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सरकार वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.4 प्रतिशत के फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य को पूरा करने की स्थिति में है। इतना ही नहीं, यह लक्ष्य तय अनुमान से भी बेहतर रह सकता है। PwC के पार्टनर और इकोनॉमिक एडवाइजरी सर्विसेज प्रमुख रनेन बनर्जी ने कहा कि यह स्थिति वैश्विक निवेशकों के लिए भारत की मजबूत वित्तीय अनुशासन की प्रतिबद्धता का सकारात्मक संकेत देगी।
हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नाममात्र GDP वृद्धि दर के अनुमान को 10.1 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत किए जाने के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि सरकार के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि PwC का मानना है कि इस संशोधन के बावजूद कुल GDP के आंकड़े बजट अनुमानों के करीब ही हैं, यानी गणना का आधार (डिनॉमिनेटर) कमजोर नहीं हुआ है।
रनेन बनर्जी के अनुसार, इसी वजह से सरकार के लिए 4.4 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करना आसान रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वित्त वर्ष (FY25) में सरकार ने 4.9 प्रतिशत के लक्ष्य के मुकाबले 4.8 प्रतिशत का घाटा दर्ज कर पहले ही बेहतर प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा, “सरकार के पास इस बार भी अतिरिक्त गुंजाइश है। आंकड़ों के लिहाज से राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत तक भी आ सकता है, जो यह दिखाएगा कि भारत न केवल वित्तीय सुधार के रास्ते पर है, बल्कि तय लक्ष्यों से बेहतर नतीजे दे रहा है।”
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में FY26 के लिए राजकोषीय घाटा 15.69 लाख करोड़ रुपये या GDP का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान पेश किया था।
PwC के मुताबिक, नाममात्र GDP वृद्धि में कमी की एक बड़ी वजह थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में नरमी है, खासकर खाद्य और तेल कीमतों में गिरावट। इससे GDP डिफ्लेटर कम हुआ और वास्तविक व नाममात्र वृद्धि के बीच का अंतर घटा।
हालांकि, कम नाममात्र वृद्धि का असर कर संग्रह पर पड़ सकता है। अनुमान है कि सकल कर राजस्व में करीब 1.9 ट्रिलियन रुपये की कमी आ सकती है। GST मुआवजा उपकर को समायोजित करने के बाद यह कमी लगभग 75 हजार करोड़ रुपये तक सीमित रह सकती है।
इसके बावजूद केंद्र सरकार के पास GST मुआवजा उपकर के अप्रयुक्त फंड से करीब 50 हजार करोड़ रुपये का बफर मौजूद है। वहीं, खर्च के मोर्चे पर राजस्व व्यय बजट अनुमान से करीब 2 प्रतिशत कम रहने की संभावना है, जबकि पूंजीगत व्यय लगभग तय लक्ष्य के अनुरूप रहने का अनुमान है।
कुल मिलाकर, कर राजस्व में संभावित कमी को खर्च में बचत से संतुलित किया जा सकता है। इसी कारण FY26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य न केवल हासिल होने की उम्मीद है, बल्कि इसके अनुमान से बेहतर रहने की संभावना भी बनी हुई है।
-भाषा इनपुट के साथ