facebookmetapixel
Suzlon 2.0: विंड एनर्जी से आगे विस्तार की तैयारी, EV और AI भी हो सकते हैं पूरी तरह ग्रीनटैक्स कट नहीं, लेकिन बड़ी राहत! बजट 2026 में आम आदमी को क्या मिलेगा? रिपोर्ट में 8 बड़ी बातेंRupee vs Dollar: रुपये में नहीं थम रही गिरावट, ₹91 के पार निकला; लगातार कमजोरी के पीछे क्या हैं वजहें?Metal stock: शानदार Q3 नतीजों के बाद 52 वीक हाई पर, ब्रोकरेज ने कहा- अभी और ऊपर जाएगा Gold, Silver price today: चांदी ₹3.13 लाख के पार नए ​शिखर पर, सोने ने भी बनाया रिकॉर्डसोना-चांदी का जलवा, तेल में उथल-पुथल! 2026 में कमोडिटी बाजार का पूरा हाल समझिए1 महीने में जबरदस्त रिटर्न का अनुमान, च्वाइस ब्रोकिंग को पेप्सी बनाने वाली कंपनी से बड़ी तेजी की उम्मीदShadowfax IPO: ₹1,907 करोड़ का आईपीओ खुला, सब्सक्राइब करना चाहिए या नहीं ? जानें ब्रोकरेज की रायजो शेयर दौड़ रहा है, वही बनेगा हीरो! क्यों काम कर रहा बाजार का यह फॉर्मूलाStocks to watch: LTIMindtree से लेकर ITC Hotels और UPL तक, आज इन स्टॉक्स पर रहेगा फोकस

44,000 उड़ानें! Air India पीछे क्यों रह गई, सर्दियों के शेड्यूल में IndiGo निकली आगे

इस सर्दियों के शेड्यूल में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और सीटों की संख्या के मामले में IndiGo ने Air India समूह को पीछे छोड़ दिया है, जबकि Air India ने उड़ानों में कटौती की है

Last Updated- December 15, 2025 | 8:36 AM IST
IndiGo

इस सर्दियों के उड़ान शेड्यूल (अक्टूबर से मार्च) में IndiGo ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और सीटों की संख्या के मामले में Air India समूह को पीछे छोड़ दिया है। IndiGo विदेशों में तेजी से विस्तार कर रही है, जबकि Air India को घरेलू स्तर पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

वैश्विक विमानन डेटा कंपनी Cirium के अनुसार, IndiGo ने इस सर्दियों में अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या में 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इस बार उसके पास 44,035 उड़ानें हैं, जबकि पिछली सर्दियों में यह संख्या 38,481 थी।

Air India समूह ने की कटौती

Air India और Air India Express को मिलाकर बने Air India समूह ने इस सर्दियों में अपनी उड़ानों में 9 प्रतिशत से अधिक की कटौती की है। पिछले साल जहां उसकी 45,958 उड़ानें थीं, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 41,626 रह गई है। हालांकि, नागरिक उड्डयन मंत्रालय जरूरत के अनुसार इन आंकड़ों में बदलाव कर सकता है। यानी ये आंकड़े अस्थायी हैं, पक्के नहीं।

सीटों की संख्या में बदलाव

IndiGo ने अपनी सीटों की संख्या 74 लाख से बढ़ाकर 86 लाख कर दी है। दूसरी ओर, Air India समूह की सीटें पिछले सर्दियों के 92 लाख से घटकर इस बार 83 लाख रह गई हैं। इन बदलावों के कारण भारत से आने और जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में IndiGo की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से बढ़कर 22.1 प्रतिशत हो गई है। वहीं Air India समूह की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत से घटकर 21 प्रतिशत रह गई है।

विस्तार और पायलटों की कमी

आलोचकों का कहना है कि Air India की परेशानी की बड़ी वजह बिना पर्याप्त पायलटों के बहुत तेजी से विस्तार करना है। नए फ्लाइट ड्यूटी नियमों ने भी स्थिति को और कठिन बना दिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की नीति के कारण भारतीय एयरलाइनों को फायदा मिला है। सरकार विदेशी एयरलाइनों को भारत में ज्यादा उड़ानें चलाने की इजाजत आसानी से नहीं देती, खासकर बहुत ज्यादा भीड़ वाले रूट्स पर। इससे भारतीय कंपनियों को ज्यादा उड़ानें चलाने और आगे बढ़ने का मौका मिला है। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि इससे मुकाबला कम हो जाता है और यात्रियों के लिए विकल्प भी कम हो सकते हैं।

कई बड़ी विदेशी एयरलाइनों ने इस सर्दियों में अपनी उड़ानें घटाई हैं। Singapore Airlines ने 3 प्रतिशत, Qantas ने 8.46 प्रतिशत, Thai Airways ने 7.08 प्रतिशत, Lufthansa ने 4.2 प्रतिशत, Air France ने 0.1 प्रतिशत और Swiss Air ने 1.3 प्रतिशत उड़ानें कम की हैं।

पश्चिम एशिया में सीमित बढ़त

पश्चिम एशिया, जो भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार है, वहां भी विदेशी एयरलाइनों का विस्तार सीमित रहा। Qatar Airways की उड़ानें 3 प्रतिशत घटी हैं और Saudi Airlines की उड़ानें 2 प्रतिशत से अधिक कम हुई हैं। Etihad की बढ़ोतरी केवल 0.1 प्रतिशत रही, Air Arabia की 0.8 प्रतिशत और flydubai की उड़ानों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

अन्य भारतीय एयरलाइनों की स्थिति

SpiceJet और Akasa जैसी अन्य भारतीय एयरलाइनों को भी फायदा मिला है, लेकिन उनका बेस छोटा था। Akasa ने इस सर्दियों में अपनी उड़ानों की संख्या 118 प्रतिशत बढ़ाकर 1,566 से 3,414 कर दी है। वह अब SpiceJet के करीब पहुंच रही है, जिसकी उड़ानों में सिर्फ 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

लंबी दूरी की उड़ानों की चुनौती

हालांकि, SpiceJet और Akasa के पास बड़े विमान नहीं हैं। इसी कारण वे यूरोप, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के रूट्स पर उड़ानें नहीं चला पा रही हैं और फिलहाल पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया पर ही फोकस कर रही हैं।

First Published - December 15, 2025 | 8:18 AM IST

संबंधित पोस्ट