भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्युचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं के पास रखे फिजिकल सोने और चांदी की मूल्यांकन व्यवस्था में बदलाव किया है। उसने फंडों को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के बजाय मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा प्रकाशित स्पॉट कीमतों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।
नए नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे। इनके तहत म्युचुअल फंड भौतिक सोने और चांदी की वैल्यू के लिए हाजिर कीमतों का इस्तेमाल करेंगे।
हाजिर कीमतों का इस्तेमाल खासकर घरेलू एक्सचेंजों पर सोने और चांदी के डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट के समय गोल्ड और सिल्वर की डिलिवरी के लिए किया जाता है। यह कदम लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (एलबीएमए) के एएम फिक्सिंग प्राइस का इस्तेमाल करने के मौजूदा तरीकों से अलग है, जिसे करेंसी कन्वर्जन, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट, कस्टम ड्यूटी, टैक्स और नोशनल प्रीमियम या डिस्काउंट के लिए समायोजित किया जाता है।
सेबी ने कहा कि यह बदलाव म्युचुअल फंड एडवाइजरी कमेटी में हुए विचार-विमर्श, एक पब्लिक कंसल्टेशन प्रोसेस और बाजार कारोबारियों के साथ चर्चा के बाद किया गया है। नियामक ने कहा कि मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा प्रकाशित कीमतें पारदर्शी और अनुपालन मानकों के अधीन हैं और इसलिए वे घरेलू बाजार की स्थितियों को ज्यादा दिखाती हैं।
सर्कुलर में कहा गया है कि विनियमित एक्सचेंजों से स्पॉट कीमतों का इस्तेमाल करने से मूल्यांकन प्रणाली में ज्यादा समानता आएगी और यह सुनिश्चित होगा कि परिसंपत्ति की वैल्यू भारतीय बाजार परिदृश्य को बेहतर ढंग से दिखाएं।
सेबी ने एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) से कहा है कि वह नियामक के साथ विचार-विमर्श करके एक जैसी नीति बनाए जिससे कि उसे पूरे उद्योग में लागू किया जा सके।