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नकली नोटों का खतरा अब सिर्फ बाजार या आम लेनदेन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे देश के बैंकिंग सिस्टम को भी चुनौती दे रहा है। हाल ही में दिल्ली से सामने आए एक मामले ने इस खतरे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। राजधानी के 18 सरकारी और निजी बैंकों ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें बड़ी संख्या में नकली करेंसी नोट बैंकों में जमा होने की बात सामने आई है।
छह महीने में 11 हजार नकली नोट बैंकों में जमा
बैंकों की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2025 के पहले छह महीनों के भीतर करीब 11,000 नकली करेंसी नोट अलग-अलग बैंक शाखाओं में जमा किए गए। इन नकली नोटों की कुल कीमत लगभग 34 लाख रुपये बताई जा रही है। यह रकम और संख्या दोनों ही यह दिखाने के लिए काफी हैं कि नकली नोटों का नेटवर्क कितने संगठित तरीके से काम कर रहा है।
सरकारी ही नहीं, निजी बैंक भी चपेट में
इस मामले में सरकारी बैंकों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के बैंक भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, सिर्फ निजी बैंकों की शाखाओं में ही करीब 4,000 नकली नोट पाए गए, जिनकी कीमत लगभग 16 लाख रुपये आंकी गई है। ये नोट बैंक काउंटर पर सामान्य लेनदेन के दौरान जमा किए गए, जिससे शुरुआती स्तर पर इनकी पहचान नहीं हो सकी।
दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया केस
बैंकों की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के तहत कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में BNS की धारा 180 के तहत केस दर्ज किया गया है। जब्त किए गए सभी नकली नोटों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये नोट किस तकनीक से बनाए गए और इनके पीछे कौन सा नेटवर्क सक्रिय है।
क्यों बढ़ रही है नकली नोटों की समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि 500 रुपये का नोट रोजमर्रा के लेनदेन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसी वजह से नकली नोट गिरोह इसे आसानी से खपाने की कोशिश करते हैं। कई बार नोट दिखने में इतने असली लगते हैं कि जल्दबाजी में बैंक काउंटर तक पहुंच जाते हैं।
आम लोगों और बैंकों दोनों के लिए चेतावनी
इस घटना ने बैंकों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित किया है। नकली नोट अगर बैंक तक पहुंच रहे हैं, तो बाजार में इनके चलन का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में हर लेनदेन के दौरान नोटों की जांच और RBI द्वारा बताए गए सुरक्षा फीचर्स पर ध्यान देना जरूरी हो गया है।
नकली नोटों के इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार मानी जा रही है।
RBI का MANI ऐप कैसे करता है मदद
रिजर्व बैंक ने आम लोगों के लिए MANI नाम का मोबाइल ऐप तैयार किया है। यह ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर मुफ्त उपलब्ध है। इसकी खास बात यह है कि यह बिना इंटरनेट के भी काम करता है।
मोबाइल कैमरे से नोट को स्कैन करने पर ऐप यह बताने में मदद करता है कि नोट असली है या नहीं। पुराने या थोड़े खराब नोटों की पहचान में भी यह उपयोगी साबित होता है।
असली 500 रुपये के नोट को ऐसे पहचानें
असली नोट में बीच में एक चमकदार सिक्योरिटी स्ट्रिप होती है, जिस पर भारत और RBI लिखा होता है। नोट को हल्का सा झुकाने पर इसका रंग बदलता दिखाई देता है।
महात्मा गांधी की तस्वीर के पास वॉटरमार्क होता है, जो रोशनी में साफ नजर आता है। इसके अलावा माइक्रो लेटरिंग में RBI और 500 लिखा होता है, जो नकली नोटों में अक्सर साफ नहीं दिखता।
घर पर ऐसे करें आसान जांच
अगर आपके पास UV लाइट नहीं है, तो मोबाइल के फ्लैश का इस्तेमाल किया जा सकता है। फ्लैश के ऊपर नीले रंग का पारदर्शी प्लास्टिक रखकर नोट पर रोशनी डालें। असली नोट में सिक्योरिटी थ्रेड और सीरियल नंबर हल्की चमक के साथ नजर आते हैं।