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SEBI ने बढ़ाया MF कैटगरी का दायरा, इक्विटी स्कीम्स को गोल्ड और सिल्वर में निवेश की मिली मंजूरी

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सोना और चांदी में निवेश का विकल्प मिलने से फंड मैनेजरों को बाजार की अस्थिरता से निपटने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा

Last Updated- February 26, 2026 | 4:05 PM IST
mutual fund

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्युचुअल फंड (MF) के लिए नई स्कीम विकल्पों की शुरुआत की है और एक्टिव इक्विटी स्कीम्स को सोना और चांदी में निवेश की अनुमति दे दी है। स्कीम कैटेगराइजेशन में किए गए बदलावों में सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स (जैसे रिटायरमेंट और चिल्ड्रन फंड) को बंद करना भी शामिल है।

सोने-चांदी में निवश कर सकेंगी इक्विटी स्कीम्स

सोना और चांदी में निवेश का विकल्प मिलने से फंड मैनेजरों को बाजार की अस्थिरता से निपटने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा। अब तक इक्विटी स्कीम्स को अपने कुल निवेश का 20-35 फीसदी तक हिस्सा नॉन-इक्विटी इंस्ट्रूमेंट जैसे डेट, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) में लगाने की अनुमति थी। अब इस मिक्स में सोना और चांदी को भी शामिल किया जा सकेगा।

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सेबी ने लॉन्च किया ‘लाइफ साइकिल फंड्स’

इस बदलाव के तहत एक और बड़ा कदम ‘लाइफ साइकिल फंड्स’ की शुरुआत है। ये लक्ष्य-आधारित योजनाएं होंगी, जिनकी एक पहले से तय मैच्योरिटी पीरियड होगी और अलग-अलग एसेट क्लास– इक्विटी, डेट, REITs और InvITs, एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स तथा सोना-चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स– में निवेश करेंगी।

लाइफ साइकिल फंड्स की अवधि 5 से 30 साल के बीच हो सकती है, जिसमें पहले से तय ‘ग्लाइड पाथ’ के तहत समय के साथ इक्विटी में निवेश धीरे-धीरे कम किया जाएगा। हालांकि ये योजनाएं पूरे इन्वेस्टमेंट पीरियड में रिडेम्प्शन (निकासी) के लिए खुली रहेंगी, लेकिन “वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने” के लिए इन पर ज्यादा एग्जिट लोड (पहले साल में 3 फीसदी) लागू होगा।

इक्विटी और हाइब्रिड कैटेगरीज की संख्या बढ़ी

सेबी ने एक्टिव इक्विटी और हाइब्रिड कैटेगरीज की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी है। अब फंड हाउस को वैल्यू और कॉन्ट्रा दोनों तरह की योजनाएं (पहले इनमें से केवल एक की अनुमति थी) और बैलेंस्ड तथा एग्रेसिव हाइब्रिड फंड दोनों पेश करने की अनुमति मिल गई है।

इसके अलावा, एक नई सेक्टोरल डेट फंड कैटेगरी भी शुरू की गई है, जो किसी खास सेक्टर के डेट इंस्ट्रूमेंट्स में 80 फीसदी से ज्यादा निवेश करेगी। सेबी ने कहा कि म्युचुअल फंड्स फाइनैंशियल सर्विसेज, एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों पर फोक्स्ड योजनाएं लॉन्च कर सकते हैं, बशर्ते उनमें पर्याप्त लिक्विडिटी हो।

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सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स पर बढ़ेगी सख्ती

स्कीम कैटेगराइजेशन में हुए सुधार में सेक्टोरल और थीमैटिक स्कीम्स की बढ़ती संख्या पर भी ध्यान दिया गया है। नए फ्रेमवर्क के तहत म्युचुअल फंड्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि सेक्टोरल या थीमैटिक स्कीम्स और अन्य इक्विटी स्कीम्स (लार्जकैप फंड्स को छोड़कर) के बीच पोर्टफोलियो ओवरलैप 50 फीसदी से ज्यादा न हो। सेबी ने मौजूदा योजनाओं को इन ओवरलैप सीमाओं के अनुरूप बनाने के लिए तीन साल का ‘ग्लाइड पाथ’ दिया है। यदि वे इस अवधि में मानकों पर खरे नहीं उतरते, तो उन्हें आपस में विलय (मर्ज) करना होगा।

बड़े फंड हाउस को दूसरी स्कीम की अनुमति नहीं

सेबी ने पहली बार जुलाई 2025 में एक कंसल्टेशन पेपर के जरिए री-कैटेगराइजेशन की योजना सार्वजनिक की थी। हालांकि ज्यादातर प्रस्ताव अंतिम सर्कुलर में शामिल कर लिए गए हैं, लेकिन 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा आकार वाली बड़ी योजनाओं के लिए उसी कैटेगरी में एक और फंड लॉन्च करने की अनुमति देने का प्रस्ताव अंतिम ढांचे में शामिल नहीं किया गया है।

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First Published - February 26, 2026 | 4:05 PM IST

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