म्युचुअल फंड

जब शेयर बाजार लड़खड़ाया, तब BAFs ने संभाला; एक्सपर्ट्स बता रहे 2026 में क्यों हैं स्मार्ट चॉइस

साल 2025 शेयर बाजार के लिए मुश्किल रहा, इसके बावजूद BAFs ने औसतन 5.2 फीसदी रिटर्न दिया। यह प्रदर्शन फ्लेक्सी कैप, मिडकैप और स्मॉल कैप फंड्स से बेहतर रहा

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सर्वजीत के सेन   
Last Updated- January 15, 2026 | 4:02 PM IST

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAFs), जिन्हें डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंड (DAA) भी कहा जाता है, बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं। ये फंड इक्विटी में निवेश का फायदा देते हैं और साथ ही जोखिम को भी सीमित रखने की कोशिश करते हैं। साल 2025 शेयर बाजार के लिए मुश्किल रहा, इसके बावजूद BAFs ने औसतन 5.2 फीसदी रिटर्न दिया। यह प्रदर्शन फ्लेक्सी कैप फंड्स (3.6 फीसदी), मिडकैप फंड्स (2.4 फीसदी) और स्मॉल कैप फंड्स (-5.5 फीसदी) से बेहतर रहा।

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के मंथली डेटा के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक देश में 35 बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब 3.23 लाख करोड़ रुपये था। इन फंड्स में 2025 के दौरान लगभग 16,518 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया।

BAFs कैसे काम करते हैं?

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAFs) इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करते हैं। इनका एसेट एलोकेशन इंटरनल मॉडलों पर आधारित होता है, जो बाजार की स्थिति और वैल्यूएशन के अनुसार बदलता रहता है। फंड मैनेजर इसी तय दायरे में पोर्टफोलियो बनाते हैं और समय-समय पर इसके मिश्रण की समीक्षा करते रहते हैं।

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कुछ एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) काउंटर-साइक्लिकल स्ट्रैटेजी अपनाती हैं, यानी जब बाजार गिरा हुआ होता है तब इक्विटी में निवेश बढ़ाती हैं और तेजी के समय घटाती हैं। वहीं कुछ AMCs प्रो-साइक्लिकल स्ट्रैटेजी अपनाती हैं, जिसमें बाजार में तेजी आने पर इक्विटी का हिस्सा बढ़ाया जाता है और गिरावट के समय कम किया जाता है।

बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट के इक्विटी हेड सौरभ गुप्ता कहते हैं, “BAFs निवेशकों को इक्विटी और डेट के बीच निवेश को एक्टिव रूप से बदलते हुए अस्थिर बाजारों से निपटने का एक फ्रेमवर्क देते हैं। इनका मकसद अधिकतम रिटर्न पाना नहीं, बल्कि स्थिरता और डायवर्सिफिकेशन का फायदा देना है।”

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAFs) निवेशकों की एसेट एलोकेशन से जुड़ी मुश्किल को भी आसान बनाते हैं। गेनिंग ग्राउंड इन्वेस्टमेंट के फाउंडर रवि कुमार टी.वी. कहते हैं, “ज्यादातर लोग जानते हैं कि उन्हें इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करना चाहिए, लेकिन वे यह तय नहीं कर पाते कि कब ग्रोथ (इक्विटी) पर ज्यादा जोर दें और कब स्थिरता (बॉन्ड) की ओर जाएं। इन फंड्स का काम ही इन बदलावों को सिस्टमैटिक या सही तरीके से करना होता है।”

कठिन समय में बेहतर प्रदर्शन

बाजार में उतार-चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार (रेंज-बाउंड) के दौरान बैलेंस्ड एडवांटेज फंड आम तौर पर डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स की तुलना में बेहतर टिके रहते हैं। पिछले 10 वर्षों में इनके कैलेंडर-ईयर रिटर्न कभी भी निगेटिव नहीं रहे हैं।

हालांकि, तेजी के मजबूत दौर (बुल मार्केट) में ये फंड पीछे रह सकते हैं, क्योंकि इनमें इक्विटी का हिस्सा सीमित रखा जाता है। 2023 में इनका औसत रिटर्न 18.6 फीसदी और 2024 में 13.1 फीसदी रहा, जो ज्यादातर डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स से कम था।

सैमको म्युचुअल फंड के सीईओ विराज गांधी कहते हैं, “तेज और लंबे समय तक चलने वाली बाजार तेजी के दौरान, प्योर इक्विटी फंड्स की तुलना में रिटर्न कम हो सकता है क्योंकि इनमें इक्विटी एक्सपोजर नियंत्रित रखा जाता है।”

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मौजूदा हालात के लिए बेहतर

इक्विटी बाजारों को लेकर अनिश्चितता के बीच, इस साल बैलेंस्ड एडवांटेज फंड प्योर इक्विटी फंड्स की तुलना में ज्यादा स्थिर रिटर्न दे सकते हैं। गुप्ता कहते हैं, “भू-राजनीतिक और वैश्विक व्यापार से जुड़ी मौजूदा अनिश्चितताओं के चलते इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में BAFs, प्योर इक्विटी फंड्स के मुकाबले कम अस्थिर रह सकते हैं।”

वहीं गांधी का कहना है, “बाजार की मिली-जुली स्थिति को देखते हुए, 2026 में BAFs एक स्थिर भूमिका निभा सकते हैं। निवेशकों को प्योर इक्विटी फंड की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न और बेहतर डाउनसाइड कंट्रोल की उम्मीद करनी चाहिए।”

BAFs की कुछ सीमाएं भी हैं

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं होते। इनमें बाजार से जुड़ा जोखिम और पोर्टफोलियो में उतार-चढ़ाव रहता है। मासिक और तिमाही आधार पर इनके रिटर्न निगेटिव भी हो सकते हैं। कुमार कहते हैं, “BAFs कई बार गिरावट से सुरक्षा का झूठा एहसास दे देते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में इनमें भी बड़ी गिरावट आ सकती है।”
वह आगे कहते हैं कि इनका डेट हिस्सा ब्याज दर, क्रेडिट और लिक्विडिटी जोखिमों से प्रभावित होता है।

इसके अलावा, BAFs की एक्टिव मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी लागत को बढ़ा सकती है। गुप्ता के अनुसार, “क्योंकि बैलेंस्ड एडवांटेज फंड एक्टिव रूप से मैनेज होते हैं, इसलिए इनमें पैसिव या स्थिर एसेट एलोकेशन वाले फंड्स की तुलना में खर्च ज्यादा होता है, जिसका असर निवेशकों के नेट रिटर्न पर पड़ सकता है।”

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BAFs में किसे निवेश करना चाहिए?

बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAFs) उन निवेशकों के लिए बेहतर माने जाते हैं जो कम जोखिम के साथ इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं। हालांकि, इसके लिए सही निवेश अवधि और अनुशासन जरूरी है। कुमार कहते हैं, “तीन से पांच साल का नजरिया रखने वाले निवेशक, जो ज्यादा उतार-चढ़ाव से बचते हुए इक्विटी का फायदा लेना चाहते हैं, इन फंड्स में निवेश कर सकते हैं। रिटेल निवेशकों के लिए ऐसे फंड्स में 10 से 30 फीसदी तक निवेश करना उचित माना जाता है।”

वहीं गांधी का कहना है कि BAFs उन निवेशकों के लिए भी कारगर हैं जो थोड़े सतर्क रहते हुए ग्रोथ चाहते हैं और साथ ही गिरावट से कुछ हद तक सुरक्षा भी चाहते हैं।


(लेखक गुरुग्राम स्थित एक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

First Published : January 15, 2026 | 3:54 PM IST