प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
विश्लेषकों ने सिगरेट निर्माता आईटीसी के अगले दो वर्षों की आय अनुमानों में भारी कटौती की है। उन्हें आशंका है कि तंबाकू पर उत्पाद शुल्क में भारी वृद्धि के कारण कंपनी की लाभप्रदता और मार्जिन में अच्छी-खासी गिरावट आएगी। आय अनुमानों में कमी के अलावा ब्रोकरेज फर्मों ने आईटीसी के स्टॉक की रेटिंग और शेयर के कीमत लक्ष्यों में भी कटौती की है। वे उच्च शुल्क लगाने को सरकार के उदार शुल्क संरचना संबंधी रुख में बड़ा बदलाव मानते हैं।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में तंबाकू उत्पादों पर करों में कमी के परिणामस्वरूप संगठित कंपनियों के वॉल्यूम में वृद्धि हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि ताजा घटनाक्रम आने वाले वर्षों में उद्योग के हितों और इसकी वृद्धि संभावनाओं के लिए हानिकारक है।
पीएल कैपिटल के विश्लेषकों के अनुसार सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क व्यवस्था बहाल करने और बढ़ाने के सरकार के निर्णय से कर देने वाली सिगरेटों और अवैध उत्पादों के बीच कीमतों का अंतर संभवतः बढ़ जाएगा, क्योंकि अवैध उत्पादों को भारी छूट पर बेचा जा सकता है।
ब्रोकरेज फर्म ने जोर दिया कि यह जोखिम मध्यम कीमत वाले सेगमेंट में सबसे ज्यादा गंभीर है, जो आईटीसी की कुल बिक्री का बड़ा हिस्सा है, जहां उपभोक्ता कीमतों को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं और सिगरेट पीना बंद करने के बजाय तस्करी वाली या नकली सिगरेट की ओर रुख कर सकते हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के अनुसार हाल में करों में स्थिरता को देखते हुए आईटीसी सिगरेट के क्षेत्र में नए उत्पाद लॉन्च करने में काफी सक्रिय रही है, जिससे सकारात्मक उत्पाद मिश्रण को समर्थन मिला है। हालांकि, कीमतों में भारी वृद्धि को देखते हुए भविष्य में यह मिश्रण कमजोर होगा।
आईटीसी का शेयर कारोबारी सत्र के दौरान 5.1 फीसदी टूट गया था, लेकिन अंत में 3.7 फीसदी की नरमी के साथ 350.15 रुपये पर बंद हुआ। इस तरह से दो सत्र में शेयर 13.11 फीसदी गिर चुका है। इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स 0.67 फीसदी चढ़कर बंद हुआ।
1 जनवरी, 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अधिसूचित किया कि 65 मिमी या उससे कम लंबाई वाली बिना फिल्टर वाली सिगरेट की दर 2,050 रुपये प्रति 1,000 स्टिक होगी और 65-70 मिमी से अधिक लंबाई वाली सिगरेट की दर 3,600 रुपये प्रति 1,000 स्टिक होगी। फिल्टर वाली सिगरेट के मामले में 65 मिमी और 65-70 मिमी से अधिक लंबाई वाली सिगरेट की दर क्रमशः 2,100 और 4,000 रुपये प्रति 1,000 स्टिक होगी। अन्य प्रकार की सिगरेट की दर 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक होगी। गौरतलब है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2013-18 के दौरान तंबाकू उद्योग पर दो अंकों की कर वृद्धि की घोषणा की थी।
हालांकि, वित्त वर्ष 2019-26 के दौरान करों को स्थिर रखा गया लेकिन इस दौरान वित्त वर्ष 2021 में केवल एक बार दो अंकों की वृद्धि हुई। विश्लेषकों का मानना है कि सिगरेट पर कर वृद्धि से केंद्र सरकार का इरादा कराधान को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानदंडों के अनुरूप करने का है, जो उसे एमआरपी पर 75 फीसदी कर लगाने की अनुमति देता है। पीएल कैपिटल ने बताया कि मौजूदा कदम से सिगरेट पर कुल कराधान 50 फीसदी से बढ़कर 61 फीसदी हो जाता है, जो अभी भी डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित दर से काफी कम है।
नोमूरा, पीएल कैपिटल और एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज ने आईटीसी के शेयरों की रेटिंग घटाकर ‘रिड्यूस’ कर दी है। एमओएफएसएल और जेपी मॉर्गन ने रेटिंग घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दी है। इसके अलावा जेफरीज और नुवामा इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज ने इसे ‘होल्ड’ पर रखा है और मॉर्गन स्टैनली ने इसे ‘इक्वलवेट’ पर रखा है।
एमके ग्लोबल ने लक्षित कीमत 475 रुपये से घटाकर 350 रुपये करते हुए कहा, मौजूदा एमआरपी पर हम केएसएफटी, एलएसएफटी और आरएसएफटी में प्रति शेयर कर भुगतान में 50 फीसदी से अधिक और डीएसएफटी में 26 फीसदी की वृद्धि देख रहे हैं। हमें उम्मीद है कि पोर्टफोलियो में चरणबद्ध तरीके से लगभग 32 फीसदी की मूल्य वृद्धि होगी।
एमओएफएसएल के अधिकारियों ने कहा कि हालांकि तंबाकू लॉबी इस कर वृद्धि का विरोध कर रही है, लेकिन अधिसूचित करों में कोई भी बदलाव वैध सिगरेट बाजार को बहुत प्रभावित नहीं करेगा।
इसमें कहा गया है, कंपनी के लिए अपनी लाभप्रदता को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। मूल्य वृद्धि की रणनीति वॉल्यूम/एबिट की संवेदनशीलता का आकलन करने के लिए अहम होगी। हम वित्त वर्ष 2027 में एबिट में 6 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं और मूल्य वृद्धि की प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिगरेट पर आय का दबाव, निकट भविष्य के उत्प्रेरकों (तंबाकू की नरम कीमतें, एफएमसीजी और कागज में रिकवरी) और मूल्यांकन पर सकारात्मक प्रभाव को कम कर देगा। उसने लक्षित कीमत घटाकर 400 रुपये कर दी है।