facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिकी टैरिफ का झटका: सोलर निर्यात पर दबाव, घरेलू क्षमता में ओवरसप्लाई का खतराफरवरी में FPI निवेश 17 महीने के हाई पर, करीब तीन साल बाद म्युचुअल फंड बने शुद्ध बिकवालSEBI का सख्त आदेश: सोशल मीडिया सामग्री के लिए पहचान का खुलासा अनिवार्यSEBI का बड़ा फैसला: गोल्ड-सिल्वर वैल्यूएशन अब घरेलू स्पॉट प्राइस से तय होगाबदलेंगे स्मार्टफोन PLI नियम! अगले चरण में उत्पादन के बजाय लोकल वैल्यू-एडिशन को मिल सकती है प्राथमिकताRBI के स्पष्टीकरण से UPI लेनदेन पर राहत, PhonePe-Paytm को बड़ा फायदाटैरिफ पर अनिश्चितता के बीच हॉवर्ड लटनिक और पीयूष गोयल में ‘सार्थक’ बातचीतएंटरप्राइज एआई में तेजी से बढ़त: यूनिफोर को भारत में दिख रहीं अपार संभावनाएंiPhone के ग्लोबल उत्पादन का 30% भारत में होने की संभावना, Apple की रणनीति में बदलाव की उम्मीद नहींस्टार्टर तकनीक के लिए सेडेमैक की नजर ग्लोबल बाजार पर, टीवीएस-बजाज के बाद विदेशी OEM से बातचीत तेज

RBI के स्पष्टीकरण से UPI लेनदेन पर राहत, PhonePe-Paytm को बड़ा फायदा

Advertisement

आरबीआई ने उद्योग को स्पष्ट तौर पर बताया है कि छोटे व्यापारियों और असंगठित खुदरा क्षेत्र के यूपीआई लेनदेन के लिए भुगतान एग्रीगेटर (पीए) की जरूरत नहीं होती है

Last Updated- February 26, 2026 | 10:18 PM IST
UPI

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया स्पष्टीकरण से फोनपे, पेटीएम आदि फिनटेक कंपनियों को राहत मिलेगी। यह राहत खास तौर पर उन फिनटेक कंपनियों के लिए काफी मायने रखती है जिनके पास असंगठित खुदरा क्षेत्र में व्यापारियों के बीच गहरी पैठ वाले नेटवर्क हैं।

उद्योग के वि​भिन्न सूत्रों के अनुसार आरबीआई ने उद्योग को स्पष्ट तौर पर बताया है कि छोटे व्यापारियों और असंगठित खुदरा क्षेत्र के यूपीआई लेनदेन के लिए भुगतान एग्रीगेटर (पीए) की जरूरत नहीं होती है। ऐसे व्यापारियों को आम तौर पर पीयर-टू-पीयर मर्चेंट यानी पी2पीएम कहा जाता है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने सेल्फ-रेगुलेटेड पीएसओ एसोसिएशन (एसआरपीए) के एक ईमेल को देखा है जिसमें इस मुद्दे पर उद्योग को आरबीआई की प्रतिक्रिया के बारे में बताया गया है।

यह स्पष्टीकरण उद्योग के उस अनुरोध के बाद आया है जिनमें यह स्पष्ट करने की मांग की गई थी कि क्या पीए मानदंड पी2पीएम लेनदेन पर भी लागू होते हैं जहां आम तौर पर छोटे व्यापारी और छोटे लेनदेन होते हैं।

आरबीआई और एनपीसीआई ने इस संबंध में बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया।

पी2पीएम लेनदेन को अब भुगतान एग्रीगेटर पर मुख्य निर्देश (एमडी-पीए) के दायरे से स्पष्ट तौर पर बाहर रखा गया है। इसके लिए अपने ग्राहक को जाने (केवाईसी) मानदंडों सहित सख्त जांच-परख की प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। आरबीआई के इस कदम से फोनपे और पेटीएम जैसी बड़ी फिनटेक फर्मों पर अनुपालन का दबाव कम होने की उम्मीद है। इन कंपनियों की सेवा लेने वाले व्यापारियों की तादाद काफी अ​धिक है जिनके बीच क्यूआर कोड और साउंडबॉक्स व्यापक तौर पर उपलब्ध कराए गए हैं।

आरबीआई ने भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों के लिए स्व-विनियमित संगठन एसआरपीए को भेजे ईमेल में कहा है, ‘यह सलाह दी जाती है कि ऊपर बताए गए लेनदेन (पी2पीएम) के लिए पीए की आवश्यकता नहीं है और इसलिए वे एमडी-पीए के दायरे से बाहर हैं। साथ ही पी2पीएम व्यापारियों की उचित जांच-परख करने की जिम्मेदारी आंतरिक नीतियों के अनुसार अधिग्रहणकर्ता बैंक (पेयी पीएसपी) की है।’

रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी सहायता प्रदान करते हुए पी2पीएम लेनदेन को सुगम बनाने वाले किसी भी मध्यस्थ को पेयी भुगतान सेवा प्रदाता (पीएसपी) के लिए प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाता (टीएसपी) के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए।

आरबीआई का यह रुख पी2पीएम लेनदेन के अनोखे ढांचे की पृष्ठभूमि में आया है जहां रकम को सीधे ग्राहक के बैंक खाते से व्यापारी के बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाता है। पी2पीएम श्रेणी को नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने 2019 में शुरू किया था। यह अन्य पीयर-टु-मर्चेंट (पी2एम) मॉडल के विपरीत है जहां लाइसेंस प्राप्त भुगतान एग्रीगेटर खास एस्क्रो खातों के जरिये समय-समय पर धन का प्रबंधन और निपटान करते हैं।

Advertisement
First Published - February 26, 2026 | 10:17 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement