Life Cycle Funds: म्युचुअल फंड नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए, मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने स्कीम कैटेगराइजेशन को नए सिरे से ढालने की कोशिश की है। इस बदलाव के तहत सॉल्यूशन-ओरिएंटेड फंड्स (रिटायरमेंट और चिल्ड्रन स्कीम्स) को बंद कर दिया गया है और उनकी जगह एक नई सोच के साथ ‘लाइफ साइकिल फंड्स’ नाम से एक नई कैटेगरी लॉन्च की गई हैं। ये लक्ष्य-आधारित योजनाएं होंगी, जिनकी एक पहले से तय मैच्योरिटी पीरियड होगी और अलग-अलग एसेट क्लास– इक्विटी, डेट, REITs और InvITs, एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स और गोल्ड-सिल्वर ETFs में निवेश करेंगी।
सेबी के सर्कुलर के मुताबिक, लाइफ साइकिल फंड एक ओपन-एंडेड स्कीम होगी, जिसमें पहले से तय मैच्योरिटी और लक्ष्य-आधारित निवेश के लिए ‘ग्लाइड पाथ’ जैसी विशेषताएं होंगी। यह फंड अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करेगा। इनमें इक्विटी, डेट, InvITs, एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs) और सोना-चांदी के ETF शामिल होंगे।
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• इनकी एक तय मैच्योरिटी होगी, जो 5 से 30 साल के बीच होगी
• ये पहले से तय ‘ग्लाइड पाथ’ के अनुसार एसेट एलोकेशन अपनाएंगे
• मैच्योरिटी नजदीक आने पर इक्विटी में निवेश अपने आप कम होता जाएगा
• समय के साथ डेट और सुरक्षित साधनों में निवेश बढ़ता जाएगा
• ये ओपन-एंडेड स्कीम्स होंगी, जिनकी एक तय मैच्योरिटी भी होगी
ए़डलवाइस म्युचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में सेबी ने एसेट मैनेजर्स के काम करने के दायरे को काफी बढ़ाया है। डेट पैसिव नियम, स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) और अब लाइफ साइकिल फंड्स इसके अच्छे उदाहरण हैं। ये बदलाव सिर्फ औपचारिक नहीं हैं, बल्कि निवेश विकल्पों को वास्तव में व्यापक बनाते हैं। इस लिहाज से यह समय इस इंडस्ट्री में काम करने के लिए काफी उत्साहजनक है।”
उन्होंने आगे कहा कि नई स्कीम कैटेगराइजेशन के तहत लाइफ साइकिल फंड्स की शुरुआत लक्ष्य-आधारित निवेश के लिए एक बड़ा कदम है। इसमें एसेट एलोकेशन अपने आप निवेशक की समयावधि के अनुसार ढलता है और लक्ष्य के करीब आते-आते इक्विटी से कम जोखिम वाले एसेट्स की ओर शिफ्ट हो जाता है। इससे बार-बार फैसले लेने की जरूरत कम होती है, निवेशक अनुशासित रहते हैं और यह सब टैक्स के लिहाज से भी कुशल तरीके से होता है। यह अवधारणा समझने में आसान है, नतीजों में प्रभावशाली है और लॉन्ग टर्म फाइनैंशियल प्लानिंग के लिए बहुत उपयोगी है।
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म्युचुअल फंड्स 5 साल की न्यूनतम और 30 साल की अधिकतम अवधि वाले लाइफ साइकिल फंड लॉन्च कर सकते हैं। ये फंड पांच-पांच साल के अंतराल (जैसे 5, 10, 15, 20, 25, 30 साल) में पेश किए जा सकते हैं और किसी भी समय एक म्युचुअल फंड अधिकतम 6 ऐसे फंड सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रख सकता है। इसके अलावा, जब किसी फंड की मैच्योरिटी में 1 साल से कम समय बचता है, तो यूनिटहोल्डर्स की सहमति से उसे निकटतम मैच्योरिटी वाले लाइफ साइकिल फंड में मर्ज किया जा सकता है।
5 साल से कम मैच्योरिटी पीरियड वाली स्कीम्स के लिए, सभी लाइफ साइकिल फंड इक्विटी निवेश की तय सीमा के अलावा अधिकतम 50 फीसदी तक इक्विटी आर्बिट्राज में निवेश कर सकते हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे फंड्स में कुल इक्विटी और इक्विटी से जुड़े निवेश 65 से 75 फीसदी के बीच ही रहें।
लाइफ साइकिल फंड में पहले से तय ‘ग्लाइड पाथ’ के तहत समय के साथ इक्विटी में निवेश धीरे-धीरे कम किया जाएगा। हालांकि ये योजनाएं पूरे इन्वेस्टमेंट पीरियड में रिडेम्प्शन (निकासी) के लिए खुली रहेंगी, लेकिन “वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने” के लिए इसमें एग्जिट लोड को ज्यादा रखा गया है। निवेश के एक साल के भीतर निकासी करने पर 3 फीसदी एग्जिट लोड देना होगा। दो साल के भीतर निकासी पर 2 फीसदी और तीन साल के भीतर निकासी पर 1 फीसदी एग्जिट लोड लगेगा।
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ए़डलवाइस म्युचुअल फंड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट निरंजन ने कहा कि लाइफ साइकिल फंड्स निवेशकों के लिए कई तरह से फायदेमंद हैं।
• पुराने रिटायरमेंट फंड्स में स्थिर एसेट एलोकेशन की समस्या को खत्म करता है।
• निवेशक के लाइफ साइकिल के अनुसार जोखिम को संतुलित करता है।
• भावनात्मक आधार पर लिए जाने वाले एसेट एलोकेशन के फैसलों को कम करता है।
• एसेट एलोकेशन बदलने के लिए फंड स्विच करने पर लगने वाले टैक्स की समस्या को दूर करता है।