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‘हमें अमेरिकी बनने का कोई शौक नहीं’, ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप की बात को ठुकराया, कहा: हम सिर्फ ‘ग्रीनलैंडर’

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने पास नहीं लेता है तो उसे चीन या रूस कब्जा लेंगे, जो अमेरिका बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकता

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एजेंसियां   
Last Updated- January 10, 2026 | 9:34 PM IST

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री और वहां की सभी प्रमुख पार्टियों के नेताओं ने एक साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की बात दोहराई। ग्रीनलैंड के नेता कहते हैं कि इस द्वीप का भविष्य सिर्फ और सिर्फ वहां के लोगों को तय करना है।

शुक्रवार रात को जारी एक संयुक्त बयान में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने चार अन्य पार्टी नेताओं के साथ मिलकर कहा, “हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते, हम डेनिश भी नहीं बनना चाहते, हम ग्रीनलैंडर हैं।” इस बयान पर पेले ब्रोबर्ग, मुते बी. एगेडे, अलेका हामंड और अक्कालु सी. जेरिमियासेन ने भी हस्ताक्षर किए।

ट्रंप की धमकी और ‘हार्ड वे’ वाली बात

राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को ही फिर से कहा कि वे ग्रीनलैंड को “आसान तरीके” से खरीदना या समझौता करना चाहते हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो “हार्ड वे” से काम चलेगा। उन्होंने ये भी कहा कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं किया तो रूस या चीन इसे अपने कब्जे में ले लेंगे, और अमेरिका को ऐसे पड़ोसी नहीं चाहिए। ट्रंप ने बिना ये बताए कि “हार्ड वे” से उनका क्या मतलब है, लेकिन व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा कि वे ग्रीनलैंड हासिल करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें सैन्य ताकत का इस्तेमाल भी शामिल है।

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बता दें कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक सेमी-ऑटोनॉमस इलाका है और नाटो का सदस्य होने के कारण डेनमार्क वहां की सुरक्षा करता है। लेकिन ग्रीनलैंड की अपनी कोई सेना नहीं है और वहां सिर्फ 57,000 के आस-पास लोग रहते हैं। दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप होने के बावजूद यहां की आबादी बहुत कम है।

ग्रीनलैंड के लोगों का अपना फैसला

ग्रीनलैंड के नेताओं ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि “अमेरिका का हमारे देश के प्रति तिरस्कार अब बंद होना चाहिए।” उन्होंने ये भी दोहराया कि ग्रीनलैंड का भविष्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर और ग्रीनलैंड के लोगों की बातचीत से तय होगा। उन्होंने कहा, “कोई दूसरा देश इसमें दखल नहीं दे सकता। हम अपने देश का भविष्य खुद तय करेंगे वो भी बिना किसी जल्दबाजी, देरी या दबाव के।”

इस बीच गुरुवार को वॉशिंगटन में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की बैठक हुई थी और अगले हफ्ते फिर से बातचीत होने वाली है। डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश की तो ये नाटो के लिए आखिरी दिन होंगे।

First Published : January 10, 2026 | 9:34 PM IST