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बदलेंगे स्मार्टफोन PLI नियम! अगले चरण में उत्पादन के बजाय लोकल वैल्यू-एडिशन को मिल सकती है प्राथमिकता

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मौजूदा योजना के तहत प्रोत्साहन उन कंपनियों से जुड़े हैं जो हर पांच साल में वृद्धिशील निवेश और उत्पादन मूल्य लक्ष्य को पूरा करती हैं

Last Updated- February 26, 2026 | 10:27 PM IST
Mobile

सरकार देश में स्मार्टफोन उत्पादन को बढ़ावा देना जारी रखने के लिए एक नई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। स्मार्टफोन के लिए मौजूदा पीएलआई योजना 31 मार्च को खत्म हो रही है। हालांकि इस बार वित्तीय प्रोत्साहन के मुख्य मानदंड को घरेलू मूल्यवर्धन लक्ष्य से जोड़ा जाएगा।

मौजूदा योजना के तहत प्रोत्साहन उन कंपनियों से जुड़े हैं जो हर पांच साल में वृद्धिशील निवेश और उत्पादन मूल्य लक्ष्य को पूरा करती हैं। सरकार पात्र कंपनियों द्वारा हासिल किए गए निर्यात, मूल्यवर्धन और प्रत्यक्ष रोजगार पर भी नजर रखती है, मगर योजना के तहत 4 से 6 फीसदी वित्तीय प्रोत्साहन पाने के लिए ये अनिवार्य नहीं हैं।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम निश्चित रूप से भारत में मोबाइल विनिर्माण को सहायता देना जारी रखेंगे। इसके निर्यात में अच्छी वृद्धि हुई है। मगर इस बार हम प्रोत्साहन को मूल्यवर्धन से जोड़ने पर विचार कर रहे हैं।’

अधिकारी ने कहा कि स्थानीय कलपुर्जा आपूर्ति श्रृंखला बनाने में मदद के लिए सरकार ने पहले ही एक बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना शुरू की है। उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जा के कई क्षेत्र में भारत न सिर्फ आत्मनिर्भर होगा बल्कि बड़ा निर्यातक भी बनेगा।’

2020 में घोषित मौजूदा पांच साल की पीएलआई योजना के तहत सरकार को उम्मीद थी कि भारत में बने स्मार्टफोन में घरेलू मूल्यवर्धन शुरुआत में 15-20 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 के आखिर तक 35-40 फीसदी हो जाएगा। हालांकि हितधारकों के अनुमान के आधार पर वित्त वर्ष 2026 के अंत तक वास्तविक मूल्यवर्धन मु​श्किल से 18-20 फीसदी रहने की उम्मीद है।

पीएलआई योजना के लिए पांच साल में 34,193 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। हालांकि दी गई रा​शि और आवंटन के अनुमान के आधार पर कुल भुगतान लगभग 20,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसका बड़ा हिस्सा ऐपल के आपूर्तिकर्ताओं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्सकॉन के साथ ही सैमसंग और डिक्सन टेक्नॉलजीज (इंडिया) को मिलने की उम्मीद है।

वर्ष 2020 में चीन के साथ गलवान सीमा पर झड़प और प्रेस नोट 3 लागू होने के बाद भारत ने चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए दरवाजे बंद कर दिए। इसमें चीन की कलपुर्जा कंपनियां भी शामिल थीं जिनका ऐपल सहित स्मार्टफोन विनिर्माताओं के वै​श्विक आपूर्ति श्रृंखला में दबदबा है। इससे इन कंपनियों के भारत में अकेले या संयुक्त उपक्रम के जरिये काम शुरू करने की क्षमता पर रोक लग गई।

इसके परिणामस्वरूप ऐपल को पीएलआई लाभ के लिए अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना पड़ा और उसने चीन के कलपुर्जा आपूर्तिकर्ताओं को भारत लाने की योजना छोड़ दी। इसके बजाय, उसने घरेलू और दूसरे देशों की कंपनियों के साथ आपूर्ति श्रृंखला बनाने का विकल्प चुना मगर इसकी प्रगति धीमी ​रही जिससे सरकार के मूल्यवर्धन लक्ष्य पर भी असर पड़ा। ऐपल ने भारत में ऐसी लगभग 40 कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला बनाई है।

इस बीच, सरकार को हितधारकों के साथ बातचीत से यह भी पता चला कि व्यापक स्तर पर उत्पादन शुरू किए बिना कलपुर्जा विनिर्माताओं के लिए भारत में परिचालन शुरू करना फायदे का सौदा नहीं होगा। सच तो यह है कि 40 फीसदी मूल्यवर्धन जैसे बड़े लक्ष्य (चीन ने तीन दशक में यह हासिल किया) 5 साल में पूरे नहीं हो सकते थे, जैसा कि शुरू में सोचा गया था।

इसके बाद से सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना के जरिये मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए बजट में छह साल की योजना के लिए आवंटन 22,919 करोड़ रुपये से 75 फीसदी बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया।

पीएलआई योजना के तहत पात्र स्मार्टफोन कंपनियां इस कार्यक्रम को कुछ और वर्षों के लिए बढ़ाने पर जोर दे रही हैं ताकि भारत को वियतनाम और खास तौर पर चीन जैसे देशों के मुकाबले अपनी लागत को कम करने का समय मिल सके। उदाहरण के लिए चीन के मुकाबले भारत में ऐपल के आपूर्तिकर्ताओं को लागत में करीब 10-12 फीसदी का नुकसान होता है, जिसमें से कुछ की भरपाई पीएलआई प्रोत्साहन से हो जाती है।

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First Published - February 26, 2026 | 10:25 PM IST

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