सरकार को उम्मीद है कि ऐपल इंक अगले कुछ वर्षों में अपने वैश्विक आईफोन उत्पादन का 30 फीसदी हिस्सा भारत में बनाएगी। उसे नहीं लगता कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण उसकी वृद्धि योजना में किसी तरह का बदलाव होगा। अमेरिकी अदालत ने चीन और अन्य देशों पर लगाए गए शुल्कों को गैर-कानूनी ठहराया है।
परिणामस्वरूप, भारत और चीन बिना किसी शुल्क के अमेरिका को आईफोन निर्यात कर सकेंगे और शुल्क में मौजूदा अंतर अब भारत के पक्ष में काम नहीं करेगा। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा, हमें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण भारत में ऐपल इंक की रणनीति में किसी भी बदलाव की उम्मीद नहीं है। कंपनी भारत को लेकर प्रतिबद्ध है और हमें विश्वसनीय स्रोत मानती है। उम्मीद है कि कंपनी कुछ वर्षों में अपने वैश्विक आईफोन उत्पादन का 30 फीसदी भारत में असेंबल करेगी।
2024-25 तक ऐपल इंक ने अपने वैश्विक आईफोन उत्पादन का लगभग 20 फीसदी भारत में असेंबल किया। कई विश्लेषकों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंत तक इसके लगभग 25 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।
आईफोन बनाने में भारत को 10 से 14 फीसदी की लागत हानि हो रही थी, जिसकी 4 से 6 फीसदी की पीएलआई प्रोत्साहन योजना से कुछ हद तक भरपाई हो रही थी। हालांकि, चीन पर 20 फीसदी फेंटानिल शुल्क लगने से भारत को लागत-प्रभावी लाभ मिल रहा था, क्योंकि वह अमेरिका को शून्य शुल्क पर निर्यात करता था।
फेंटानिल शुल्क घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया, जिससे भारत को मिलने वाला लाभ कम हो गया। हालांकि, ऐसी चिंताएं हैं कि चीन पर शून्य शुल्क लगने से अमेरिका को आईफोन निर्यात करना भारत के लिए आकर्षक नहीं रह सकता है जबकि पिछले साल अप्रैल से नवंबर के बीच अमेरिका में आईफोन निर्यात में 200 फीसदी की वृद्धि हुई थी।