facebookmetapixel
Advertisement
Editorial: दिवालिया समाधान से CSR और ऑडिट सुधार तक बड़े बदलावसरकारी बैंकों में प्रमोशन के पीछे की कहानी और सुधार की बढ़ती जरूरत​युद्ध और उभरती भू-राजनीतिक दरारें: पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दियापीएम मोदी 28 मार्च को करेंगे जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन; यूपी में पर्यटन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को नई उड़ानBiharOne: बिहार में डिजिटल गवर्नेंस की नई शुरुआत, CIPL के साथ बदलाव की बयारईरानी तेल खरीद का दावा गलत, रिलायंस ने रिपोर्टों को बताया बेबुनियादरनवे से रियल्टी तक: जेवर एयरपोर्ट ने बदली नोएडा की प्रोपर्टी की कहानी, 2027 तक आ सकती है 28% और तेजी‘हेडलाइन्स’ से कहीं आप भी तो नहीं हो रहे गुमराह? SIP पर जारी रखें ये स्ट्रैटेजीAM/NS India में बड़ा बदलाव: दिलीप ओम्मन होंगे रिटायर, अमित हरलका बनेंगे नए सीईओभारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकार

दोपहिया उद्योग को 2026 में 9 फीसदी तक की ग्रोथ की उम्मीद, GST कटौती के चलते मांग बढ़ने के आसार

Advertisement

फाडा के आंकड़ों के अनुसार उद्योग ने वर्ष 2025 का समापन 2 करोड़ वाहनों से अधिक की खुदरा बिक्री के साथ किया

Last Updated- January 11, 2026 | 9:59 PM IST
two wheeler
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के दोपहिया उद्योग में कैलेंडर वर्ष 2026 में 6 से लेकर 9 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इस खरीद को जीएसटी कटौती के बाद बेहतर हुई कीमतों, मजबूत ग्रामीण मांग और शहरों में रीप्लेसमेंट यानी पुराने वाहन हटाकर नयों की खरीदारी में सुधार से बल मिलेगा। हालांकि 125सीसी से कम के  वाहनों के लिए एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) अनिवार्य बनाने के एक प्रस्ताव से कीमतों में इजाफा होने और अल्पावधि में बिक्री पर दबाव पड़ने की आशंका है।

विश्लेषकों का कहना है कि एंट्री-लेवल एबीएस सिस्टम जोड़ने की लागत 2,000 से,000 रुपये प्रति वाहन होने का अनुमान है। आम जनता की वाहन श्रेणी में मार्जिन कम है। इसलिए पूरी तरह से इस वढ़ोतरी को मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) वहन कर लेंगे, इसकी संभावना नहीं है। ऐसे में एंट्री-लेवल की मोटरसाइकलों और स्कूटरों की कीमतों में 7 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।

बीएनपी पारिबा में विश्लेषक (आईटी और ऑटो) कुमार राकेश ने कहा, ‘एक बार कीमतें स्थायी रूप से बढ़ने के बाद मांग निचले आधार पर पहुंच जाती है। जैसे-जैसे बिक्री एडजस्ट होगी, हम लगभग एक वर्ष तक इसका प्रभाव देखेंगे।’ 

दोपहिया बाजार की जैसी संरचना है, उससे जोखिम और बढ़ गया है। इस बाजार में 125सीसी से कम क्षमता वाले मॉडल की बिक्री का हिस्सा अधिक है। 125सीसी से कम वाली मोटरसाइकलों का कुल बाइक बिक्री में लगभग 74-75 प्रतिशत है। ज्यादातर स्कूटर भी कम इंजन क्षमता पर केंद्रित हैं। नवंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार मासिक आधार पर 125सीसी से कम क्षमता वाले दोपहिया वाहनों की बिक्री लगभग 9 लाख होने का अनुमान है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि एबीएस के कारण कीमत वृद्धि का असप एंट्री-लेवल के इन खंडों में सबसे अधिक होगा।

समय के नजरिये से देखें तो इसका तत्काल प्रभाव सीमित हो सकता है। कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली छमाही को अपेक्षाकृत कम आधार से लाभ होने की उम्मीद है, क्योंकि पिछले साल वृद्धि कमजोर थी। लेकिन दूसरी छमाही में दबाव बढ़ने की संभावना है क्योंकि आधार आकर्षक हो गया है और पिछले साल की जीएसटी कटौती का लाभ फीका पड़ा है।

प्रस्तावित एबीएस की अनिवार्यता के समय और दायरे को लेकर नियामकीय अनिश्चितता भी है। सरकार के साथ हाल में हुई बैठक में दोपहिया वाहन निर्माताओं ने 125सीसी तक की मोटरसाइकलों और स्कूटरों में एबीएस के प्रभावी होने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने तर्क दिया कि लागत प्रभाव के हिसाब से कम गति वाले वाहन सेगमेंट में सुरक्षा लाभ सीमित हो सकते हैं।   

इन अल्पावधि समस्याओं के बावजूद उद्योग पर नजर रखने वालों को कैलेंडर वर्ष 2026 में दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री 6 से 9 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। यह उम्मीद जीएसटी के बाद खरीद क्षमता में सुधार, लचीली ग्रामीण मांग और मजबूत शहरी रीप्लेसमेंट मांग पर आधारित है।

फाडा के आंकड़ों के अनुसार उद्योग ने वर्ष 2025 का समापन 2 करोड़ वाहनों से अधिक की खुदरा बिक्री के साथ किया। उसकी राय में दोपहिया पर जीएसटी दर 28 से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद बिक्री की रफ्तार मजबूत हुई। 

Advertisement
First Published - January 11, 2026 | 9:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement