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Smallcap Funds: 83% निवेश टॉप 750 शेयरों में, स्मॉलकैप फंड्स का फोकस क्यों बदला?

स्मॉलकैप फंड्स का ज्यादातर निवेश 251 से 750 रैंक वाली कंपनियों में है, जबकि बहुत छोटे और ज्यादा जोखिम वाले शेयरों में हिस्सेदारी सीमित रखी गई है।

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- January 15, 2026 | 1:23 PM IST

Smallcap Funds: शेयर बाजार में जब भी स्मॉलकैप का नाम आता है, तो सबसे पहले जोखिम, उतार चढ़ाव और गिरावट की बात होती है। लेकिन हकीकत यह है कि निवेशक अब इससे डर नहीं रहे हैं। बाजार में हलचल और कमजोर रिटर्न के बावजूद स्मॉलकैप फंड्स में पैसा लगातार आ रहा है। यही नहीं, फंड मैनेजर भी बहुत छोटे और ज्यादा जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाए हुए हैं और सोच समझकर निवेश कर रहे हैं।

Ventura की इस स्टडी के मुताबिक, स्मॉलकैप फंड्स आम धारणा के उलट बहुत छोटे और अनजाने शेयरों में ज्यादा पैसा नहीं लगा रहे हैं। बाजार में 1000वीं रैंक से नीचे आने वाले शेयरों में इन फंड्स की हिस्सेदारी बेहद कम है। ज्यादातर निवेश टॉप कंपनियों में ही किया जा रहा है, जिससे जोखिम को सीमित रखा जा सके।

251 से 750 रैंक वाले शेयर बने मजबूत आधार

Smallcap Funds का बड़ा हिस्सा उन कंपनियों में लगा है जो मार्केट कैप के हिसाब से 251 से 750 रैंक के बीच आती हैं। यही सेगमेंट इन फंड्स की असली ताकत माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ निवेश 751 से 1000 रैंक वाले शेयरों में भी है, जबकि संतुलन बनाए रखने के लिए फंड्स ने लार्ज और मिडकैप शेयरों में भी पैसा लगाया हुआ है। जरूरत पड़ने पर तुरंत नकदी के लिए कुछ हिस्सा कैश और डेट में भी रखा गया है।

पिछले कुछ सालों में स्मॉलकैप कंपनियों का साइज तेजी से बढ़ा है। जो कंपनियां कभी बहुत छोटी मानी जाती थीं, उनका मार्केट कैप कई गुना बढ़ चुका है। इससे साफ है कि स्मॉलकैप सिर्फ नाम से छोटे हैं, लेकिन ग्रोथ के मामले में काफी आगे निकल चुके हैं।

ऐसे सेक्टर जो लार्जकैप में नहीं मिलते

स्मॉलकैप सेगमेंट निवेशकों को ऐसे सेक्टरों तक पहुंच देता है जो लार्ज या मिडकैप में आसानी से नहीं मिलते। बिजनेस सर्विसेज, मीडिया और एंटरटेनमेंट जैसे सेक्टरों में कई अहम कंपनियां इसी कैटेगरी में आती हैं। यही वजह है कि स्मॉलकैप फंड्स को अलग और खास माना जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि कई जानी मानी कंपनियां, जिन्हें आम निवेशक मिडकैप या उससे बड़ी मानते हैं, वे असल में स्मॉलकैप की कैटेगरी में आती हैं। यह भ्रम भी स्मॉलकैप को लेकर गलत धारणा पैदा करता है, जबकि फंड मैनेजर इन्हें पूरी तरह स्मॉलकैप के रूप में ही देखते हैं।

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नुकसान के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम

हाल के महीनों में Smallcap Funds का प्रदर्शन कमजोर रहा है, इसके बावजूद निवेशकों ने पैसा निकालने के बजाय और निवेश किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अब छोटे समय के उतार चढ़ाव की बजाय लंबे समय की संभावनाओं पर भरोसा कर रहे हैं।

लंबी रेस के घोड़े बने स्मॉलकैप

Ventura की इस स्टडी के मुताबिक, स्मॉलकैप शेयरों में जोखिम जरूर है, लेकिन समय के साथ इस सेगमेंट में अनुशासन बढ़ा है और निवेश के मौके भी ज्यादा हुए हैं। लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न पाने के लिए पोर्टफोलियो में स्मॉलकैप की मौजूदगी जरूरी मानी जा रही है।

(डिस्क्लेमर: यह लेख ब्रोकरेज की रिपोर्ट पर आधारित है। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।)

First Published : January 15, 2026 | 1:23 PM IST