के हमारे कौशल की सीमाओं का परीक्षण करती है। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की मौजूदा लहर भी परीक्षा की ऐसी ही घड़ी है। इन तकनीकी लहरों में कुछ बातें साझा होती हैं। जब ऐसी […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: तेजी से बदलता समय और कुलीन वर्ग की भूमिका

हर एक दशक में परिस्थितियों में तीव्र बदलाव आ रहा है। ऐसे में किसी देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा के चयन में उसके कुलीन और अभिजात वर्ग की भूमिका का विश्लेषण कर रहे हैं अजित बालकृष्णन एक समय था जब मैं अपनी किशोरावस्था के अंतिम दौर में था और केरल में अपने घर से […]

आज का अखबार, लेख

युवा भारतीयों का अंतहीन संघर्ष

भारत में शिक्षा ऋण की बढ़ती जरूरत तथा बदलते मध्यवर्गीय मूल्यों के कारण इस तरह के ऋण में इजाफा हुआ है। इस बात ने देश के युवाओं को एक बड़ी मुश्किल में डाल दिया है। बता रहे हैं अजित बालकृष्णन जब भी मैं ऐसी कोई सुर्खी देखता हूं जिसमें कहा गया हो, ‘कल्पना कीजिए सालाना […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: डेटा सुरक्षा से जुड़े जटिल सवालों का क्या हो समाधान

बेहतर होगा तकनीक क्षेत्र से जुड़े देश के सबसे बुद्धिमान और गहरी सोच वाले लोग डेटा संरक्षण के लिए काम करें। ​विस्तार से बता रहे हैं अजित बालकृष्णन पिछले हफ्ते मैं अपनी कार की पिछली सीट पर बैठ कर किंडल पर मशीन-लर्निंग तकनीक से जुड़ी हाल की सफलताओं के बारे में पढ़ रहा था। मुंबई […]

आज का अखबार, लेख

कामकाजी मोर्चे पर सामाजिक बदलाव ?

तकनीक से कर्मचारियों का दूर रहकर काम करना संभव हुआ है। यह रुझान मजबूत हुआ तो बुनियादी ढांचे के दम पर वृद्धि और समृद्धि लाने की आर्थिक सोच का क्या होगा? सवाल उठा रहे हैं अजित बालकृष्णन मेरा एक मित्र जिसकी हजारों कर्मचारियों वाली एक टेक कंपनी है, उसने हाल ही में एक घटना को […]

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