दिसंबर 2025 की तिमाही (Q3FY26) में भारतीय टेलीकॉम कंपनियों की प्रति ग्राहक औसत कमाई यानी ARPU में हल्की बढ़ोतरी रहने की उम्मीद है। JM Financial के मुताबिक, तिमाही आधार पर ARPU 0.4 से 1 फीसदी तक बढ़ सकता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि ग्राहक धीरे-धीरे महंगे और बेहतर प्लान की तरफ जा रहे हैं। इस दौरान रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के ग्राहकों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जबकि वोडाफोन आइडिया को ग्राहकों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
JM Financial ने भारती एयरटेल, भारती हेक्साकॉम और टाटा कम्युनिकेशंस पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने एयरटेल का टारगेट प्राइस 2,460 रुपये, भारती हेक्साकॉम का 2,195 रुपये और टाटा कम्युनिकेशंस का 2,250 रुपये तय किया है। वोडाफोन आइडिया के शेयर पर ‘Add’ रेटिंग बनाए रखी है और उसका टारगेट प्राइस बढ़ाकर 12.5 रुपये कर दिया है। JM Financial ने रिलायंस जियो को लेकर भी अपना पॉजिटिव नजरिया बनाए रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि वित्त वर्ष 2025 से 2028 के बीच टेलीकॉम सेक्टर में प्रति ग्राहक औसत कमाई यानी ARPU करीब 12 फीसदी की सालाना दर से बढ़ सकती है।
रिलायंस जियो की आमदनी में तिमाही आधार पर 2.1 फीसदी और EBITDA में 2.6 फीसदी की बढ़त का अनुमान है। कंपनी के करीब 84 लाख नए ग्राहक जुड़ सकते हैं और ARPU बढ़कर करीब 212 रुपये हो सकता है। वहीं, भारती एयरटेल की वायरलेस कमाई 1.7 फीसदी और EBITDA 2.1 फीसदी बढ़ सकता है।
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एयरटेल के करीब 33 लाख नए ग्राहक जुड़ने की उम्मीद है और ARPU 259 रुपये तक पहुंच सकता है। दूसरी ओर, वोडाफोन आइडिया की आमदनी और मुनाफा लगभग स्थिर रह सकता है। कंपनी के करीब 35 लाख ग्राहक कम हो सकते हैं, हालांकि ARPU में 1.1 फीसदी की बढ़त के साथ यह करीब 169 रुपये तक पहुंच सकता है।
इंडस टावर्स की कमाई से होने वाला मुनाफा थोड़ा बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि वोडाफोन आइडिया अपने नेटवर्क को फैला रही है और एयरटेल गांवों में ज्यादा टावर लगा रही है। इससे इंडस टावर्स के टावरों पर नई कंपनियां जुड़ रही हैं। हालांकि, कंपनी की कुल कमाई में ज्यादा बदलाव नहीं होगा।
ब्रोकरेज ने इंडस टावर्स के शेयर पर ‘Reduce’ रेटिंग बरकरार रखी है, हालांकि उसका टारगेट प्राइस बढ़ाकर 400 रुपये किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर में सिर्फ दो बड़ी कंपनियों का दबदबा बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।
वहीं, टाटा कम्युनिकेशंस की आमदनी और मुनाफा दोनों में हल्की बढ़त देखने को मिल सकती है। इसका मुख्य कारण कंपनी का डिजिटल कारोबार है। लेकिन केबल कटने और कुछ सार्क देशों से पैसा वसूलने में परेशानी के चलते कंपनी को दिक्कतें भी झेलनी पड़ सकती हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।