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Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?

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2024-25 की IRDAI सालाना रिपोर्ट में जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों का कंपनी-वाइज ICR डेटा दिया गया है, जो 2026 में पॉलिसी लेने वालों के लिए उपयोगी है

Last Updated- January 03, 2026 | 9:38 PM IST
Health Insurance
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त लोग आमतौर पर प्रीमियम, फायदे और अस्पतालों के नेटवर्क की तुलना करते हैं। लेकिन एक बहुत जरूरी चीज जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वो है कि इंश्योरेंस कंपनी क्लेम का पैसा समय पर और आसानी से देती है या नहीं। इसका सबसे अच्छा संकेत है इंकरड क्लेम रेशियो (ICR), जो हर साल इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) जारी करती है।

2024-25 के लिए IRDAI की नई सालाना रिपोर्ट में जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों का कंपनी-वाइज ICR डेटा दिया गया है। 2026 में पॉलिसी लेने वाले लोगों के लिए ये जानकारी काफी काम की है।

इंकरड क्लेम रेशियो का मतलब क्या है?

ICR बताता है कि एक फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने जितना प्रीमियम इकट्ठा किया, उसका कितना हिस्सा क्लेम सेटल करने में खर्च किया। मिसाल के तौर पर, अगर ICR 85 फीसदी है तो इसका मतलब है कि हर 100 रुपये प्रीमियम पर कंपनी ने 85 रुपये क्लेम के रूप में दिए।

इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 70 से 90 फीसदी के बीच का ICR सबसे ठीक रहता है। बहुत कम रेशियो का मतलब हो सकता है कि कंपनी क्लेम देने में सख्ती करती है, जबकि लगातार ज्यादा रेशियो कंपनी की आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल सकता है।

इंडस्ट्री का आंकड़ा

IRDAI के मुताबिक, 2024-25 में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर का कुल ICR 82.88 फीसदी रहा, जो पिछले साल से थोड़ा ज्यादा है। नेट इंकरड क्लेम करीब 1.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए, जिसकी वजह हेल्थकेयर का बढ़ता खर्च और ज्यादा इस्तेमाल है।

पब्लिक सेक्टर की कंपनियां ऊंचा रेशियो दिखा रही हैं, जबकि प्राइवेट और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां थोड़ा संयमित स्तर पर हैं।

Also Read: छंटनी का झटका और बीमा की चिंता: नौकरी जाते ही आपके हेल्थ इंश्योरेंस का क्या होता है? एक्सपर्ट से समझें

प्राइवेट सेक्टर की जनरल इंश्योरेंस कंपनियां: FY25 में हेल्थ सेगमेंट का ICR

IRDAI के डेटा के अनुसार, बड़े प्राइवेट जनरल इंश्योरर्स का 2024-25 में हेल्थ सेगमेंट का इंकरड क्लेम रेशियो इस प्रकार रहा:

  • एकको जनरल इंश्योरेंस: 57.82 फीसदी
  • बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस: 87.31 फीसदी
  • चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस: 73.04 फीसदी
  • फ्यूचर जेनराली इंडिया इंश्योरेंस: 95.29 फीसदी
  • गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस: 83.78 फीसदी
  • एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस: 84.85 फीसदी
  • आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस: 82.24 फीसदी
  • इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस: 83.74 फीसदी
  • क्षेमा जनरल इंश्योरेंस: 40.03 फीसदी
  • लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस: 92.99 फीसदी
  • मगमा जनरल इंश्योरेंस: 85.54 फीसदी
  • नवी जनरल इंश्योरेंस: 101.89 फीसदी
  • राहेजा क्यूबीई जनरल इंश्योरेंस: 105.12 फीसदी
  • रिलायंस जनरल इंश्योरेंस: 87.34 फीसदी
  • रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस: 95.56 फीसदी
  • एसबीआई जनरल इंश्योरेंस: 82.19 फीसदी
  • श्रीराम जनरल इंश्योरेंस: 74.55 फीसदी
  • टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस: 76.24 फीसदी
  • यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस: 97.12 फीसदी
  • जूनो जनरल इंश्योरेंस: 90.12 फीसदी
  • ज्यूरिख कोटक जनरल इंश्योरेंस: 70.69 फीसदी

पब्लिक सेक्टर की जनरल इंश्योरेंस कंपनियां

पब्लिक सेक्टर की कंपनियों ने FY25 में काफी ऊंचा रेशियो दर्ज किया:

  • नेशनल इंश्योरेंस: 96.05 फीसदी
  • न्यू इंडिया एश्योरेंस: 100.98 फीसदी
  • ओरिएंटल इंश्योरेंस: 102.58 फीसदी
  • यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस: 97.51 फीसदी

IRDAI के अनुसार, पब्लिक सेक्टर जनरल इंश्योरर्स का कुल ICR 99.84 फीसदी रहा।

स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां

स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों का कुल ICR 2024-25 में 68.06 फीसदी रहा:

  • आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस: 71.50 फीसदी
  • केयर हेल्थ इंश्योरेंस: 64.53 फीसदी
  • मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस: 74.81 फीसदी
  • निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस: 61.22 फीसदी
  • स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस: 70.30 फीसदी

नोट: हेल्थ में पर्सनल एक्सीडेंट भी शामिल है

ICR को अकेले देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कई सालों का ट्रेंड, क्लेम सेटलमेंट का समय, एक्सक्लूजन और कस्टमर शिकायतों के रिकॉर्ड को भी ध्यान में रखें। फिर भी, IRDAI का कंपनी-वाइज ICR डेटा ये समझने का अच्छा तरीका है कि कंपनियां क्लेम देने और अपनी आर्थिक स्थिति के बीच कैसे बैलेंस बनाती हैं।

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First Published - January 3, 2026 | 9:38 PM IST

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