Office Market: वैश्विक आर्थिक अनिश्चतताओं और भू-राजनीति तनाव के बावजूद देश का ऑफिस मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। इसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। बीते वर्षों के दौरान कुल ऑफिस मार्केट में इनकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़कर सबसे ज्यादा हो गई है। आने वाले वर्षों में भी इनकी हिस्सेदारी और बढ़ने की उम्मीद है।
ऑफिस मार्केट आने वाले वर्षों में भी मजबूत रफ्तार बनाए रखने के लिए तैयार है। रियल एस्टेट रिसर्च फर्म वेस्टियन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में ऑफिस स्पेस की कुल मांग 6.1 करोड़ वर्ग फुट रही, जो 2024 में बढ़कर 7 करोड़ वर्ग फुट और 2025 में लगभग 8 करोड़ वर्ग फुट के स्तर पर पहुंच गई।
मौजूदा रुझानों को देखते हुए, 2026 के अंत तक ऑफिस स्पेस की मांग 8.5 से 9 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंचने का अनुमान है। इस वृद्धि में GCC की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। 2024 में कुल मांग में GCC की हिस्सेदारी 41 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़कर 45 फीसदी हो चुकी है और 2026 में इसके 50 फीसदी से अधिक होने की संभावना है।
बीएफएसआई, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, आरएंडडी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में GCC की बढ़ती मौजूदगी, मजबूत आर्थिक बुनियाद, कुशल टैलेंट पूल और ग्रेड-ए एवं ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए एक पसंदीदा ऑफिस डेस्टिनेशन बनाए रखेगी।
Also Read: SEBI का नया प्रस्ताव: ₹20,000 करोड़ AUM वाले इंडेक्स अब नियमों के दायरे में आएंगे
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद वर्ष 2025 भारत के ऑफिस रियल एस्टेट सेक्टर के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। वेस्टियन रिसर्च के अनुसार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) ने 2025 में भारत के ऑफिस मार्केट में सबसे बड़ी भूमिका निभाई और कुल ऑफिस स्पेस मांग का 45 फीसदी हिस्सा इन्हीं से आया।
आंकड़ों के मुताबिक जीसीसी द्वारा लीज पर लिया गया कुल ऑफिस स्पेस 3.49 करोड़ वर्ग फुट रहा, जो सालाना आधार पर 20 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। जीसीसी की मजबूत मांग, अनुकूल नीतिगत माहौल और एच-1बी वीजा पर सख्ती के चलते देशभर में ऑफिस स्पेस की कुल मांग 7.82 करोड़ वर्ग फुट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई
बढ़ती मांग को देखते हुए डेवलपर्स ने निर्माण गतिविधियों में तेजी लाई। वर्ष 2025 में 5.55 करोड़ वर्ग फुट का नया ऑफिस स्पेस बाजार में आया, जो किसी भी कैलेंडर वर्ष में अब तक का सबसे अधिक है। इसके बावजूद मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा रही, जिससे पैन-इंडिया वैकेंसी रेट 3.10 फीसदी अंक घटकर 13.9 से 10.8 फीसदी पर आ गया। पुणे को छोड़कर सभी प्रमुख शहरों में वैकेंसी में कमी दर्ज की गई। पुणे में 1.2 करोड़ वर्ग फुट की बड़ी सप्लाई के कारण वैकेंसी बढ़ी।
Also Read: Flexi-Cap Funds: 2025 में रहा सुपरस्टार, AUM ₹5.52 लाख करोड़; फंड मैनेजर पर है भरोसा तो करें निवेश
शहरों की बात करें तो बेंगलूरु 2.03 करोड़ वर्ग फुट के साथ सबसे बड़ा ऑफिस मार्केट बना रहा। इसके बाद मुंबई, हैदराबाद और एनसीआर का स्थान रहा। एनसीआर में जीसीसी गतिविधियों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जहां जीसीसी का हिस्सा 2024 के 18 फीसदी से बढ़कर 2025 में 45 फीसदी तक पहुंच गया।
ऑफिस लीजिंग में आईटी-आईटीईएस सेक्टर का दबदबा बना रहा, जिसकी कुल हिस्सेदारी 38 फीसदी रही। इसके बाद बीएफएसआई और फ्लेक्स स्पेस सेक्टर रहे, जिनका योगदान 14-14 फीसदी रहा। खास बात यह रही कि आईटी-आईटीईएस द्वारा लिए गए आधे से अधिक ऑफिस स्पेस जीसीसी से जुड़े रहे, जो सेक्टर में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।