Rupee vs Dollar: कंपनियों की डॉलर मांग के कारण गुरुवार को रुपया 0.1 फीसदी गिरकर 89.97 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार का वॉल्यूम कम रहा। लिहाजा, दिन भर मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला। डीलरों ने यह जानकारी दी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, प्रमुख उत्प्रेरकों की कमी के कारण बाजार की कोई दिशा नहीं मिली, लिहाजा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर हुआ। सीमित आपूर्ति और निरंतर मांग के कारण तरलता में कमी आई और गुरुवार को प्रमुख विदेशी मुद्रा बाजारों में नए साल की छुट्टी की वजह से रुपये पर दबाव बना रहा। आगे चलकर रुपये के एक सीमित दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है, जहां उसे 89.40 प्रति डॉलर पर समर्थन और 90.26 प्रति डॉलर पर प्रतिरोध मिल सकता है।
2025 में स्थानीय मुद्रा में 4.74 फीसदी की गिरावट आई और यह एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक रही। यह कमजोरी अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता, अमेरिका और जापान जैसे विकसित बाजारों में लगातार उच्च ब्याज दरें (कैरी ट्रेड पूंजी के प्रमुख स्रोत) और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी के कारण आई क्योंकि वैश्विक पूंजी ज्यादा प्रतिफल देने वाले बाजारों की ओर जा रही थी। रुपये गिरकर करीब 91 तक पहुंच गया, लेकिन आरबीआई की डॉलर बिक्री के माध्यम से मजबूत और सामयिक हस्तक्षेप से यह 90 से नीचे आ गया।
बाजार के जानकारों का कहना है कि केंद्रीय बैंक ने विशिष्ट स्तरों की रक्षा करने के बजाय अस्थिरता प्रबंधन पर लगातार जोर दिया है, लेकिन पिछले उदाहरणों से संकेत मिलता है कि वह अभी भी रुपये के लिए अनौपचारिक सीमाएं तय कर सकता है। 88.80 प्रति डॉलर के स्तर का लंबे समय तक बचाव किया गया लेकिन अंततः यह टूट गया। हाल ही में 91.40 प्रति डॉलर के आसपास का निम्न स्तर भी इसी तरह का संदर्भ स्तर हो सकता है। तथापि आरबीआई की हस्तक्षेप करने की क्षमता उसकी शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन से सीमित हो सकती है।
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, जहां संभावना यह लगती है कि रुपये की सापेक्षिक कमजोरी उसके अत्यधिक मूल्यांकन को ठीक करने और टैरिफ के असर को कम करने के लिए पहले से ही तय हो गई थी, लेकिन यह जल्द ही एक सामान्य प्रक्रिया बन गई और बाजार की स्थिति बिगड़ने लगी, जिससे आरबीआई को मुश्किलें होने लगीं। उन्होंने कहा, आरबीआई का घोषित मकसद हमेशा अस्थिरता को नियंत्रित करना रहा है।