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एंटरप्राइज एआई में तेजी से बढ़त: यूनिफोर को भारत में दिख रहीं अपार संभावनाएं

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अमेरिका की कन्वर्सेशनल एआई एंटरप्राइज कंपनी यूनिफोर ने पिछले साल के आखिर में एनवीडिया और एएमडी जैसी बड़ी कंपनियों से करीब 26 करोड़ डॉलर जुटाए थे

Last Updated- February 26, 2026 | 10:07 PM IST
Umesh Sachdev
यूनिफोर के मुख्य कार्या​​धिकारी उमेश सचदेव

अमेरिका की कन्वर्सेशनल एआई एंटरप्राइज कंपनी यूनिफोर ने पिछले साल के आखिर में एनवीडिया और एएमडी जैसी बड़ी कंपनियों से करीब 26 करोड़ डॉलर जुटाए थे। नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के मौके पर अभीक दास के साथ बातचीत में यूनिफोर के मुख्य कार्या​​धिकारी उमेश सचदेव ने कंपनी की विकास यात्रा, भारत के डीप टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम और एंटरप्राइज एआई को और अधिक तेजी से अपनाए जाने के बारे में विस्तार से बताया। प्रमुख अंश…

आप अमेरिका की तुलना में भारत में डीप टेक तंत्र को कैसे देखते हैं?

अमेरिका में पूंजी मिलने से बहुत सी समस्याएं सुलझ जाती हैं। इसलिए, एक स्टार्टअप अचानक शुरू हो सकता है और 1 करोड़ डॉलर जुटा सकता है तथ जीपीयू का इस्तेमाल शुरू कर सकता है। वहीं भारत में डीप वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम है, लेकिन हम उस स्तर पर नहीं हैं कि अगर मैं कहूं कि कल कुछ नया शुरू करूं तो मेरा सीड राउंड उतनी ही रकम जुटा पाएगा।

हमने उद्यम पूंजी, सॉवरेन फंडों और एनवीडिया, एएमडी, स्नोफ्लेक और डेटाब्रिक्स जैसी कंपनियों से पैसे लिए हैं। साथ ही, पूंजी का यही पूल आज बेंगलूरु या चेन्नई में काम करने वाले स्टार्टअप संस्थाप के लिए बिल्कुल आसान और सुलभ है। दूसरा, एक भारतीय स्टार्टअप के लागत ढांचे में अभी भी सिलिकॉन वैली स्टार्टअप के मुकाबले एक बड़ा अंतर है।

मौजूदा समय में मुख्य अंतर क्या है?

अमेरिका ने इस प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल (उपभोक्ता और उद्यम क्षेत्र, दोनों में) में बढ़त हासिल की है। इससे ये होता है कि इन टेक्नॉलजी में काम करने वाले डेवलपर कुछ सौ ग्राहकों के एक क्रॉस-सेक्शन के साथ इंटरैक्ट करते हैं, जो हमारे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं और लगातार फीडबैक दे रहे हैं। हम ये देख पाते हैं कि किस चीज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। तेजी से हो रहा नवाचार अमेरिका में प्रतिभा तंत्र को बहुत परिपक्व बना रहा है। भारत में टैलेंट है, लेकिन सवाल यह है कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जाए।

भारत एक मजबूत इनोवेशन सिस्टम कैसे बना सकता है?

दो ऐसे एरिया हैं जिनमें भारत न सिर्फ अंतर कम कर सकता है, बल्कि दुनिया को लीड भी कर सकता है। भारत में एआई को अपनाने की राजधानी बनने की क्षमता है। हम अमेरिका और चीन की तुलना में लाइन से हटने में धीमे हो सकते हैं, जिन्होंने पिछले तीन साल में इस दिशा में तेजी से काम किया है। जैसे ही भारत बड़े पैमाने पर, नागरिक स्तर पर, आबादी के स्तर पर या स्थानीय भाषा में ​शिक्षा की समस्या या हेल्थकेयर की पहुंच को हल करके उद्यम में एआई को अपनाना शुरू करेगा, उसे विकास में मदद मिलेगी।

राजस्व के मामले में यूनिफोर की ​स्थिति कैसी है?

हमने लगातार दो साल तक सालाना आधार पर 100 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। अब हम तीसरे साल भी इसी तरह की वृद्धि दर का अनुमान लगा रहे हैं। यह वह साल भी होगा जब हम कुल बुकिंग में एक अरब डॉलर को पार कर जाएंगे। हमारा 65 फीसदी राजस्व अमेरिका से आता है, जबकि लगभग 25 प्रतिशत में यूरोप की भागीदारी है। बाकी राजस्व एशिया से आता है। राजस्व के मामले में भारत का योगदान अभी भी बहुत कम है।

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First Published - February 26, 2026 | 10:06 PM IST

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