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भारत में एफडीआई 90 अरब डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद

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भारत में हुए कुल निवेश में रसायन, फार्मास्यूटिकल्स एवं जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है।

Last Updated- May 01, 2026 | 9:17 AM IST
FDI

वित्त वर्ष 26 में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आंकड़़ा 90 अरब डॉलर के पार जा सकता है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार नीतिगत सुधारों, मुक्त व्यापार समझौतों और मजबूत आर्थिक विकास के कारण एफडीआई का यह आंकड़ा छूने की संभावना है।

वित्त वर्ष 2026 में फरवरी तक अधिक सकल एफडीआई प्रवाह 88.29 अरब डॉलर रहा जबकि वित्त वर्ष 2025 में 80.61 अरब डॉलर सकल एफडीआई प्रवाह दर्ज की गई थी। इस अवधि में एफडीआई की शुद्ध आवक उछलकर 6.26 अरब डॉलर हो गई जबकि यह बीते वित्त वर्ष में 95.9 करोड़ डॉलर थी।

दरअसल, वैश्विक एफडीआई प्रवाह में भारत की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में लगभग दोगुनी हो गई है, जो निवेश गंतव्य के रूप में इसकी बढ़ती आकर्षण क्षमता को दर्शाती है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया का अनुमान है कि सुधारों और आपूर्ति श्रृंखला में बदलावों की मदद से 2030 तक वार्षिक निवेश प्रवाह 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। उनके अनुसार सुधार उपायों और संस्थागत समर्थन ने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है।

भाटिया ने बताया ‘भारत की निवेश गति नीतिगत स्पष्टता, संस्थागत प्रतिबद्धता और वैश्विक निवेशकों द्वारा हमारी प्रणालियों पर रखे गए भरोसे का प्रत्यक्ष परिणाम है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन्वेस्ट इंडिया से 6.1 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ। यह भारत के मजबूत नियामक वातावरण और इसके आर्थिक बदलाव की गहराई को दर्शाता है।’

भाटिया ने कहा कि गुजरात, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य शीर्ष निवेश गंतव्य के रूप में उभरे हैं। इसका कारण सक्रिय नीतियों और अवसंरचना विकास है। डीपीआईआईटी के तहत राष्ट्रीय निवेश संवर्धन एवं सुविधा एजेंसी इन्वेस्ट इंडिया के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में 14 राज्यों में 60 परियोजनाओं को स्थापित करके 6.1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश को सुगम बनाया गया। इन परियोजनाओं से 31,000 से अधिक संभावित रोजगार सृजित होने का अनुमान है। भारत में हुए कुल निवेश का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोप के देशों से आया है। भाटिया ने बताया कि इन्वेस्ट इंडिया के माध्यम से किए गए निवेश वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में लगभग तीन गुना बढ़ गए हैं।

भारत में हुए कुल निवेश में रसायन, फार्मास्यूटिकल्स एवं जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है। यह निवेश भारत की विनिर्माण और मूल्यवर्धन प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

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First Published - May 1, 2026 | 9:17 AM IST

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