इस सर्दियों के उड़ान शेड्यूल (अक्टूबर से मार्च) में IndiGo ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और सीटों की संख्या के मामले में Air India समूह को पीछे छोड़ दिया है। IndiGo विदेशों में तेजी से विस्तार कर रही है, जबकि Air India को घरेलू स्तर पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वैश्विक विमानन डेटा कंपनी Cirium के अनुसार, IndiGo ने इस सर्दियों में अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या में 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इस बार उसके पास 44,035 उड़ानें हैं, जबकि पिछली सर्दियों में यह संख्या 38,481 थी।
Air India और Air India Express को मिलाकर बने Air India समूह ने इस सर्दियों में अपनी उड़ानों में 9 प्रतिशत से अधिक की कटौती की है। पिछले साल जहां उसकी 45,958 उड़ानें थीं, वहीं इस बार यह संख्या घटकर 41,626 रह गई है। हालांकि, नागरिक उड्डयन मंत्रालय जरूरत के अनुसार इन आंकड़ों में बदलाव कर सकता है। यानी ये आंकड़े अस्थायी हैं, पक्के नहीं।
IndiGo ने अपनी सीटों की संख्या 74 लाख से बढ़ाकर 86 लाख कर दी है। दूसरी ओर, Air India समूह की सीटें पिछले सर्दियों के 92 लाख से घटकर इस बार 83 लाख रह गई हैं। इन बदलावों के कारण भारत से आने और जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में IndiGo की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से बढ़कर 22.1 प्रतिशत हो गई है। वहीं Air India समूह की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत से घटकर 21 प्रतिशत रह गई है।
आलोचकों का कहना है कि Air India की परेशानी की बड़ी वजह बिना पर्याप्त पायलटों के बहुत तेजी से विस्तार करना है। नए फ्लाइट ड्यूटी नियमों ने भी स्थिति को और कठिन बना दिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की नीति के कारण भारतीय एयरलाइनों को फायदा मिला है। सरकार विदेशी एयरलाइनों को भारत में ज्यादा उड़ानें चलाने की इजाजत आसानी से नहीं देती, खासकर बहुत ज्यादा भीड़ वाले रूट्स पर। इससे भारतीय कंपनियों को ज्यादा उड़ानें चलाने और आगे बढ़ने का मौका मिला है। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि इससे मुकाबला कम हो जाता है और यात्रियों के लिए विकल्प भी कम हो सकते हैं।
कई बड़ी विदेशी एयरलाइनों ने इस सर्दियों में अपनी उड़ानें घटाई हैं। Singapore Airlines ने 3 प्रतिशत, Qantas ने 8.46 प्रतिशत, Thai Airways ने 7.08 प्रतिशत, Lufthansa ने 4.2 प्रतिशत, Air France ने 0.1 प्रतिशत और Swiss Air ने 1.3 प्रतिशत उड़ानें कम की हैं।
पश्चिम एशिया, जो भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार है, वहां भी विदेशी एयरलाइनों का विस्तार सीमित रहा। Qatar Airways की उड़ानें 3 प्रतिशत घटी हैं और Saudi Airlines की उड़ानें 2 प्रतिशत से अधिक कम हुई हैं। Etihad की बढ़ोतरी केवल 0.1 प्रतिशत रही, Air Arabia की 0.8 प्रतिशत और flydubai की उड़ानों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
SpiceJet और Akasa जैसी अन्य भारतीय एयरलाइनों को भी फायदा मिला है, लेकिन उनका बेस छोटा था। Akasa ने इस सर्दियों में अपनी उड़ानों की संख्या 118 प्रतिशत बढ़ाकर 1,566 से 3,414 कर दी है। वह अब SpiceJet के करीब पहुंच रही है, जिसकी उड़ानों में सिर्फ 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, SpiceJet और Akasa के पास बड़े विमान नहीं हैं। इसी कारण वे यूरोप, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के रूट्स पर उड़ानें नहीं चला पा रही हैं और फिलहाल पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया पर ही फोकस कर रही हैं।