facebookmetapixel
Advertisement
विकास के अगले चरण के लिए भूमि व कारोबारी माहौल में सुधार जरूरी: प्रधानमंत्री मोदी तमिलनाडु में सरकार के 100 दिन, एमजीआर की याद दिला रहे विजयपश्चिम बंगाल में कारोबार को बढ़ावा, नई सरकार के पहले 100 दिन में निवेश पर जोर1991 के आ​र्थिक सुधारों से उद्योग को मिला प्रतिस्पर्धा का भरोसा, औद्योगिक और व्यापार नीति में तालमेल बिठाना जरूरीऑफर फॉर सेल के जरिये जुटाई गई रकम में उफान, LIC का अहम योगदानQ1 Results: लिस्टेड कंपनियों के मुनाफे में 16% की तेज बढ़त, BFSI और मेटल सेक्टर का बड़ा योगदानRBI के फैसले से बैंकों में हलचल, FCNR(B) जमा जुटाने की रफ्तार बढ़ीबाजार हलचल: प्री-आईपीओ शेयर, नया SLB कॉन्ट्रैक्ट और UPI नियम पर नजरजुलाई में बायोकॉन बनी MF की पसंदीदा स्मॉल-कैप खरीद, ₹3,300 करोड़ का निवेशराजस्व और मार्जिन के मोर्चे पर अपोलो से आगे मैक्स, मरीजों की बढ़ती संख्या से ग्रोथ को सहारा

नोट वापसी का असर: नकदी में सुधार की उम्मीद में कॉल दरें, बॉन्ड प्रतिफल में आई कमी

Advertisement
Last Updated- May 22, 2023 | 11:12 PM IST
Rs 2,000 note issue: BJP leader reaches Delhi HC against RBI-SBI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2,000 रुपये के नोट को बाजार से निकालने के फैसले से नकदी की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है और इसकी वजह से ही वित्तीय बाजार (मनी मार्केट) की दरों और बॉन्ड प्रतिफल (bond yields) में कमी आई है। इसके अलावा आरबीआई ने वित्त वर्ष 2023 के लिए केंद्र सरकार को अधिशेष के रूप में 87,716 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का फैसला किया जिससे बाजार धारणा प्रभावित हुई।

बाजार डीलरों ने कहा कि कॉल दरों में दिन भर गिरावट के रुझान देखे गए। क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, औसत भारित कॉल दर (weighted average call rate) शुक्रवार को 6.37 प्रतिशत थी और यह घटकर 6.2 प्रतिशत पर आ गई।

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य विश्लेषण समूह के निदेशक सौम्यजीत नियोगी ने कहा कि इन दो घटनाओं से अर्थव्यवस्था के नकदी स्तर में सुधार होगा और आने वाले महीने में वाणिज्यिक पत्र और जमा प्रमाणपत्र की ब्याज दरों में नरमी आने की उम्मीद है।

10 साल के बेंचमार्क (2033 में 7.26 फीसदी पर परिपक्व होने वाले) पर प्रतिफल सोमवार को 6.98 फीसदी के स्तर पर बंद हुआ जबकि शुक्रवार को यह 7.01 फीसदी पर बंद हुआ था। तीन साल से पांच साल के बॉन्ड पर प्रतिफल करीब सात आधार अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।

एक स्वतंत्र आर्थिक शोध कंपनी, क्वांटइको ने कहा कि आरबीआई के 2,000 रुपये के नोटों को वापस लेने और केंद्र सरकार को अधिशेष के रूप में 87,400 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने से मुद्रा बाजार में नकदी की स्थिति बेहतर होगी। लाभांश हस्तांतरण से एक निश्चित प्रभाव (874 अरब रुपये) पड़ेगा, वहीं मुद्रा निकासी से 40,000 करोड़ रुपये से लेकर एक लाख करोड़ रुपये तक का संभावित प्रभाव पड़ेगा।

Also read: समिति की रिपोर्ट से अदाणी के शेयरों में आई तेजी, 10 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े पर फिर से पहुंच गया एमकैप

भले ही भारत की बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति मई महीने में लगभग 60,000 करोड़ रुपये के अधिशेष पर बनी हुई थी, लेकिन महीने के अधिकांश दिनों में एक रात में मिलने वाली दरें ऊंची रहीं क्योंकि अधिशेष का बड़ा हिस्सा कुछ बड़े बैंकों के पास था।

नकदी डालने से रुपये के सरकारी बॉन्डों में तेजी फिर से आ सकती है। पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक द्वारा सरकार को लाभांश भुगतान करने से व्यापारियों की उम्मीदों पर कायम न रहने के बाद सरकारी बॉन्डों ने अपनी रफ्तार खो दी थी।

Also read: 3-5 फीसदी ATM में हैं 2,000 के नोट, CRM में लगातार स्वीकार किया जाएगा कैश

बड़े भुगतान से वित्त मंत्रालय को अपनी बॉन्ड बिक्री में कटौती करने और उधारी लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

कारोबारियों ने कहा कि नकदी में सुधार से छोटी अवधि के बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट आ सकती है, लेकिन बहुप्रतीक्षित ओपन मार्केट बॉन्ड खरीद के साथ-साथ घरेलू नीति में ढील दिए जाने में देरी से मध्यम अवधि में दीर्घकालिक प्रतिफल बढ़ सकता है।

इससे पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि 2,000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने का अर्थव्यवस्था पर बहुत मामूली असर पड़ेगा क्योंकि चलन में मौजूद मुद्रा में इसका हिस्सा केवल 10.8 प्रतिशत है।

Advertisement
First Published - May 22, 2023 | 9:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement