जेनरिक दवाओं पर भारी भरकम शुल्क लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की धमकी के महज कुछ घंटों बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को फिलीपींस की राजधानी मनीला में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की। जेनरिक दवाओं पर शुल्क की धमकी ने भारतीय दवा निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।
जयशंकर और रूबियो ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते और शुल्क से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देश फिलहाल द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
मनीला में आसियान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान से जुड़ी बैठकों के दौरान जयशंकर ने चीन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, कनाडा और न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ भी बातचीत की। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने अक्टूबर 2024 से भारत-चीन संबंधों के धीरे-धीरे ‘सामान्य’ होने का जिक्र किया। इसमें सीमा पर शांति, सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा नियम अद्यतन करना, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करना और सीमा पर व्यापार बहाली जैसे मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों के अन्य ‘महत्त्वपूर्ण पहलुओं’ पर भी ध्यान देने की जरूरत है। जयशंकर ने कहा,‘इस संबंध में निष्पक्ष बाजार पहुंच और व्यापार संतुलन अहम हैं।’ उन्होंने ‘आपूर्ति श्रृंखला की पूर्वानुमान की क्षमता’ को लेकर भारत की चिंताओं पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा,‘दोनों देशों की सरकारों के प्रतिनिधियों और आम लोगों के बीच आपसी संवाद और संपर्क सहज एवं आसान बनाना जरूरी है। हमारे लिए अपनी- अपनी प्राथमिकताओं के मुताबिक विभिन्न तंत्रों और मंचों की बैठकों पर भी सहमत होना जरूरी है।’
जयशंकर ने रूबियो के साथ अपनी बैठक पर सोशल मीडिया पर डाले एक पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के लिए ‘प्राथमिकता वाले क्षेत्रों’ पर ध्यान केंद्रित किया ‘जिनमें व्यापार और शुल्क, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) शामिल हैं।’
रूबियो ने एक्स पर कहा कि दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों, ‘क्वाड’, व्यापार और रक्षा समझौतों पर चर्चा की। रूबियो ने कहा,‘भारत के साथ हमारे संबंध अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।’ जयशंकर ने कहा कि उन्होंने आपसी हित के क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि रूबियो और जयशंकर ने पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत में हाल की घटनाओं पर चर्चा की। पिगॉट ने अपने बयान में कहा कि रूबियो और जयशंकर ने ‘पिछले साल राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच किए गए वादे पूरे करने के लिए अहम रक्षा समझौतों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।’ पिगॉट ने कहा कि दोनों विदेश मंत्री अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के महत्त्व पर सहमत हुए जो लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने शुल्क के मुद्दे पर हुई चर्चा का कोई जिक्र नहीं किया।
जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी बातचीत की। जयशंकर ने लावरोव को काला सागर क्षेत्र में नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया। इस सप्ताह की शुरुआत में यूक्रेन के तट पर एक व्यापारिक जहाज पर रूस के मिसाइल हमले में चार भारतीय नाविक मारे गए और एक गंभीर रूप से घायल हो गया।
विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में रूस के विदेशी मामलों के प्रभारी व्लादिमीर लादानोव को तलब किया और गिनी बिसाऊ के ध्वज वाले व्यापारिक जहाज पर रूसी हमले पर चिंता जताई और इसकी निंदा भी की। इस हमले में भारतीय चालक दल के सदस्यों सहित 10 लोग मारे गए थे। जयशंकर ने कहा कि उन्होंने लावरोव के समक्ष उस क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की गंभीर चिंता फिर से दोहराई।
जयशंकर ने ‘क्वाड’ विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के प्रदर्शन के बीच भारत ने अपने ‘क्वाड’ सहयोगियों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का आह्वान किया और क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका का फिर जिक्र किया। बैठक में रूबियो, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री समकक्ष तोशिमित्सु मोतेगी शामिल हुए। क्वाड विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक मई के अंत में नई दिल्ली में हुई थी।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि ‘क्वाड’ विदेश मंत्रियों ने ‘हिंद-प्रशांत परिदृश्य की समीक्षा की और हाल की घटनाओं पर चर्चा की’। रूबियो ने कहा कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत का दृष्टिकोण साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘क्वाड’ एक प्राथमिकता बना हुआ है और हम इस साल के अंत में फिर से मिलेंगे।