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Gold Outlook 2026: ऊंची कीमतों के बावजूद सोने की चमक बरकरार, 2026 में भी तेजी का समर्थन करेंगे फंडामेंटल्स

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डब्ल्यूजीसी की सितंबर तिमाही की रिपोर्ट में 2025 के लिए सोने की मांग 600 से 700 टन के बीच अनुमानित की गई थी। 2024 में यह लगभग 800 टन थी

Last Updated- December 30, 2025 | 9:40 PM IST
Sachin Jain
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) इंडिया के क्षेत्रीय मुख्य कार्या​​धिकारी सचिन जैन

पिछले 18 महीनों में सोने की कीमतों में तेजी ने कई मसले खड़े कर दिए हैं। हालांकि, कई विशिष्टताओं के साथ दीर्घकालिक स्वर्ण नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है। एक वर्चुअल इंटरव्यू में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) इंडिया के क्षेत्रीय मुख्य कार्या​​धिकारी सचिन जैन ने राजेश भयानी को बताया कि 2026 में फंडामेंटल सोने में तेजी का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऊंची कीमत के बावजूद उपभोक्ताओं ने शादी के खर्चों के हिसाब से गहने खरीदने के लिए अपना बजट बढ़ा दिया है। बातचीत के मुख्य अंश:

सोने की कीमतों में पिछले दो वर्षों में भारी उछाल आई है। क्या यह चमक 2026 में फीकी पड़ जाएगी?

पिछले 18 महीनों में देखी गई तेजी पूरी तरह से फंडामेंटल पर आधारित थी। यह भू-राजनीतिक संकट और वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने भंडार में सोना बढ़ाने के लिए खरीद करने के साथ शुरू हुई। डॉलर पर घटती निर्भरता दूसरा कारण है। वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 18 महीने पहले 74.5 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 56 प्रतिशत रह गई है और इसका एक खासा हिस्सा सोने में निवेश किया गया है। अमेरिकी और वैश्विक ऋण का बढ़ता स्तर एक और कारण है। अमेरिकी ऋण 37 लाख करोड़ डॉलर है। 2026 में और मध्याव​धि में सोने की कीमतों में तेजी के मददगार कारण बने हुए हैं।

कीमतें अगर बढ़ती रहीं तो भारत में मांग कैसे प्रभावित होगी?

डब्ल्यूजीसी की सितंबर तिमाही की रिपोर्ट में 2025 के लिए सोने की मांग 600 से 700 टन के बीच अनुमानित की गई थी। 2024 में यह लगभग 800 टन थी। कीमतों में वृद्धि के बावजूद मांग में पिछले कुछ महीनों के रुझानों के आधार पर मुझे लगता है कि हम पहले के अनुमानित दायरे के ऊंचे स्तर पर मांग के साथ वर्ष का समापन करेंगे।

वास्तविकता यह है कि कीमतों में काफी तेजी के बावजूद 700 टन एक अच्छी संख्या है। कीमतों में वृद्धि के कारण शादी के खर्चों में गहनों का बजट पहले के 30 प्रतिशत से बढ़कर अब 40 प्रतिशत हो गया है। वास्तव में निवेश की मांग मात्रा के हिसाब से बढ़ रही है। उदाहरण के लिए भारत का गोल्ड ईटीएफ वर्ष की शुरुआत में 56 टन था। पर अब यह 90 चन से अधिक है। ईटीएफ में पोर्टफोलियो की संख्या भी बढ़ रही है। 2026 में ईटीएफ में तेज वृद्धि देखी जा सकती है।

उपभोक्ताओं को जो बात सबसे अ​धिक खल रही है, वह यह है कि गहने बनाने के शुल्क को सोने की कीमत के प्रतिशत के रूप में लिया जाता है। पिछले 18 महीनों में गढ़ाई की लागत में इतनी वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन उपभोक्ता बहुत अधिक कीमत चुका रहे हैं। इस पर क्या कहना है?

खुदरा विक्रेता अपना व्यवसाय कैसे करते हैं या अपने उत्पादों की कीमत कैसे तय करते हैं, इसमें डब्ल्यूजीसी कोई भूमिका नहीं निभा सकता है। हम जो कह सकते हैं वह यह है कि पारदर्शिता होनी चाहिए और उपभोक्ताओं के पास विकल्प होना चाहिए। हमने अभी स्वर्ण उद्योग के लिए एक स्व-नियामक संगठन शुरू किया है। वे जौहरियों के लिए यह तय कर सकते हैं कि वे कैसे काम करते हैं, अपने ग्राहकों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं और पारदर्शिता लाते हैं।

साफ बात तो यह है कि यह कहना उचित नहीं है कि हर किसी के शुल्क बहुत अधिक हैं। गलाकाट प्रतिस्पर्धा है। जौहरी भी ग्राहकों को बनाए रखने के लिए अपनी तरफ से कमी करते हैं।

भारतीय घरों में रखे गए कुल सोने पर कोई नया अनुमान नहीं है। यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस कीमती धातु की कीमत आसमान छू गई है। आपकी टिप्पणी?

भारतीय घरों में रखे सोने पर डब्ल्यूजीसी का अंतिम अनुमान एक दशक पहले 25,000 टन था। यहां तक कि वह भी वैज्ञानिक नहीं था। हम समीक्षा करने और संशोधित अनुमानों के लिए अगली तिमाही में नया अध्ययन शुरू करेंगे।

सरकार ने सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) बंद कर दिए हैं और गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (जीएमएस) भी चल नहीं पाई है। इन्हें सोने का आयात घटाने के लिए लाया गया था। सोने का आयात बढ़ रहा है, ऐसे में क्या किया जा सकता है?

डब्ल्यूजीसी सरकार की स्वर्ण नीति 2047 पर एक रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रहा है। अगली तिमाही में हम सरकार को इस पर ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ (स्वर्ण नीति 2047) नामक दस्तावेज देंगे। इसमें 2047 तक स्वर्ण उद्योग की क्या भूमिका हो सकती है, इस पर सिफारिश होंगी। इसमें 2030, 2035 और 2040 तक प्राप्त किए जाने वाले लक्ष्यों और पहले चरण में क्या किया जाना चाहिए, जैसी बातें शामिल होंगी।

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First Published - December 30, 2025 | 9:33 PM IST

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