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शुरुआती घोषणा के दो साल बाद अब NCERT यानी नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग को जनवरी 2026 के आखिर तक डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की उम्मीद है। इस बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि यह कदम बहुत करीब आ चुका है।
शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस दर्जे को देने की सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। अब UGC यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के साथ एक मीटिंग के बाद अगले 15-20 दिनों में अंतिम पुष्टि हो जाएगी।
यह दर्जा डी नोवो कैटेगरी के तहत दिया जाएगा। UGC के नियमों में डी नोवो संस्थान वो होता है जो ज्ञान के नए और उभरते क्षेत्रों में पढ़ाई और रिसर्च पर फोकस करता हो। कमीशन पूरी प्रक्रिया के बाद ही इसे तय करता है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में सबसे पहले इसकी घोषणा की थी। उस वक्त उन्होंने कहा था कि NCERT जब रिसर्च यूनिवर्सिटी बनेगी तो दुनिया भर के साथ सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में भारत का योगदान बढ़ेगा।
प्रधान ने उस समय रिपोर्टर्स से बात करते हुए कहा कि अब पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़ने का वक्त आ गया है। भारत को स्किल, उद्यमिता और अप्रेंटिसशिप पर आधारित शिक्षा व्यवस्था पर जोर देना चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि आज की शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री देना नहीं बल्कि युवाओं को व्यावहारिक क्षमता और आत्मनिर्भरता से लैस करना होना चाहिए। लंबे समय तक भारत में शिक्षा किताबों और परीक्षाओं तक सीमित रही, लेकिन बदलते समय में इंडस्ट्री को असली काम की स्किल वाले युवा चाहिए।
मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार शिक्षक प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने की योजना बना रही है। इसका मकसद नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 में तकनीक पर दिए गए जोर को पूरा करना है।
अधिकारियों ने कहा कि नया विकसित भारत शिक्षा आधारस्तंभ (BBSA) शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम को अपग्रेड करने का मौका देगा। इससे नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के अंतर्गत आने वाले संस्थानों के लिए नए मानक तय किए जा सकेंगे।