बाजार नियामक सेबी ने प्रतिभूति बाजार में ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) ढांचे को बेहतर बनाने के लिए कई बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद कामकाज में तेजी लाना, समयसीमा घटाना और नियमों को बेहतर ढंग से लागू करना है।
एक अहम प्रस्ताव यह है कि विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी ओडीआर संस्थानों से लेकर मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर संस्थानों (एमआईआई) को सौंपी जाए। इनमें स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी शामिल हैं। पूरी तरह से टेक्नॉलजी पर आधारित प्रक्रिया को बनाए रखते हुए एमआईआई पूरे कामकाज का प्रबंधन करेंगे और बिचौलियों तथा सूचीबद्ध कंपनियों पर अपनी बेहतर नियामकीय निगरानी का लाभ उठाएंगे।
नियामक ने मध्यस्थ और सुलह कराने वालों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी बदलाव का सुझाव दिया है। विवाद से जुड़े पक्षों को मध्यस्थों के पैनल में से अपनी पसंद बतानी होगी और एमआईआई इस पसंद के आधार पर किसी एक उम्मीदवार को चुनेंगे। सुलह कराने वालों की नियुक्ति एमआईआई सीधे अपने पैनल में शामिल लोगों में से करेंगे।
शिकायत निवारण में तेजी लाने के लिए स्कोर्स प्लेटफॉर्म पर अनसुलझी शिकायतों को संबंधित संस्थाओं की समीक्षा के बाद सीधे ओडीआर के तहत सुलह के चरण में भेजा जाएगा, जिससे प्रक्रिया में लगने वाले समय में 21 दिन की कमी आएगी।
निवेशकों की चिंता दूर करने के लिए सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंडों (एआईएफ) के निवेशकों को ओडीआर प्लेटफॉर्म का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने के बजाय पहले से मौजूद अनुबंधों में तय तरीकों से विवाद सुलझाने का विकल्प दिया जाए।
इसके अलावा, सेबी ने ट्रस्ट के तौर पर बने एआईएफ निवेशकों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को कंपनियों या सीमित देनदारी वाली साझेदारी के जरिये निवेश करने वालों तक भी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है ताकि फंड के ढांचे से कोई फर्क न पड़े और सभी को एक जैसी सुरक्षा मिल सके।